धर्म-संस्कृति-अध्यात्म लेख

हमारा मनुष्य होना तभी सार्थक है यदि हमनें ईश्वर को जान लिया है

ओ३म् मनुष्य को पता नहीं कि उसका इस संसार में जन्म क्यों हुआ है? उसको कोई इस बात का ज्ञान कराता भी नहीं है। मनुष्य जीवनभर संसार के कार्यों में उलझा रहता है, अतः अधिकांश मनुष्यों को तो कभी इस विषय में विचार करने का अवसर तक नही मिलता। यदि कोई इन विषयों पर विचार […]

लघुकथा

घंटी

आज ”श्वेता प्रकाशन” का शुभारंभ होने वाला था. तन से तो श्वेता सभी आवश्यक प्रबंध करने में लगी हुई थी, पर मन से वह सालों पुरानी स्मृति में खोई हुई थी. ”मैडम आप शाम को मेरे घर आ जाइएगा, उपन्यास-प्रकाशन से संबंधित सभी बातें वहीं आराम से हो जाएंगी.” एक प्रकाशक ने कहा था. श्वेता […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

सौलह कलाओं से युक्त पूर्ण चन्द्रमा की रात शरद पूर्णिमा

अश्विन मास के शुक्‍ल पक्ष की पूर्णिमा जो कि शरद पूर्णिमा कहलाती है इसका जितना महत्व धर्मिक दृष्टि से है, वैज्ञानिक दृष्टि से भी कम महत्व नहीं है। कहा जाता है इस दिन है चंद्रमा धरती पर अमृत की वर्षा करता है। इस दिन प्रेमावतार भगवान श्रीकृष्ण, धन की देवी मां लक्ष्मी और सोलह कलाओं […]

कविता

प्यार का तोहफा

मत बोओ बीज घृणां के जमाना हो जायेगा तुमसे खफा इसलिए सबको दो प्यार का तोहफा             * प्यार प्रकृति का दिया उपहार है इसका दो सभी को तोहफा तभी साकार है             * प्यार से पराये भी हो जाते है अपने बिना प्यार के […]

कविता

बड़े ओहदेदार

लव, सेक्स और धोखा ! नेशनल अवार्डी अभिनेता ‘राजकुमार राव’ की पहली हिंदी फ़िल्म है और मेरे कुछ मित्रों के ज़िन्दगी की भी ! •••••• संकीर्ण सोचवाले व्यक्ति बड़े ओहदे पर पहुंचकर अपने ‘पद’ को नुकसान ही पहुंचाता है? ओहदा पा लेने से कोई व्यक्ति बड़ा नहीं हो जाता ! •••••• यहाँ पति को परमेश्वर […]

भाषा-साहित्य

21 वीं सदी के बेबाक लेखक

जिनसे कई बार मुलाकात हुई है, तो जिनके कई ‘पत्र’ मेरे पास है और जिनकी सम्पादकत्व में ‘हंस’ में कई बार छपा हूँ मैं; उस 21वीं सदी के कबीर व नई कहानी के पिता “राजेन्द्र यादव” की पुण्यतिथि (28 अक्टूबर)  पर सादर नमन और भावभीनी श्रद्धांजलि ! ●●साहित्यकार राजेन्द्र यादव का रचना-संसार:- ■कहानी-संग्रह :- देवताओं […]

भाषा-साहित्य

नमन मनन

व्ही. शांताराम की पुण्यतिथि पर सादर नमन…. “ए मालिक तेरे बंदे हम….. बड़ा कमजोर है आदमी, पर तू है बड़ा कृपालु…. जब जुल्मों का हो सामना, तब तू ही हमें थामना…… नहीं हो बदले का भावना ….” यह गीत ‘श्री बालकवि बैरागी’ की रचना है, किन्तु यह गीत महान निर्देशक व्ही. शांताराम निर्देशित किसी फिल्म […]

इतिहास

क्यों और कैसे ?

पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने भारत विभाजन का ज़िम्मेदार सरदार पटेल को बता रहे हैं। ऑनलाइन अखबार ‘मेकिंग इंडिया’ के अनुसार- स्वाभाविक ही समस्त हिन्दुओं को अपने प्रिय सरदार के खिलाफ माननीय हामिद मियां की यह बात बहुत बुरी लगी है और इसीलिए हिन्दुओं के मन में इस बात से मुस्लिमों के लिए कोई […]

विविध

धरती पर की कुछ बातें !

अपने देश में पति को परमेश्वर मानने की अवधारणा है, अगर ‘पति’ आवारा हो, मवाली हो, नशेड़ी हो, चोर हो, पॉकेटमार हो, आपको पीटते हों, फिर भी वो परमेश्वर है, क्यों ? क्योंकि मेरी माँ भी नानी से यह सबक लेकर आई हैं ! दरअसल, परमेश्वर को पति मान लेने की प्रार्थना से ही निकला […]

इतिहास

परिंदे

परिंदे उन्मुक्त उड़ते गगन में निश्छल पवित्र भाव लिए द्वेष, ईर्ष्या, घृणा, नफरत से दूर जाति,धर्म, मजहब से मुक्त गिरगिट की तरह रंग नहीं बदलते ईश्वर, अल्लाह में भेद नहीं करते, साम्प्रदायिकता के बीज नहीं बोते। खुद जियो और जीने दो का सिद्धांत अपनाते, जमाखोरी, अनाचार, अत्याचार, भ्रष्टाचार से दूर निश्चिंत भाव से खुशहाली भरा […]