कविता

आखिर क्यों??

बहन, मां, बेटी हो तुम, पत्नी और प्रेयसी हो तुम। तुम ही गीता ,रामायण हो, तुम ही सृष्टि की तारण हो। कितने किरदारों में ढलती हो? फिर क्यों अबला बन फिरती हो तुम सुमन किसी फुलवारी की, तुम जननी किसी किलकारी की। आंचल में ममता की धार है, चुनौतियां भी सभी स्वीकार हैं। फिर क्यों […]

कविता

कविता

सत्य और झूठ की लड़ाई होनी चाहिए, नागरिकता कानून की सिकाई होनी चाहिए। हो तुम सच्चे नागरिक तो डर किस बात का, करो कुछ ऐसा देश भलाई होनी चाहिए। आँख बंद करके करो कुछ काम मत, सामने की खाई पर नजर होनी चाहिए। विचारों की धूल पर झाड़ पोंछ करके, सोचने समझने की गहराई होनी […]

इतिहास

आजादी की लड़ाई के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस

भारत भूमि पर कई महान वीर योद्धाओं व देशभक्तों ने जन्म लिया हैं। और मातृभूमि की रक्षा के लिए सदैव आगे रहे और अपना सबकुछ तन-मन-धन त्यागकर देश की आज़ादी के लिए न्यौछावर कर दिया था। देश की आज़ादी की लड़ाई में देश के अनेक लोगों और नेताओं ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उन […]

कुण्डली/छंद

पंछी करे न काम…….

  अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम। जनमानस के बीच में, नेता है बदनाम।। नेता है बदनाम, रात-दिन गाल बजाते। करते काम न एक, बात की वो हैं खाते।। अनहद भरते गूँज, झूठ बहलाते अकसर मत देना मतदान, छुपे है इनमें अजगर।। ,,,,,,,,गुंजन अग्रवाल “अनहद”

समाचार

अंतरराष्ट्रीय हिंदी-संगोष्ठी में सम्मानित हुए डॉ दिग्विजय शर्मा

हिंदी भारत की भौगोलिक परिधि से बाहर निकल कर पूरे विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान बना रही है, लेकिन हिंदी का साहित्य और संपर्क भाषा बनना ही पर्याप्त नहीं है। संस्कृति विश्वविद्यालय, मथुरा (उत्तर प्रदेश) के कुलपति डॉ राणा सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा। स्थानीय सेक्टर 1, पार्ट 2 स्थित अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र मनुमुक्त […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

कोयल का गीत एकांत में पुकारता है शायद अपनों की मौजुदगी तलाशता है . डाली अम्बुज पर काली बैठी झांकती है दूर तक दृष्टि फैला हर क्षण आंकती है. खालीपन ख़ामोशी में पेडो का दायरा सा यही सब यादे अपनों की खोज ताकती है. कही कोई गुजरी घटना दर्द की वजा है लगता अकेलापन ही […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग- आम लोगों का गिरना

कुछ दिन पहले रात को बाइक से घर लौट रहा था, सड़क के गड्ढे में गिरकर सिर फूट गया। अब घर पर लोगों का तांता लग गया, बहुत खुश हुआ मेरा साहित्य उछल-उछल कर तांडव करने लगा। शाम को कुछ समाचार पत्र वाले आ गए वे मुझसे हालचाल पूछा उसके बाद कागज निकालकर समाचार बनाने की प्रक्रिया शुरू […]

लघुकथा

लघुकथा – भरोसा

पिताजी की आदतों से रोहन बहुत परेशान था । जिसने भी रोहन के पढ़ाई के बारे में पूछा पिताजी का एक ही जवाब होता ‘धीरज धरो महाशय बेटा अफसर ही बनेगा ।’ प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में रोहन तीसरी बार असफल हुआ था । अब तो पिताजी के बातों से भी नफरत हो गई थी।  […]

कविता

स्वर्ग सा हिंदुस्तान

बहुत हो चुके बेघर अपने ही घर में हम, हम अब न सहेंगे जिंदगी में दर्दे गम। फूलों की घाटी में शूलों का राज होगा खत्म, हम हिंदुस्तानी हिंदुस्तान के नहीं हैं किसी से कम। बनाकर हर जख्म को जख्म की दवा, फूलों की घाटी में सनसनाती है हवा। ईमान को ईमान की कद्र होनी […]

कविता

कविता- पतझड़ और जिंदगी

पतझड़ में बहार ही बहार है चाय की मीठी चुस्कियां गर्म पकोड़ो का बयार है, ठंड की सर्द झोकों में उम्मीद की किरण जगती आसमा के झरोखों में, जिंदगी भी पतझड़ से हो गई टूटकर सपने बिखरे इरादे ना जाने कहां खो गई, उम्मीद पतझड़ के बाद बसंत का बयार है, बस उस पल का […]