कहानी

सदमा

दो महीने हो गये। शांति देवी की हालत में कुछ भी सुधार ना हुआ। पुरुषोत्तम बाबू को उनके मित्रों और रिश्तेदारों ने सुझाव दिया कि एक बार अपनी पत्नी को मनोचिकित्सक से दिखवा लें। पुरुषोत्तम बाबू को सुझाव सही लगा। अगले ही दिन अपने बड़े पुत्र सौरभ एवं पुत्रवधू संध्या के साथ अपनी पत्नी को […]

लघुकथा

श्रद्धा

शहर में बढ़ती चोरियां के खिलाफ, पुलिस धड़ाधड़ धर-पकड़ में लगी थी । इसी बीच संयोगवश एक चोरी हुुई मूर्ति पुलिस ने बरामद की । पर चूँकि अभी तक किसी ने भी मूर्ति की चोरी की रिपोर्ट नहीं लिखवाई थी, इंस्पेक्टर ने यूँही वो मूर्ति अपनी मेज के कोने पर रख दी थी । पर […]

कविता

तेरे ख्याल ने फिर

चंद अल्फाजों में कैसे हाले-दिल बयां कर दें ! तेरे ख्याल ने फिर… दिल को है उदास किया !! एतबार अब न रहा हाथों की इन लकीरों पर ! तूँ तकदीर था ही नहीं… क्यों लकीरों पर विश्वास किया !! जो पलकों से गिरे आँसूं नहीं, ख्वाब थे मेरे ! टूटे ख्वाबों ने फिर… दिल […]

इतिहास

ग़ज़ल -बेख़ुदी में आपको क्या क्या समझ बैठे थे हम

2122 2122 2122 212 गुल ,सितारा ,चाँद का टुकड़ा समझ बैठे थे हम बेख़ुदी में आपको क्या क्या समझ बैठे थे हम ।। यहभी इक धोका ही था जो धूप में तुझको सराब। तिश्नगी के वास्ते दरिया समझ बैठे थे हम।। अब मुहब्बत से वहीं आबाद है वो गुलसिताँ । जिस ज़मीं को वक्त पर […]

कविता

क्या है तेरे मेरे दरमियां?

क्या है तेरे मेरे दरमियां? कुछ तो है ऐसा तेरे मेरे दरमियां, जो परिभाषित नहीं ना ही हो पाएगा कभी। पहेली ही तो बनते जा रहे, अपने खुद के ही एहसास, जिसे खो नहीं सकते कभी, उसे खोने का भय, कितना भहायव है जो निचोड़कर रख देता है खुद के ही वजूद को… एक अजीब […]

कविता

परिपूर्णता

परिपूर्णता हां! हो तुम हृदय में , जैसे मृग के कुंडल में स्थित कस्तूरी, आभामंडल सा व्याप्त है तुम्हारे अस्तित्व का गंध, जो जगाए रखता है निरंतर एक प्यास मृगतृष्णा सी, हां मृगतृष्णा सी -…. एक अभिशप्त तृष्णा जो जागृत रखती है अपूर्णता के एहसास को मृत्युपर्यंत ….. हां ये अपूर्णता ही तो परिपूर्ण करती […]

सामाजिक

देंहव्यापार

देंहव्यापार वैश्यालय समाज का ऐसा हिस्सा जिससे समाज अछूता नही पर मान्यता नही मिलती….आखिर क्यों?????? सोचा है कभी अगर नहीं तो एक बार कुछ समय निकालकर अवश्य सोचें!!!! मुम्बई का रेड लाइट एरिया, कलकत्ता का सोनागाछी, दिल्ली का जीबी रोड… हर शहर की एक ऐसी बदनाम जगह होती है आप भी जानते हैं। ये तो […]

कविता गीत/नवगीत

आओ प्रीत बदल लें हम।

इक बात आयी है दिल में आज, आओ प्रीत बदल लें हम। मै धड़कूँ तेरे सीने में, जीवन संगीत बदल लें हम।। कुछ दिन मै भी चैन से सोलूँ, और तुम जग लो रातों को। सुबह शाम हर वक्त हर घड़ी, सोचे मेरी बातों को।। हरपल जिसको गाता रहता, वो हर गीत बदल लें हम। […]

इतिहास

प्रीत की रीत ( कविता )

प्रेमरंग   प्रीत की रीत काश सीख पाती  मीरा जैसी प्रीत जगाती   तन-मन की सुधि बिसराऊँ  मीरा के रंग में मैं रंग जाऊँ   इस जग की है रीत निराली प्रेम बिना जीवन पतझड़ है।   भक्ति की रीत कैसे निभाऊँ कैसे कोमल मन बहलाऊँ।   मीरा बनकर भजन मैं गाऊँ श्याम के रंग […]

इतिहास

सरहद का साँवरा

सरहद का  साँवरा ****************   प्रिया से फोन पर बातें करते हुए शौर्य बीच-बीच में कुछ पल के लिए बिल्कुल खामोश हो जाते थे । प्रिया से नहीं रहा गया वह पूछ बैठी; “क्या बात है शौर्य, लगता है आप परेशान हैं ? “अरे ! नहीं नहीं , मैं परेशान भी हूँ तो तुम्हारी वज़ह […]