नवीनतम लेख/रचना


  • अधूरी मन्नत

    अधूरी मन्नत

    दमयंती की आँखों के सामने चाहे स्वच्छ अनंत आसमान था, मगर उसके मनस्पटल पर घोर काले बादल उमड़-घुमड़ मचा रहे थे. सहसा बिजली सी कौंधी और बादल बरसने लगे. उसका हाथ बरबस ही भीगे हुए गालों...

  • नीम की शीतल हवा

    नीम की शीतल हवा

    ग्रीष्म ऋतु में संगिनी सी, नीम की शीतल हवा। दोपहर में यामिनी सी, नीम की शीतल हवा। झौंसता वैसाख जब, आती अचानक झूमकर सब्ज़ वसना कामिनी सी, नीम की शीतल हवा। ख़ुशबुएँ बिखरा बनाती, खुशनुमाँ पर्यावरण...

  • कह मुकरी

    कह मुकरी

    (१) याद वही दिन हर क्षण आते, अश्रु नयन में भर भर जाते। बिन देखे अब रहा न जाता, ऐ सखि साजन?नहिं प्रिय माता।। (२) नखरे करके मुझे सताते, बार -बार छूकर मुस्काते। लगते अच्छे दिल...

  • गीतिका

    गीतिका

    कौन  है  चोर  कैसे  हम  जाने, कौन  सिरमौर  कैसे  हम जाने। झूठे अभिमान  के पीछे  उसके, किसका है ज़ोर कैसे हम जाने। ऐसे रिश्तें हैं आजकल जिनका, ओर  न  छोर  कैसे  हम  जाने। फर्क  दोनों  में ...

  • रिश्ते

    रिश्ते

    कुछ रिश्ते आदर, अपनापन, अनौपचारिकता और आकर्षण के रेशमी धागे इतनी कारीगरी से गुंथे होते हैं कि बिना नाम के ही इसकी खूबसूरती बनी रहती है ! ऐसे ही कुछ रिश्ते से बंधे थे जीनत और...



  • कबीर को समर्पित दोहे

    कबीर को समर्पित दोहे

    हार नहीं सकते कभी , मन में ले विश्वास। जीत नहीं सकते कभी,शंका के बन दास। नागिन सी डसती रही,उसको जग की पीर। सब मस्ती से  सो गये, जगता  रहा  कबीर। देख बेतुका ये जहां, तन...


कविता