कविता

गुजरा वक़्त

क्या देख रहे हो मुझे इतनी गौर से मैं गुजरा हूं वक़्त हूं जा रहा हूं कभी गुलज़ार था अपने आस पास होने वाली भीड़ से उनके कहकहों से आज अकेला हूं रहा करती थीं भीड़ कभी साथ जो आज खो गई भीड़ में अकेला रह गया बुझता हुआ चिराग हूं कोई उम्मीद नहीं अब […]

ब्लॉग/परिचर्चा

खुशियों की बेला आई: जन्मदिन की बधाई

(सभी सम्माननीय पाठकों के लिए एक विशेष उपहार के साथ) प्रिय पोते आरोह, जन्मदिन मुबारक हो, आज 8 जुलाई आपका जन्मदिन है. सबसे पहले आपको Happy birthday. ”खुशियों की बेला आई, जन्मदिन की बधाई, बड़े प्यार से अपना जन्मदिन मनाओ, खूब मेहनत करो और आगे बढ़ो, खुशियों के सजीले सुमन खिलाओ.” कोरोना के कारण आजकल […]

लेख

“गुरु के सानिध्य में आध्यात्मिक यात्रा आरम्भ करने का दिवस है गुरु पूर्णिमा”

“गुरु के सानिध्य में आध्यात्मिक यात्रा आरम्भ करने का दिवस है गुरु पूर्णिमा”- आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। भारतीय संस्कृति आध्यात्मिक संस्कृति है। अध्यात्म का अर्थ है आत्मा का अध्ययन औऱ संस्कृति का अर्थ है, परिष्कार , शुद्धिकरण। स्वयं को परिष्कृत करना। अर्थात आत्मा पर […]

कुण्डली/छंद

वृद्धाश्रम

जीवन के इस मोड़ में, यादें ही अब शेष बेटा बेटी छोड़ के, चले गए परदेश चले गए परदेश, जरा भी याद न आई वृद्धाश्रम में बैठ, आँख माँ की भर आई चले चक्षु चलचित्र, मनस होता उद्दीपन भूली बिसरी याद, यही माता का जीवन छाती में रख पत्र को, वृद्धाश्रम में मात थाती बस […]

लघुकथा

आज़ादी

आज़ादी! आत्माराम ने पिंजरे समेत तोता खरीदा। वे शहर के सुप्रसिद्ध राजनेता थे। उनके यहां दिन भर लोगों का तांता लगा रहता था। तोते वाला पिंजरा हाल में टंगा रहता था। जब नेता जी घर पर नहीं होते थे, तब दिन भर हाल में टी वी चालू रहता था, जिससे तोते का खूब मनोरंजन होता। […]

गीतिका/ग़ज़ल

किसी के पास में चेहरा नहीं है

किसी के पास में चेहरा नहीं है किसी के पास आईना नहीं है   हमारा घर खुला रहता हमेशा हमारे घर में दरवाजा नहीं है   चले आओ यहां बेख़ौफ़ होकर यहां बिल्कुल भी अंधियारा नहीं है   मगर राजा वही है ध्यान रखना भले अंधा है पर बहरा नहीं है   हमें कैसे ग़ज़ल […]

लघुकथा

ये जो पब्लिक है

एक गाना है- ये जो पब्लिक हैं वह सब जानती हैं पर फिर भी ‘बेवकूफ’ बन जाती है क्योंकि वैलेंटाइन-वीक के बाद ‘एंटी-वैलेंटाइन वीक’ भी वे मनाने लग जाते हैं — कभी ‘स्लैप डे के रूप में तो कभीे ब्रेकअप-डे’ के रूप तक तक यानी प्यार पसंद नहीं आया तो छोड़ भी दे — इजहार […]

लघुकथा

नाचीज़ भविष्यवाणी

बिहार विधानसभा चुनाव-परिणाम, दिल्ली विधानसभा चुनाव-परिणाम और खासकर 2004 के लोकसभा चुनाव परिणामों से ऐसे एग्जिट पोल की भविष्यवाणी फेल हुई है। तब ‘भारत उदय’ व ‘इंडिया शाइनिंग’ की वस्तुस्थिति चरमोत्कर्ष पर था । यह सिर्फ गणित की ‘प्रोबेबलिटी थ्योरी’ पर आधारित है । यह मुट्ठी भर लोगों व मतदाताओं के आँकड़े पर आधारित होते […]

लघुकथा

राजनीतिक कुचेष्टा

यह ‘मानव बम’ एक महिला थी। ममता बरसानेवाली एक महिला क्या इतनी क्रूरतम भी हो सकती है भला? किसी देश में किसी देश के धर्म / जाति / समुदाय वाले बस जाय, तो उसे किस देश के प्रति स्वामीभक्ति दिखानी चाहिए ! क्या जिनका नमक खा रहे हो, उनका ऋण अदा करोगे ? परंतु जिन्होंने […]