नवीनतम लेख/रचना

  • गुरू

    गुरू

    गुरु , प्रतीक है , तप का , नैतिकता का , ज्ञान का गुरु , विश्वास है , विजय का , सफलता , समाधान का गुरु , मां सी ममता है , पिता का अनुशासन है...


  • क्या करूँ

    क्या करूँ

    क्या करूँ दूर नज़रो से नज़र है क्या करूँ | आसमाँ से गुम क़मर है क्या करूँ | दीद की हसरत में हूँ ज़िंदा यहाँ – ज़िन्दगानी पुरखतर है क्या करूँ | दहशतों में घुट रही...

  • मैं और तुम

    मैं और तुम

    मैं और तुम ————— अप्रैल का महीना और गर्मी का ये आलम ,शीला का गर्मी के मारे बुरा हाल था | “सुनो जी ! मुझसे अब कोई काम नहीं होगा |रसोई की तरफ जाने का मन...

  • विधाता छंद

    विधाता छंद

    विधाता छंद दरश की लालसा मोहन है जब तक साँस बाक़ी है | पियूँ नित नाम रस प्याला मिलन की प्यास बाक़ी है | तुम्हारी मोहनी सूरत बसी है आन नैनों में- मुरलिया आ सुनाओगे यही...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ज़िन्दगी इतनी उदास क्यूं है भटकती हुई-सी आस क्यूं है । सब कुछ है दिखावटी,नकली, खोखला इस कदर हास क्यूं है । दूर-दूर तक है फैली खामोशी, ग़मगीन हर दिवस,मास क्यूं है । शंका के बादल...


  • वर्तमान में जी लें हम

    वर्तमान में जी लें हम

    बीता वक्त न लौट कर आता, इस सच्चाई को स्वीकार करें हम। बीती बातों पर मिट्टी डालें, वर्तमान में जी लें हम। आज मिला है जो अपना लें, व्यर्थ में क्यों संताप करें? सुख दुख तो...

  • प्रेम

    प्रेम

    प्रेम एक अनुभूति है, हृदय से हृदय तक स्पंदित होती। सच्चे प्रेम की अभिव्यक्ति को आवश्यकता नही, शब्दों की बैसाखी की। यह तो छलक ही पड़ता है, पलकों की ओट से। प्रियतम की एक झलक पाने...

कविता