कविता

मिट्टी

*मिट्टी* सार है व्यवहार है संसार है मिट्टी | जग रचा जिससे वही आधार है मिट्टी | लहलहाती है फसल गुल मुस्कराते हैं – अन्न उगता है जहा गुलज़ार है मिट्टी | शून्य बसता है जहा वीरान हो धरती – सब उसे बंजर कहे बेधार है मिट्टी | पेट को रोटी मिले घर में उजाला […]

कविता

नारी नहीं है पहेली अगर, तो माँ रूप में ! माँ मतलब कुंती भी, मरियम भी, द्रोपदी-गांधारी भी, कैकेयी भी, पुतली भी, देवकी-यशोदा, तो कंश की माता भी, कमला कौल भी, हीराबेन भी, चंबल के डकैतों की माँ भी, भरतवत्सला मंथरा भी, फूलन देवी की माँ भी, या राष्ट्रमाता भी, मदर टेरेसा भी, तो फाँसी पर चढ़ गए हत्यारे, अपराधी.. इत्यादि की माँ भी, माँ मतलब चाहे विवाहिता हो या लिव इन रिलेशनवाली या अविवाहित माँ हो या कचरे के डब्बे में फेंके गए नवजातों की माँ हो या बछड़े की माँ हो या कुत्ते के पिल्ले की मां.. माँ मतलब आदरणीया होती हैं, श्रद्धेया होती हैं !

नारी नहीं है पहेली अगर, तो माँ रूप में ! माँ मतलब कुंती भी, मरियम भी, द्रोपदी-गांधारी भी, कैकेयी भी, पुतली भी, देवकी-यशोदा, तो कंश की माता भी, कमला कौल भी, हीराबेन भी, चंबल के डकैतों की माँ भी, भरतवत्सला मंथरा भी, फूलन देवी की माँ भी, या राष्ट्रमाता भी, मदर टेरेसा भी, तो फाँसी […]

राजनीति

भोला सिंह

बेगूसराय (बिहार) से भाजपा सांसद ‘कामरेड’ भोला सिंह का निधन 80 वर्ष की आयु में गत वर्ष 19 अक्टूबर 2018 की रात्रि को राम मनोहर लोहिया अस्पताल, नई दिल्ली में हो गया । श्री भोला सिंह पहली बार 1967 में वाम दलों के समर्थन में बेगूसराय से निर्दलीय विधायक चुने गए थे, फिर 8 बार […]

राजनीति

एन डी तिवारी

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के टॉपर रहे ‘नारायण दत्त तिवारी’ नेहरू-गाँधी परिवार से कुछ विवाद के कारण प्रधानमंत्री नहीं बन पाए, तब स्व. नरसिंहराव को मजबूरन कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री बनाये थे! 18 अक्टूबर 1925 को नैनीताल में जन्म लिए तिवारी जी का निधन भी 93 वर्ष की वयोवृद्धावस्था में 18 अक्टूबर (2018) को ही हुआ ! […]

कविता

मैं पैसा हूं

मैं पैसा हूं मैं बोलता हूं जब हो पैसे चार जेब में तब मेरी खनक देखिए देखिए उस वक्त मेरी चल ढाल देखिए मेरे इर्दगिर्द लोगों का जाल भीड़ में दूर से दिखूंगा हर किसी का कह लाऊंगा मैं रिश्तेदार मेरी हां में हां मिलाने वालो की होगी लंबी फेहरिस्त क्योंकि मैं पैसा हूं मैं […]

लेख

नारी का संघर्ष: तब, कल और आज!!

कभी माँ, कभी बहन, कभी भाभी, तो कभी नानी और न जाने कितने रिश्तों  को कई रूपों में  युगों – युगों से नारी निभाती आ रही है। हर देशकाल और परिस्थितियों में अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए नित्य संघर्ष करती नारी को हमारी सनातन संस्कृति में  देवी के रूप में पूजनीय  माना गया […]

इतिहास

विसर्जन

विसर्जन हम करते है उन देवी देवताओं का जिनको हम बड़ी श्रद्धा से विशेष अवसरों पर कई दिनों तक पूजते हैं, नमन,वंदन, अभिनंदन करते हैं कथा, कीर्तन, जागरण करते/कराते हैं चौकियां सजाते हैं। फिर बड़ी ही श्रद्धा भाव से तालाबों, पोखरों ,नदियों में नाचते गाते विसर्जित कर आते हैं पर यह विडंबना नहीं है तो […]

इतिहास

जीव और प्राणी

हर जीव/हर प्राणी का जीवन आधार है जल, जंगल, जमीन, मानव ही प्राणी कहलाते बाकी सब हैं जीव । कहते हैं चौरासी लाख योनियों के बाद फिर मानव तन मिलता है, फिर भी हमको लगता मानव तन सबसे सस्ता है। भ्रम का शिकार बन गुमराह न हो जाओ, मानव तन जब मिल गया तो मानवता […]

कविता

हमारी रसिकता रीत न जाए

मन्दिर में बड़ का वृक्ष वृक्ष पर बैठा था तोतों का एक जोड़ा जोड़ा मन से तो जवान था तन से भले ही अधेड़ था थोड़ा-थोड़ा तोता तोती से चोंच लड़ाने को था आतुर तोती थी ज़माने की व्यथा से व्याकुल बोली, “तुझको चोंच लड़ाने की पड़ी है इधर सारा संसार है भ्रष्टाचार से व्याकुल […]

कविता

प्रकृति का हर रंग निराला है

प्रकृति का हर रंग निराला है जिसने इनका आनंद लिया वह सचमुच किस्मतवाला है. नभ में है सूरज का वास देता है जो ताप-उजास स्वास्थ्य का अनमोल ख़जाना कीटों का करता है नाश. नभ में चंदा भी रहता है देता चांदी-सी चंदनिया का निखार बरसाता मधुरस और शीतलता रोशनी ले सूरज से उधार. नभ में […]