नवीनतम लेख/रचना


  • सतरंगी आकांक्षा

    सतरंगी आकांक्षा

    एक दिन सरिता की प्रधानाचार्या का फोन आया. सरिता को प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार के लिए निर्वाचित किया गया था. फोन सुनकर सरिता न जाने कितने वर्ष पीछे पहुंच गई. सरिता ने कभी भी मन में...

  • गज़ल

    गज़ल

    इतना ना इतराया करो कुछ बातें मान भी जाया करो =================== मुलाज़िम नहीं हम आशिक हैं थोड़ी इज्ज़त से पेश आया करो =================== काँटों की चिंता छोड़ के तुम आँगन में फूल उगाया करो =================== दिल...

  • व्यंग्य – ऋतुराज का राज!

    व्यंग्य – ऋतुराज का राज!

    पधारो वसंत! तुम हर साल की तरह इस बार भी बिन बुलाए आ गए? बड़े बेशरम हो भाई!! तुम ऋतुराज हो! कुछ तो अपने मान-सम्मान और स्वाभिमान का ख्याल रखा करो? तुमसे अच्छी तो तुम्हारी ‘रानी-बरखा’...

  • जानते हैं सब

    जानते हैं सब

    क्या है इस संसार में, जानते हैं सब। एक ही मालिक है सबका, ईश्वर, कहो या रब गर है भाई हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई फिर ये आपस में हैं करते क्यों प्रतिदिन जंग क्या है इस...

  • हे मां मुझे आशीष दो

    हे मां मुझे आशीष दो

    हे ज्ञानदायिनी माता देती रहना आशीष सदा। हे मां तेरे चरणों में ही झुकता रहे यह शीश सदा, मैं छोड़ सकू सभी अवगुण दे दो मां ऐसी शक्ति, ऐसा मुझको वर दे दो मां तेरा सदैव...


  • सारस और लोमड़ी

    सारस और लोमड़ी

    एक गांव के पास ताल में, सारस एक रहा करता था, दिन भर पानी में रहता था, खुश सबको करता रहता था. एक लोमड़ी वहीं पास में, रहती थी, आती-जाती थी, बड़े प्रेम गाना गाकर, सबका...

  • आपाधापी के कूप में

    आपाधापी के कूप में

    गर्मी का मौसम आते ही बहाता है पसीने के पनारे सर्दी का मौसम अपनी मौजूदगी दर्ज़ कराता है दांत कट-कटाकर प्यारे वर्षा रानी प्रेम से अपने साथ लाती है आनंद-जल के धारे, लेकिन, बसंत ऋतु आती...

  • सरस्वती वंदना

    सरस्वती वंदना

    वीणावादिनी ज्ञान दायिनी ज्ञानवान कर दे…. माँ रूपसौभग्यदायिनी नव रुप भर दे…. जीवन में नव रस नव गीत नव स्वर भर दे… हंसवाहिनी श्वेतांबरी जग उज्ज्वल कर दे….. वीणापाणिनि शब्ददायिनी शब्दों से भर दे…. ज्योतिर्मय जीवन...