नवीनतम लेख/रचना

  • न्याय

    न्याय

    *न्याय* कुलबोरन! कौन सी मनहुस घड़ी थी जो तुझे बियाह के लाए इस घर में !मेरे बंश के जान के पीछे पड़ी है । किस जनम का दुश्मनी निकालने के लिए इस जनम में आई ।...


  • पाकर तुम्हे….

    पाकर तुम्हे….

    वक़्त ने हमें बहुत गम दिए फिर भी हम मुस्कुराते रहे न चाहा कभी जिंदगी से ज्यादा कुछ जो मिला किस्मत से बस उसी में खुश रहना सिख लिए पर कहते है ना गम के साथ...



  • जगालो अपने में विश्वास

    जगालो अपने में विश्वास

    जगालो अपने में विश्वास बनालो जीवन को मधुमास-   1.रखो ईमान सदा दिल में जगाओ प्रेम सदा दिल में करो औरों पर भी विश्वास-   2.न मन में डाह रखो प्यारे प्रशंसा खुल के करो प्यारे...

  • हम भूले हैं..!

    हम भूले हैं..!

    हम भूले हैंं..! प्रश्न हैं कितने हमारे जीवन में अनादि से.. प्रश्न प्रश्न ही रह रहे हैं निज खोज के अभाव में धार्मिक विचार हैं अनेक पोथी पुराणों से जुड़कर अपने-अपने बढ़प्पन दिखाते इन प्रश्नों का...




कविता