नवीनतम लेख/रचना

  • सुख का बोध….

    सुख का बोध….

    सुख का बोध होगा कब अब मेरे पास है सब पर उलझ हूँ उलझन में इस ह्रदय की तड़पन में कब आएगा सुख का मेला जहाँ हो जीवन का ठेला कैसे मैं जज़्बात कहूं इस गम...

  • कुमारी का मंदिर

    कुमारी का मंदिर

    विशाल सागर हृदय में बसा मंदिर सुनाता कुमारी की वीरता की गाथा, बाणासुर का काटा था मस्तक उसने प्रसिद्ध है इतिहास में यह पौराणिक कथा। देवी पार्वती की अवतार थी कुमारी थी शिव जी की सबसे...

  • चिरकालिक व्यथा

    चिरकालिक व्यथा

    मैं कब से देख रही थी उसे,अथाह पीड़ा के साथ – साथ उसकी आंखों में घृणा की ज्वाला भी धधक रही थी। मेरी नजर ने उसके निगाहों का पीछा किया और जो दृश्य मुझे दिखाई दिया...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    चाहती क्या तू ज़माना छोड़ दें ? ये सभी रिश्ते निभाना छोड़ दें ? बेवफा बनना सिखाता क्यूँ मुझे वक्त! मेरे राह आना छोड़ दें | जिंदगी में बेदना तुम ने दिया और तू मुझको सताना...

  • गजल

    गजल

    हर तरफ है खौफ का मंजर खुला रहनुमा का राज़ का तेवर खुला | बंद के पश्चात जब परिसर खुला आदमी के हाथ में खंजर खुला | सिन्धु से भारत घिरा है तीन सू किन्तु पश्चिम...

  • गजल

    गजल

    हैरान हो गया बुझा’ व्यवहार देखकर अभिभूत हो गया दिली’ सत्कार देखकर | अंग्रेज आये’ थे यहाँ’ व्यापार के लिए फिर रह गए थे’ माल का’ अम्बार देखकर | नाराज़ थी प्रिया मे’री’ जब देर हो...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    सिर्फ तकरीर ही’ सब कुछ नहीं’, तद्वीर भी’ थी जो मिला उसमें’ भी’ इंसान की’ तक़दीर भी’ थी | चाह थी पर नहीं’ आना हुआ’ अबतक यहाँ’ पर हाथ थे मुक्त तो’ क्या ? पैर में’...


  • याददाश्त

    याददाश्त

    सुना है कुछ लोग खोज रहे है, याद रखने के तरीके। सुना है कुछ लोग खोज रहे है, भूलने के तरीके।। और हमें न फिक्र है भूलने व याद रखने की। बस हम तो समझने में...

  • नीयत का शहनशाह

    नीयत का शहनशाह

    भले ही नियति ने उसे शहनशाह नहीं बनाया हो, पर नीयत का शहनशाह तो वह था ही. उसने कभी कुर्सी की चाहत नहीं की थी, पर कुर्सी उसे मिल गई थी, भले ही वह व्हील चेयर...

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