नवीनतम लेख/रचना



  • देशभक्त नहीं हो सकते!

    देशभक्त नहीं हो सकते!

    रात दिन राष्ट्रीय के विरोध में खड़े लोग देशभक्त नहीं हो सकते! वो राष्ट्रीय में पल रहे शत्रु हैं, जो बाहरी शत्रुओं से भी ज्यादा घातक हैं! इनका शर्वनाश करना अति आवश्यक है नहीं तो ये...


  • वक़्त

    वक़्त

    वक़्त   जैसा   भी  हो  वैसा  ही  काट  लेता  हूँ ग़ैर  का  दर्द   भी  अक्सर  में  बाँट   लेता   हूँ ज़िन्दगी तुझसे ये फुर्सत कभी मिले न  मिले सुकूँ  के  लम्हों  को  ग़म...

  • “गज़ल”

    “गज़ल”

    मापनी- 2221 2221 2221 22, काफ़िया- अल, रदीफ़- जाते गर दरख़्त न होते तो कदम चल निकल जाते यह मंजिल न होती तो सनम हम फिसल जाते तुम ही कभी जमाने को जता देते फ़साने तो...


  • “रथपद छंद”

    “रथपद छंद”

    छंद, विधान~[ नगण नगण सगण गुरु गुरु] ( 111 111 112 2 2 ) 11वर्ण,4 चरण, दो चरण समतुकांत सकल अवध सिय रामा जी सुखद मिलन अभि रामा जी। दसरथ ललन चलैया हैं रघुवर अवध बसैया...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    शीर्षक—कमल, पद्म, पंकज, नीरज, सरोज, जलज आदि समानांतर शब्द नमन करूँ माँ पद कमल, अर्चन बारंबार। नव दिन की नवरात शुभ, श्रद्धा सुमन अपार। धूप दीप नैवेद्य ले, ‘गौतम’ करता जाप- भक्ति भावना चाहना, माता के...

  • इंतजार….

    इंतजार….

    कितना इंतजार है मेरे प्यार में….. ये तुम क्या जानो पल-पल जी रही हूँ तुम्हारी यादों में….. पर अब अच्छा नहीं लगता यूँ तुम्हारे ख्वाबों में जीना हकीकत हो तुम मेरी जिंदगी के…. लौट आओ न...

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