नवीनतम लेख/रचना

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तारीफ़ क्या करूँ तेरी आखों की नूर की देदिप्त अंग अंग है’ सुरलोक हूर की | वो नूर और ओज, सभी दिव्य देव के राजा या’ रंक चाह है’ दैविक जुहूर की | अभियान-स्वच्छता चली’ हर...


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    लेख

    सीखना एक जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है। हम इस संसार में एक कोरे कागज़ की भाँति आते हैं। पहले ही दिन से हम सीखना प्रारंभ कर देते हैं जो हमारे अंतिम दिन तक चलता रहता...

  • गज़ल

    गज़ल

    बुजुर्गों की तेरे हाथों से ना तौहीन हो जाए तेरी बातों से कोई दोस्त ना गमगीन हो जाए ============================ मिल जाए अगर इसमें किसी मज़लूम का आँसू घड़ी में दरिया मीठे पानी का नमकीन हो जाए...


  • लेख

    लेख

    भारत में शिक्षा पद्धति कैसी हो ? ************************* – राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित” अर्वाचीन काल मे भारत की शिक्षा मैकाले की शिक्षा पद्धति पर ही चल रही है। आज की शिक्षा मात्र नोकरी पाने हेतु क्लर्क तैयार...


  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    यादें सहज अतीत मिली है वीणा को संगीत मिली है मन महफिल पहचान मिली धूप खिली है शीत मिली है॥ वाह अनोखा है यह संगम बहुत पुरानी प्रीत मिली है॥ कुछ न कहना कुछ नहीं सुनना...



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