नवीनतम लेख/रचना


  • खेवत उर केवट बनि

    खेवत उर केवट बनि

    खेवत उर केवट बनि, केशव सृष्टि विचरत; सुर प्रकटत सुधि देवत, किसलय हर लय फुरकत ! कालन परिसीमा तजि, शासन के त्रासन तरि; कंसन कौ चूरि अहं, वंशन कौ अँश तरत ! हँसन कौ मन समझत,...




  • गज़ल

    गज़ल

    कुछ इस तरह तेरी चाहत ने बेकरार किया, आईना देखा भी तो तेरा ही दीदार किया, ============================ इस दीवानगी ने छीन लिए होश मेरे, मुहब्बत ने हमें रूसवा सरे-बाज़ार किया, करना था तो नज़र मिलने से...


  • ऊर्जा

    ऊर्जा

    अध्यात्म मानता है कि 84 लाख योनियों मे प्रकृति की सर्वोत्तम व विवेकशील कृति के रूप मे मनुष्य का जन्म हुआ है।यह मानव काया जिसमें त्याग, दया, स्नेह, प्रेम, सहनशीलता जैसे दूर्लभ गुणों का समावेश होता...


  • अधूरा

    अधूरा

    यूँ कुछ रोज़ से एक ख्याल आता है मुझको कोई ग़ज़ल जो कहूँ अधूरी रह जाती है गर तस्वीर बनाऊ रंग नहीं मिलते हैं सारे रंग और लफ्ज़ बे-मानी हो जाते हैं जाने कोई गुमान सा...

कविता