नवीनतम लेख/रचना


  • *** संस्कार और दिखावा ***

    *** संस्कार और दिखावा ***

    कल सपने में देखा-गुरुवर पत्नी सहित पधारे. “धन्यभाग्य हैं” कहकर हमने उनके पाँव पखारे. वे बोले-खुश रहे सदा तू बस इतना बतला दे- यों ही चरण कभी क्या धोये तूने मात-पिता के? यह सुनते ही नींद...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    समझना यही था कि क्या चाहते थे प्रजा न्याय को माँगना चाहते थे | किसी में हुआ कुछ, अलग ही किसी में सभी एकसा फैसला चाहते थे | फसल की दरें देहकाँ को मिला था गुमाश्ता...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    घर द्वार/ नहीं कर्ज/ में’ दिलगीर/ गर आये सुन कष्ट नयन मेरे भी’ आंसू से भर आए | सब शत्रु का’ छक्का छुड़ा रणभूमि हिलाई ललकारते’ शमशीर उठाकर वो’ घर आए | मायूस न हो, दूर...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    पर्व है शुभ, लगा गुलाल हमें रब ! अभी करने’ दे धमाल हमें | अब तलक हम नहीं हुए काबिल वज्म से तू नहीं निकाल हमें | अनुसरण तो तुझे किये ऐ रब! योग्य साँचे में’...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    अब तक विकास के लिए’ क्या क्या किया गया कमजोर वास्ते तो’ जरा सा किया गया | सबका विकास, हाथ सभी का, यही तो मंत्र तारीफ से गरीब में’ प्यारा किया गया | हर बार इंतखाब...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    गुल की’ खुशबू तैरती गुलजार का वक्त है माली के इक उपहार का | सावधानी से सही कहना यहाँ कान होता है इसी दीवार का | अस्पतालों में दवाई की कमी है परेशानी सभी उपचार में...

  • जीवन मंच

    जीवन मंच

    दुनिया जैसे मंच कठपुतली का वो ऊपर बैठा सूत्रधार है किसी को कभी हँसाता, कभी रुलाता कभी बुलंदियों पर पहुँचता कभी ख़ाक कर जाता है दुनिया जैसे मंच कठपुतली का कोई रूठता, कोई मनाता यहां से...


राजनीति

कविता