नवीनतम लेख/रचना


  • पल्लू

    पल्लू

    आज एक खबर पढ़ी- ”मुंबई के कांजुर मार्ग रेलवे स्टेशन पर जैसे ही यह महिला ट्रेन से नीचे उतरी, उसकी साड़ी का पल्लू ट्रेन के दरवाजे में फंस गया और वह प्लेटफॉर्म और ट्रेन के गैप...

  • कविता – जन्नत से प्यारा

    कविता – जन्नत से प्यारा

    हिमगिरि का ताज सजाये जो। सबकी पहचान बताये जो।। स्वर्ण सी चमक दिखाये जो। कितना प्यारा लगता है जो।। ऋषि मुनियों की खान है जो। सबके दिलों की जान है जो।। हम सबका स्वाभिमान है जो।...

  • बारिश

    बारिश

    बारिश का मौसम वैसे तो लगता है सबको सुखदाई पर गरीब के दुख को तो वर्षा रानी भी समझ न पाई उसकी छत का टपकना रातों का जागना टपकते पानी के नीचे नन्हें हाथों बर्तन रखना...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    दिन को दिन, रात को रात लिखता हूँ। क्या बुरा है गर सच्ची बात लिखता हूँ। बहुत है गुलों की तारीफ करने वाले, मैं इन काँटों के जजबात लिखता हूँ। मैं समय हूँ, मुझ को है...



  • “मुक्त काव्य” 

    “मुक्त काव्य” 

    जी करता है जाकर जी लू बोल सखी क्या यह विष पी लू होठ गुलाबी अपना सी लू ताल तलैया झील विहार सुख संसार घर परिवार साजन से रूठा संवाद आतंक अत्याचार व्यविचार हंस ढो रहा...

  • इंतज़ार

    इंतज़ार

    कभी यूँ भी हो तुम करो मेरा इंतज़ार जब भी तेज़ हवा का झोंका खोले खिड़की के पट तुम बरबस देखो उस ओर शायद मैं वहाँ तो नहीं… और मैं …. मैं बहती जाऊं हवाओं संग...

  • मीठी मुस्कान

    मीठी मुस्कान

    “मीठी मुस्कान😊 सच कहती है एक मीठी  मुस्कान न मैं हिन्दु , न सीख न इसाई , न मुसलमान । न  मैं  गोरी  हूं न रंग मेरा काला सबके होठों पर रहती हूं बनके उजाला। मैं...

कविता