नवीनतम लेख/रचना


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    आईने को कभी अपनी अदा बताते रहिए सीरत और सूरत भी खुद आजमाते रहिए है तुम्हारा दुनिया से बस इतना राबता वो जलती है जितनी उसे जलाते रहिए मुखौटे बहुत सजे हैं चेहरे पर इंसान के...


  • दिवाली

    दिवाली

    एक दिवाली ऐसी भी हो जहाँ न शोर पटाखों का हो और न बारूदों के धुएं का जहर हवा में घोला जाये अपनी हिंसक खुशियों के हित प्रकृति पर ना दुराचार हो पशु पक्षी ना व्याकुल...

  • संघर्ष

    संघर्ष

    कुछ दिनों से संदना का फेसबुक पर मन को झकझोरने वाली ‘सृष्टि की व्यथा’ को कम करने के लिए अपने ग्रुप से विचार-विमर्श चल रहा था. ”सृष्टि को प्रदूषण-मुक्त करने के लिए हम केवल ‘विश्व पर्यावरण...

  • कविता का रूप

    कविता का रूप

    कविता का रूप सरल मसले कुछ भी रहे मगर भाव, भाषा और विचार का सभी पर हो असर। कुछ आक्रमकता और कर्मठता पर्सनल हस्तक्षेप को न प्राथमिकता अच्छे शब्द और मौलिकता सही मायने में कविता की...

  • हम कह ना पाए

    हम कह ना पाए

    लग रहा है जैसे तू मुझसे दूर जा रही है, तेरी यादें मुझमें एक डर सा जगा रही है। बीते लम्हों की बेचैनी मुझे रुला सी रही है, दिल की हर धड़कन तुझे बुला सी रही...




कविता