नवीनतम लेख/रचना


  • गज़ल

    गज़ल

    बहुत खुश है दुश्मन-ए-जान मेरा लेकर फिर से इम्तिहान मेरा ==================== बच गए बस यादों के खंडहर ढह गया इश्क का मकान मेरा ==================== बहार तू साथ ले गया अपने हुआ वीरान गुलिस्तान मेरा ==================== तू...


  • कीमियागर कौन

    कीमियागर कौन

    अलकेमिस्ट यानी कीमियागर, कीमियागर उसे कहते हैं जो पत्थर को सोने में तब्दील करने की कला जानता हो।बार बार मन में ख्याल आता है कि सोने में ऐसा क्या है कि वो मूल्यवान है? न तो...


  • वोह दिन !

    वोह दिन !

    आज पहली दफा किसी ने अकबर से उस की पिछली ज़िंदगी के बारे में पूछा था। अकबर अब 80 साल का बज़ुर्ग हो चुक्का था। बाबा जी, मैं पाकिस्तान के उस इतहास को जानना चाहता हूँ...

  • स्त्री ही दोषी क्यो पुस्तक का लोकार्पण

    स्त्री ही दोषी क्यो पुस्तक का लोकार्पण

    उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार के शिक्षाशास्त्र विभाग में अध्ययनरत छात्राध्यापिका “दीपा दिवाकर” द्वारा रचित वर्तमान समाज में स्त्रियों के परिस्थिति को दर्शाती हुई “स्त्री ही दोषी क्यों” नामक पुस्तक का लोकार्पण आज विश्वविद्यालय में सम्पन्न हुआ।।...



  • आत्मविश्वास

    आत्मविश्वास

    आज सात्त्विका बहुत ही खुश थी. उसके चित्र को प्रथम पुरस्कार से जो नवाजा गया था. उसे भानजे ऋत्विक के साथ हुई गुफ़्तगू याद आ रही थी. ”मौसी जी, आप तो ऑस्ट्रेलिया से अभी आने वाली...

कविता