नवीनतम लेख/रचना

  • गुरमैल भाई की कलम से

    गुरमैल भाई की कलम से

    विकलांग (दिव्यांग) लोग सिर उठा कर जियें मैं एक डिसेबल हूँ और घर में एक रौलेट, जिस को तीन पहियों वाला वाकिंग फ्रेम भी कह सकते हैं, के साथ चलता फिरता रहता हूँ. एक गंभीर बीमारी...

  • नशा से तौबा कर लो

    नशा से तौबा कर लो

    नशे के चुंगल में, गिरफ्तार ना होना वक्त से पहले तुम, वर्बाद मत होना। गम अगर आए, मुस्कुराना सीख लेना जोश में आकर तुम नशे में गिरफ्तार मत होना। नशा खुद ही गम है, जबतक पता...

  • खुशी हो या गम नशा का सेवन क्यों

    खुशी हो या गम नशा का सेवन क्यों

    पर्व-त्योहारों या गम को दूर करने के लिए अथवा विभिन्न सामाजिक पार्टीयों में विशेषकर फब पार्टीयों में नशीली पदार्थो जैसे शराब सिगरेट आदि का प्रचलन बढ़ रहा है और इसे बुराई के तौर पर देखने की...

  • जीवन

    जीवन

    जीवन का तो अर्थ यही है हंसते हंसते जी ले हम मुझे नहीं चाहिए सुख सुविधा समृद्धि या अचल सम्पत्ति। मैं जीवन में ये कर पाओ रहे सभी के प्रति दया और करुणा जो करा सके...


  • हाईकू

    हाईकू

    प्रीत मिलन मधुरमय बेला करे पुकार! नई उमंग मन मे है तरंग हुई मगन ! सुनी डगर निहारते सनम मिले कदम! लोग बेगाने बने इस तरह मिले सबक! अजनबी ये मन करता दुआ शुक्रिया तेरा? बिजया...



  • उठो आर्य

    उठो आर्य

    उठो आर्य के श्रेष्ठ मनुज, अपना अंतर्मन खोलो भारत के भवितव्य आज, अपने मुख से तो बोलो। तुम राम कृष्ण के वंशज , राणा प्रताप की शान हो, मां दुर्गा के शक्ति उपासक, सीता सावित्री के...

  • सुरक्षा-कवच

    सुरक्षा-कवच

    मुस्कान की मुस्कान वापिस लौट आई थी. पढ़ाई में भी उसका मन लगने लगा था. कैसे हुआ यह सब! मुस्कान कभी-कभी सोचने लगती थी. ”मुस्कान बेटी, आजकल तेरी मुस्कान कहां गायब हो गई है?” मां ने...

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