धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ऋषि दयानन्द कृत सत्यार्थप्रकाश ग्रन्थ मनुष्य को सन्मार्ग दिखाता है

ओ३म् परमात्मा ने जीवात्मा को उसके पूर्वजन्म के कर्मानुसार मनुष्य जीवन एवं प्राणी योनियां प्रदान की हैं। हमारा सौभाग्य हैं कि हम मनुष्य बनाये गये हैं। मनुष्य के रूप में हम एक जीवात्मा हैं जिसे परमात्मा ने मनुष्य व अन्य अनेक प्रकार के शरीर प्रदान किये हैं। विचार करने पर ज्ञान होता है कि मनुष्य […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन, आदर्शों एवं पावन स्मृति को सादर  नमन

ओ३म् मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम वैदिक धर्म एवं संस्कृति के आदर्श हैं। उनका जीवन एवं कार्य वैदिक धर्म की मर्यादाओं के अनुरूप हैं एवं संसार के सभी लोगों के लिए अनुकरणीय हैं। भगवान राम ने अपने आदर्श जीवन एवं व्यवहार से संसार के लोगों को धर्म एवं मर्यादाओं का पालन करने का पावन सन्देश वा […]

हास्य व्यंग्य

बेसन

कोई तीर से घायल होता है कोई तलवार से, हम तो मारे गए चिकने-मुलायम बेसन की मार से. ”वो कैसे?” ”मत पूछिए जनाब!” ”फिर भी बात निकली है तो दूर तलक जाने ही दो!” ”तो सुनो. बेसन की धार को हमने ही आमंत्रित किया था. हुआ यह कि हमेशा की तरह हमने- ”बड़े चाव से […]

मुक्तक/दोहा

दोहे – सखे !

इतनी होती है सखे , तेज कलम में धार । पहुँचा सकती कल्पना , सात समंदर पार ।। रिश्तों में मत खींचना , तुम लम्बी दीवार । वरना दुख देगी सखे , छोटी बड़ी दरार ।। सुननी है तो सुन सखे , आज काम की बात । अपनापन रखना सदा , नहीं मिलेगी मात ।। […]

गीत/नवगीत

चलो अयोध्या धाम

चलो अयोध्या धाम, विराजेंगे  अपने    श्रीराम। कभी  राम झुठलाये जाते। नकली चरित बताये जाते। आतंकी बाबर के सम्मुख- मनगढ़ंत  कहलाये   जाते।। कैसी भी हो रात, किन्तु होती है सुबह ललाम। वंशज   बहुधा जीते – हारे। अनुयायी  के   वारे – न्यारे। रक्तपात  के छद्म खेल में – रामभक्त तन मन धन वारे।। हुआ बहुत बलिदान, […]

कविता

श्री राम

श्री राम आदि हैं अनन्त हैं श्री राम प्रभात हैं साम हैं श्री राम ब्रह्म हैं तत्व हैं श्री राम चैतन्य हैं चिरन्तन हैं श्री राम अभिव्यक्ति हैं अभिवादन हैं श्री राम सम्बोधन हैं समष्टि हैं श्री राम ज्ञान हैं विज्ञान हैं श्री राम मर्यादा हैं मान हैं श्री राम प्रकृति हैं चेतन हैं श्री […]

लघुकथा

प्रेम

“मैं तुमसे प्रेम करता हूँ।” पूरब के मुँह से अचानक यह सुन वृंदा चौंक गयी। “प्रेम…….!” “हाँ प्रेम,इस अथाह सागर की तरह गहन।” पूरब ने बाँहों को फैलाकर कहा। “सागर की तरह! मतलब खारा।” हँसते हुए वृंदा ने कहा। “उसके खारेपन को न देखो! उसकी गहराई को देखो।” वह बोला। “प्रेम समझते हो तुम पूरब?” […]

गीत/नवगीत

फिर से आएंगे राम अवध में

बरसों की अधूरी उर अभिलाषा अब पूरी है होने वाली फिर से आएंगे राम अवध में चहुं दिश होगी अब खुशहाली, नवनिर्मित चौखट पूजन होगा और द्वार बंधेंगे फिर तोरण आम्र और केले के पत्र से फिर महकेंगे वन उपवन चहुं दिश मंगल गान गवेंगे हर रोज मनेगी अब दीवाली फिर से आएंगे राम अवध […]

क्षणिका

9 जीवनकामी क्षणिकाएँ

1. सुविधाकामी ‘भाग्य’ कुछ नहीं होती ! हारे को हरिनाम….. पर वफादार कौन हैं, वक्त और सुविधा के अनुसार बदलते रहते हैं ? वक्त-बेवक्त परखकर देख सकते हैं ! 2. सच्ची में अगर शादी ही ना हो, तो 3 तलाक और दहेज प्रताड़ना वाली बात आएगी ही कहाँ से ? लाख टके की बात तो […]