शिशुगीत

खरगोश

मैं सफेद हूं जैसे दूध, नरम-गुदगुदा जैसे दूब, हरी घास मैं खाता हूं, दाना भी चुग जाता हूं. आंखें लाल हैं मेरी देखो, खूब तेज मैं भगता हूं, जल्दी मेरा नाम बताओ, मैं तुमको क्या लगताहूं? (खरगोश)

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जब मिलो हाथ हम से मिलाया करो सब भुला के गले से लगाया करो साथ रह गम हमें भी सताया बहुत साथ रह तुम मिरे गम भुलाया करो सूख जाये नही बाग के पेड़ सब बाग में आ मिरे सींच जाया करो रात भर जाग जिसने सुलाया हमें जागकर पैर माँ के दबाया करो ना […]

बालोपयोगी लेख

समय से घर पहुँच जाना चाहिए

हमारे घर पापा मम्मी कालेज भेजते हैं तो हमें भी डर लगता है। अपने पापा मम्मी को छोड़कर जाना हमको अच्छा नहीं लगता। भीड़ में कोई गुंडा हमको मार न डाले और हमें नुकसान न पहुँचा दे, हमको इसका डर लगता है। हमें अपने पापा मम्मी को छोड़कर नहीं जाना चाहिए। जाना है तो अपने […]

शिशुगीत

मेरी मम्मी

मेरी मम्मी प्यारी मम्मी सबसे प्यारी मेरी मम्मी पढ़ने भेजती मेरी मम्मी एक दिन अगर पढ़ाई नहीं करते मम्मी डाँट लगाती है फिर पढ़ने बैठ जाओ तो मम्मी खुश हो जाती है सबसे प्यारी मेरी मम्मी

बाल कविता

जल संरक्षण

जल संरक्षण अभियान चलाओ देश में पानी की बचत कराओ नदियाँ और तालाब में कुएँ में और नहर में टंकी में और गड्ढे में इनमें पानी की बचत कराओ पानी अपने काम में लो ना कि यूँ ही फेंकते रहो नदियाँ नहरें कुएँ तालाब हैंडपंप टूयूबैल इन सबसे हमें पानी मिलता अगर तुम यूँ ही […]

राजनीति

कोरोना के बाद की दुनिया

कोरोना, यह शब्द कुछ माह से मन को झकझोर जाता है, इसने मानव सभ्यता की वर्तमान व भविष्य की योजनाओं को उथल पुथल कर के रख दिया। इस संक्रमण के बाद के जन जीवन पर इसका बहुत प्रभाव रहने वाला है, आने वाले कई वर्षों तक हमें संक्रमण से सावधान रहना होगा, प्रदूषण को रोकना […]

कविता

प्रकृति का नारी रूप

तुम श्रद्धा, तुम स्निग्धा      रूपसि तुम अवतार हो तुम वात्सल्यमयी जननी      तुम हृदय झंकार हो। नील हरित परिधान में       तुममे यह जीवन बसा, दे दिया सब कुछ सृजक ने         शेष क्या सुन्दर बचा, दर्श देती यूँ सहज          तुम स्वयं उपकार […]

कविता

पर्यावरण

आओ पुष्प की वाटिका लगाएं     पर्यावरण को स्वस्थ बनाए जिस पर आश्रित पूरा भव है      जीवन भी जहां सम्भव है आओ पर्यावरण प्रेमी बनें हम     जीवन को रक्षित करें हम हरियाली मनमोहक लगती      प्रकृति मंजु जब लगती आओ सब मिल करें श्रृंगार     मनुष्यों पर ये […]

समाचार

‘नई सुबह फिर आएगी’, गीत का वीडियो रिलीज

देश के श्रेष्ठ चौदह राष्ट्रीय कवियों और कवयित्रियों ने दिखाई उम्मीद की किरण मुंबई. जब-जब देश पर विषम परिस्थितियां छाई हैं,तब-तब देश का साहित्यकार और कवि घने तिमिर में दीप जलाने का काम किया है। आज कोरोना काल में पूरा विश्व संकट की घड़ी  से गुजर रहा है। लॉक डाउन में ऊहापोह की स्थिति है। […]

शिशुगीत

बंदर

जब मैं उछल-कूद करता हूं, मम्मी कहती ”तू है बंदर”, पर मेरे तो पूंछ नहीं है, मैं कैसे हो सकता बंदर! मुहं भी मेरा लाल नहीं है, और न ही बिलकुल काला, ना लंगूर मैं ना ही बंदर, मुझको तो होना है लाला. 1978 में लिखी पुस्तक शिशु गीत-संग्रह से