गीत/नवगीत

बासंती ऋतु

कुहरा छँटा, खेत सरसों में बासंती ऋतु आयी नव पल्लव फिर सजे पेड़ पर यौवन की सुधि छायी हरे भरे गेहूँ के खेतों में झूमे पुरवाई बारिश ने छोटे-छोटे छीटों से छौंक लगाई रंगों ने आकर चुपके होली की बात बताई कुहरा छँटा, खेत सरसों में बासंती ऋतु आयी मेंहदी लगी दुल्हनियाँ छीले हरी मटर […]

कविता

कविता

आना जाना जीवन की रीत है जीवन से मोह, मोहब्बत की प्रीत है एक दिन मृत्यु से सबको मिल जाना है जो भी आए हैं उसे एक दिन जाना है । रिश्तों की डोरियां चाहे जितनी भी हो मजबूत, वक्त आने पे ये जाते ही हैं टूट । जबतक जीवन की ज्योति है तबतक सपनों […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

उनके झूठ पर जो मौन साध लिया हमने, लोगों को लगा कि सच मान लिया हमने। हरिश्चंद्र बने फिरते जूठों के मसीहा जो, वाकिफ नहीं है कि सब जान लिया हमने। रंग बदलते गिरगिट थोडी़ सी तो शर्म करे, असली रंग जिनका पहचान लिया हमने। बेतुकी बातें कहके भूल जाते लोग शायद, हर बात को […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – चुगली रस

वर्तमान युग की भागम भाग और संघर्षों से भरी ज़िन्दगी में जहां लोगों के पास अपनों की तो छोड़िए,अपने लिए ही समय नहीं है।फुरसत के चंद लम्हें क्या होते हैं,इसको परिभाषित करना आज शायद ही किसी को आता हो।आज हर कोई दूसरे से आगे बढ़ना चाहता है, कम समय में अधिक पाना चाहता है और […]

राजनीति

पेपर लीक सिस्टम वीक़?

वैश्विक स्तरपर भारत की बौद्धिक क्षमता प्रतिष्ठित है जिसे ऊपरवाले का वरदान माना जाता है, जो कि सदियों से पीढ़ी दर पीढ़ी प्रसारित होते जा रहा है। याने हम यूं कह सकते हैं कि भारत माता की मिट्टी में ही ऐसी अदृश्य शक्तियां समाई हुई है कि, यहां जन्म लेने वाले की पीढ़ियों तक उसके […]

लघुकथा

स्थान

 शाम के धुंधलके में दरवाजे पर कोई साया नजर आया बाबुलालजी अपना चश्मा पहनते हुए पूछा “कौन है दरवाजे पर?” मोहित ने अन्दर आते हुए कहा “सर मैं हूं मोहित !” “कौन मोहित?” “सर मैं आपका स्टूडेंट् हूं!” “अच्छा -अच्छा ” बाबूलालजी ने कुछ सोचते हुए कहा। “मोहित थोड़ा बैठक की लाईट जला देना !” […]

गीत/नवगीत

“आया बसन्त-आया बसन्त”

सबके मन को भाया बसन्त।आया बसन्त-आया बसन्त।। उतरी हरियाली उपवन में,आ गईं बहारें मधुवन में,गुलशन में कलियाँ चहक उठीं,पुष्पित बगिया भी महक उठी,अनुरक्त हुआ मन का आँगन।आया बसन्त, आया बसन्त।१।—कोयल ने गाया मधुर गान,चिड़ियों ने छाया नववितान,यौवन ने ली है अँगड़ाई,सूखी शाखा भी गदराई,बौराये आम, नीम-जामुन।आया बसन्त, आया बसन्त।२।—हिम हटा रहीं पर्वतमाला,तम घटा रही रवि […]

कविता

भावनानी के भाव

गांधीजी के सिद्धांत व विचार सत्य अहिंसा शांति धर्मनिरपेक्षता धार्मिक बहुलवाद और अधिकारों के लिए लड़ना सत्याग्रह का सहारा गांधीजी के सिद्धांत थे राजनीतिक नैतिकतावादी उपनिवेशवाद विरोधी दूरदर्शी नेतृत्व अहिंसात्मक दृष्टिकोण  बाधाओं के खिलाफ एकजुटता  गांधीजी के विचार थे गांधी जी का सम्मान नोबेल शांति पुरस्कार के लिए पांच बार नामांकन किया गया ग्रेट ब्रिटेन […]

कुण्डली/छंद

समझो द्वारे पर है बसन्त

मद्धिम कुहरे की छटा चीर पूरब से आते रश्मिरथी उनके स्वागत में भर उड़ान आकाश भेदते कलरव से खग वंश बेलि के उच्चारण जब अर्थ बदलने लगें और बहुरंग तितलियाँ चटक मटक आ फूल फूल पर मँडराएँ जब मौन तोड़ कोयलें गीत अमराई में गा उठें और मधुकर के गुंजित राग उठें पड़कुलिया गमकाए ढोलक […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

आज़ बिगड़े हैं जो मेरे हालात  तो कल फिर सुधर भी जाएंगेl  जो लोग मेरी नजरों से गिर  गए है वो मेरी निगाह में फिर चढ़ ना पाएंगेl जिस दिन बरसेगी जब ईमान की बारिश दाग दामन पे उनके बे हिसाब उभर आयेगेl  हम अकेले ही सही पर इंसान लगते हैं लोग साथ आ गए […]