नवीनतम लेख/रचना

  • लो बेच दिया जमीर

    लो बेच दिया जमीर

    बाजार मे खुद ही अपना ईमान बेचकर। कल रात नींद ना आयी अपना अभिमान बेचकर ।। बस अब मेले में नजर मैं ना आऊंगा । जो मैं था वो ना बचेगा तो खुद से नजरे कैसे...

  • माँ

    माँ

    माँ के सम्मान में क्या कहूँ, ये शब्द अपने आप मे सम्माननीय है, कभी मेरे दर्द से जो दुखी हुई वो सिर्फ माँ थी, हमेशा साथ थी मेरे,चाहे मैं बड़ा था या बच्चा था, माँ जब...

  • नीर हुआ गंभीर

    नीर हुआ गंभीर

    कविता – नीर हुआ गंभीर । सबके अपने दर्द है सबके अपने नीर । क्यों तू अपने दर्द पर नीर हुआ गभीर ।। मतलबी के दिल मे कब था तेरा दर्द । जिससे उसका काम बने...

  • “हेलमेट सिर पर रखो”

    “हेलमेट सिर पर रखो”

    आस-पास होने लगा, सड़कों का विस्तार। लेकिन इससे हो गयी, बहुत तेज रफ्तार।। सड़क किनारे लगेंगे, छायावाले वृक्ष। इस पर भी अब टिप्पणी, करने लगा विपक्ष।। स्वच्छ बने वातावरण, सुधरें सबके हाल । पेड़ों पर खिल...


  • मक्कू को सबक

    मक्कू को सबक

    शरारती और चटोरा मक्कू चूहा इधर-उधर खाने की तलाश में फिर रहा था। उसे मिर्च-मसालेदार और दूध से बनी चीजें बहुत पसंद आती थीं। तभी पनीर की लुभावनी गंध उसकी नाक में घुसी और वह उसको...

  • बलिदान

    बलिदान

    पेरमब्रा तालुक अस्पताल में नर्स के तौर पर कार्यरत 31 साल की लिनी की निपाह वायरल की चपेट में आने से मौत हो गई, लेकिन अपने पति को उसके लिखे अंतिम पत्र ने उसे अमर बलिदानियों...


  • घमण्ड

    घमण्ड

    काली और सुनहरी कलम अपने डिब्बे से बाहर आ चुकी थी। पास की दवात की शीशी रही हुई थी। कलम ने शीशी को देखा और इठला कर बोली,”देखो मैं कितनी सुन्दर हूँ, मेरा आकार,मेरा रंग-रूप… और...

  • मुक्तक – शब्द संचयन

    मुक्तक – शब्द संचयन

    शब्द संचयन मेरा पीड़ादायक होगा, पर सुनो सत्य का ही परिचायक होगा। काव्य जगत का मैं छोटा सा साधक हूँ, पर शब्दों में उर्जा का परिचायक होगा ।। —प्रदीप कुमार तिवारी—

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