नवीनतम लेख/रचना

  • जिंदगी

    जिंदगी

    बहुत अकेली है जिंदगी , जरा गले लगाओ न । टूट रही है शब्दों की माला , धागा प्रेम का लगाओ न । मायूस है देखो वो अंधेरा भी , दीप प्रीत के जलाओ न ।...

  • गरीबी

    गरीबी

    मंजीरे बज रहे थे ,पर सांसें उदास थी । ढोलक की थाप पर बेसुरों की आग थी । रोटियों की आवाज ने भूख को आवाज दी । पेट की भूख ने घुंघरुओं को मात दी ।...

  • जुनून

    जुनून

    आदमी अपनी हद से निकलकर पार करने की कोशिश करता है अपनी ही परिधि या फिर कोई अंतस की चिंगारी ज़ज्बे की हवा पाकर धधकने लगती है आग बनकर कोई पर कटा परिंदा ठान लेता है...


  • कठपुतली

    कठपुतली

    हाँ ! मुझे कठपुतली ही कह लो तुम ! यही सही रहेगा ना कोई वजूद मेरा न कोई पहचान है बस, तुम्हारे इशारों पे नाचने डोलने वाली एक खिलौना हूँ मैं जिसके अनगिनत धागे फँस गए...

  • एक पल…

    एक पल…

    हाँ ! उस एक पल का ही दोष था जब तुम्हारी नजरों ने मुझे प्यार से देखा था उसी एक पल ने ! मेरे जीवन के न जाने कितने खूबसूरत पलों को चुरा लिया सच ही...

  • “हाइकू मुक्तक”

    “हाइकू मुक्तक”

    शीर्षक- दंगा/झगड़ा/फसाद आदि   रोते झगड़े, विलखते झगड़े, किसके हाथ यह फसाद, बिगड़ते रिश्ते, किसके साथ दंगे दर्पण, समर समर्पण, अंधे तूफान काया सुंदर, नटखट मंजर, कौन अनाथ॥-1   झगड़े बोलें, अपने मुख खोलें, कहते सार...

  • पिरामिड

    पिरामिड

    ये दिया जलती है तो लोग प्रकाशमय किरणों के बीच उमंग लेते सभी ॥1॥ वो दिन देखता रह गया जब वो मेरी नजर के पास से गुजर रही थी॥२॥ थी नम उसकी आँखें लिए अश्रु की...

  • पिरामिड

    पिरामिड

    आ रही तुम्हारी यादें मुझे बहुत ज्यादा तूँ कब आओगी इन्तजार है मुझे ॥१॥ ये यादें मुझको कबतक आती रहेगी आँखें बन्द कर सपनों में तुम्हारी ॥२॥ ©रमेश कुमार सिंह ‘रुद्र’

  • हेप्पी मदर्स डे कहना

    हेप्पी मदर्स डे कहना

    सूनसान कंटीली झाड़ी में गूँज उठी थी जो चित्कार । तेरे हृदय तक पहुँच सकी ना मेरी दर्द भरी वो पुकार । हाय! विवशता थी ये मेरी, वज्र हृदय का वार था सहना । मिले गर...

राजनीति

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