नवीनतम लेख/रचना



  • किसान अन्नदाता है

    किसान अन्नदाता है

    किसान के हाथ में कुदाल, न हो क्या होगा? सोचा है किसी ने, किसान जो हल चलाता है, मिट्टी से सोना उगाता है, पर होता है गंदी राजनीति का शिकार, उसको कितनी मेहनत करनी पड़ती है...


  • सिर्फ़ लाल

    सिर्फ़ लाल

    मेरी मा ने एक बार कहा था , बेटे जहा गणतंत्र का झंडा , फहराया जाये , 26 जनवरी को , वहा ! उस जश्न मे मत जाना , उस झण्डे के नीचे मत जाना ,...

  • अलविदा 2018

    अलविदा 2018

    पल पल बीत गया इस वर्ष को सहेज कर यादों में । नव वर्ष का हदय से करे स्वागत महकती सी कल की नई भोर में । बना हौसलों की नई उङान बह चलें समीरमय समय...

  • ये कैसा है रामराज्य?

    ये कैसा है रामराज्य?

    जो सारी धरती का स्वर्ग कहलाता है कश्मीर, दहशत की आग में आज जलता जा रहा है । उद्योगों से सज रहे है देखो अनेको नगर, गंगा का पावन जल अमृत से विष बनता जा रहा...

  • लघु कथा  – लक्ष्य के लिए

    लघु कथा – लक्ष्य के लिए

    “रामू तुम्हारा बेटा पढ़ने में कतई नालायक है , तुम्हें कितनी बार कहा है कि यदि उसकी पढाई लिखाई पर ध्यान नहीं दे सकते तो उसका दाखिला हटा लो स्कूल से , खुद तो अनपढ़ हो...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बिना बात ही डर ग‌ए क्यूं? टूट ग‌ए, बिखर गए क्यूं? मंज़िल तक तो पंहुच जाते, रस्ते- रस्ते ठहर ग‌ऐ क्यूं? सज़ा मिले बच्चों को ऐसा, ज़ुर्म जहां में कर गए क्यूं? ज़िंदा रहते हिम्मत थी...


राजनीति

कविता