कहानी

कहानी -एक दूसरे पर ठीकरा फोड़

अरे सुनीता कब से तैयार हो रही हो ?अब तो जल्दी चलो। खाने का समय भी हो गया। ज्यादा भीड़-भाड़ नही होगी, अभी आराम से खा लेंगे । हाँ हाँ आती हूँ। तुम्हे तो बस खाने की पड़ी है व्यवहार भी तो निभाना पड़ेगा ।सीधे खाकर तो नहीं आ सकते हैं ।सुनीता के तेवर तीखे […]

कविता

समय बदलता है

समय सबका आता है, समय सब बदल देता है । उम्मीद का दामन क्यो छोड़े हर चीज़ बदलती है ।। नन्हा पौधा भी बदलता है, बनता वो वृक्ष है देता फूल फल है , बदलता है जब वो , नही देता फल फूल इंसान भी बदलता है बच्चे से बड़ा होता है वंश को फूल […]

कविता

अब बदल गई हूं मैं

बिखरी,बिखरी सी थी अब स्वयं में सिमटने लगी हूं मैं सलीके की जिंदगी से अब थोड़ी बेपरवाह होने लगी हूं मैं ।। स्वयं से स्वयं के लिये बदलने लगी हूं मैं इसलिये लोगों अखरने लगी हूं मैं ।। अम्बर को बाहों में भरने का, खुला न्योता देने लगी हूं मैं पंख कतरने वालों को अब […]

कविता

छोटी छोटी बनी मढैया

छोटी छोटी बनी मढैया, घास फूंस की पडी हो छैया, मिट्टी की दीवारें उसकी, धरती पर गोबर की लिपैया। फल फूलों के पेड़ घने हों, तितली भौंरे नाच रहे हों, सुबह शाम को चिड़िया तोते, गीत सुनाएं ता ता थैया। पवन संग कुछ बातें भी हों, वर्षा में भीगें नाचें, राहगीर कोई तपता आये, पहले […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सच्चाई का ज़िक्र छिड़ा जब महफ़िल में। लोग बहुत से दिए दिखाई मुश्किल में। सिर्फ़ डुबोने की ही आदत है जिसकी, ढूँढ रही वो मौज सहारा साहिल में। कोशिश तो की ही होगी मकतूलों ने, शायद थोड़ा रहम बचा हो क़ातिल में। बात तिरंगे की आई जब होंठों पर, एक अजब सा जज़्बा पाया हर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

पीड़ित मानवता पर कितने वार करोगे कोरोना? इस रण में तुम कब अपने हथियार धरोगे कोरोना? लाखों लोगों के प्राणों को चट करके भी भूखे हो, जाने और अभी कितनों के प्राण हरोगे कोरोना? दुष्ट आत्माओं के जैसे देहों में घुस जाते हो, किस ओझा के तंत्र-मंत्र को देख डरोगे कोरोना? जो भी आता है […]

कविता

नारी की शिक्षा

हर घर में हो अब नारी की शिक्षा  पाकर वह अपने परिवार का करें दीक्षा  ना दो अब कोई नारी को पीड़ा  दर दर से मांग रही वह भिक्षा!!  शिक्षा ही नारी की है अब हथियार  जिसके बल पर पा सके वह संकटों से पार  गर नारी के पास है शिक्षा का आभूषण  शब्दों से […]

कविता

विष्णु का सातवां अवतार 

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नौवीं तिथि जब आती है नवरात्रों का होता है समापन इस दिन राम नवमीं मनाई जाती है श्रीराम ने इस दिन धरती पर करने को सृस्टि का उद्धार मानव रूप में जन्म लिया था विष्णु का सातवां था अवतार दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र थे राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न थे […]

पर्यावरण

धरती माँ को बचाने के लिए ईमानदारी से प्रयास करने होंगे

(पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल के अवसर पर) इस पूरे ब्रह्मांड में हमारी पृथ्वी ही हरी-नीली अभिनव रंगों से आभाक्त अभी तक एकमात्र ग्रह है, जिस पर सांसों के स्पंदन से युक्त चलते फिरते जीव , रंग-बिरंगी तितलियों, चिड़ियों, फूलों, फलों से लदे हरे-भरे, पेड़-पौधे, लताएं, नीला इन्द्रधनुषी आकाश, रिमझिम बरसात, पेड़-पौधे, जंगलों और बर्फ से […]

सामाजिक

स्त्री कोई देवी नहीं जो देवी बनाकर ठगी जाये

बेटी एक प्रेम और लक्ष्मी के सिंघासन पर बैठाई गयी एक देवी है ,माता पिता भी बेटी के हाथ जल्दी पीले करने की सोचते रहते हैं ,क्योंकि उन्हें डर रहता है की समाज की तीखी जवा़न या भूखी नजरें  उनकी बेटी पर हमला न कर दे । लेकिन बेटी के भी अपने दायरे होने चाहिए […]