कविता

…. क्राँति अलख : खौलता खून

क्या कभी खून नहीँ खौलता तुम्हारा, जब देखते हो गरीबोँ का लहू पानी सा बहते, कि मानव को पीड़ा हो किसी मानव के रहते। क्योँ तुम उठते नहीँ क्राँति को, क्योँ बेवजह थोप रहे हो शांति को। तुम सरफिरोँ से क्योँ नहीँ हो? पर सोचो क्या चुपचाप ही सहीँ हो?? कैसे देख लेते हो मरते […]

लघुकथा

भगवान का भोग

‘हे प्रभु !! क्षमा करना, आज मैं आपके लिये भोग नहीं ला पाया !! मजबूरी में खाली हाथों पूजा करना पड़ रही है !!’ किसी भक्त का कातर स्वर सुनकर मैंने पीछे मुड़कर देखा !! अरे !! ये तो वही सज्जन हैं जिन्होंने अभी मेरे साथ ही मिष्ठान्न भंडार से भोग के लिये मिठाई ली थी […]

हास्य व्यंग्य

फुटाला के तीर

चलिए, आज आपके सामान्य ज्ञान की जाँच करते हैं। यह बताइए- फुटाला तालाब किसे कहते हैं? -तालाब को। गलत जवाब!! फुटाला तालाब शहर का सबसे धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल है। और इस तरह के स्थल हर छोटे-बडे़ शहर में होते हैं। यहाँ धर्म और संस्कृति के नये-नये कैक्टस पनपते हैं। वास्तव में फुटाला तालाब, उस […]

लघुकथा

जियोतिशी जी की गणना

सोहन लाल और उस की पत्नी बेटी के रिश्ते के बारे में बहुत वर्षों से चिंतित चले आ रहे थे. बहुत लड़के देख चुके थे लेकिन कोई बात बन ही नहीं रही थी. जब हुआ तो अचानक ही हो गया. लड़का इंग्लैण्ड से अपने माता पिता के साथ इंडिया आया हुआ था. लड़के लड़की ने आपस […]

उपन्यास अंश

उपन्यास : शान्ति दूत (चौथी कड़ी)

सम्राट पांडु के बारे में सोचते हुए कृष्ण उदास हो गये। नियति का कैसा क्रूर खेल था कि कुरुवंश के सर्वगुण सम्पन्न राजकुमार और सम्राट होने पर भी वे एक साधारण सी भूल के कारण दुर्भाग्य से घिर गये, जिसके कारण उनका वंश सर्वनाश के निकट पहुँच गया। वन में आखेट करते समय उन्होंने एक […]

विविध

लोकगीत संग्रह अभियान

भारतीय संस्कृति में गर्भ धारण से लेकर मृत्यू प्रयन्त 16 संस्कारों की अवधारणा पायी जाती है। इन सभी संस्कारों का आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक आधार भी है। प्राचीन काल में ज्ञान, संस्कृति, सभ्यता तथा सिद्धांतों को लिपिबद्ध नहीं किया जा सका अथवा वह कालान्तर में कहीं खो गया। हाँ भारतीय जनमानस ने श्रुति तथा वाचक परम्परा […]

ब्लॉग/परिचर्चा सामाजिक

कोैन ईश्वर है कोैन नहीं

पूज्य शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी के बयान में कितनी सच्चाई है इसके विवाद में न पड़ते हुये इतिहास के पन्नों पर यदि दृष्टि डाली जाये तो पता चलता है कि सच्चाई कुछ और ही है। श्रीमद्भगवत गीता को ही लें तो भगवान श्रीकृष्ण सातवें अध्याय के सोलहवें श्लोक में कहते है- ‘‘चतुुर्विद्या भजन्ते मां […]

लघुकथा

क्या सेकुलरिज़्म का ठेका हिंदुओं का है ??

आज या यूं कहूँ की अभी अभी(29-06-2014) एक “थोथे” सेकुलरिज़्म जिसे pseudo सेकुलरिज़्म भी कहते हैं उसे देखने का अवसर मिला तो घटना कुछ ऐसी है की मेरे घर के बाहर एक छोटी से दीवार है तो कुछ लोग जो थक जाते हैं वो महिलाएं और वृद्ध लोग वहीं पर बैठ जाते हैं एक मराठीभाषी […]

हास्य व्यंग्य

कबीर के साथ एक सुबह!!

  हमारे पुराण कहते हैं कि काशी गये बिना मुक्ति नहीं मिलती। किसे पता कि मरने के बाद बेटा अस्थियाँ गंगा में प्रवाहित करता है या समय और धन के अभाव में बगल में बहनेवाली नाग नदी को ही मेरी मुक्ति का रास्ता बना देता है। नया ज़माना जो है। फिर भी लोग अंतिम सांस […]

हास्य व्यंग्य

राष्ट्रीय मौसम

कई बार मैं बड़ी दुविधा में पड़ जाता हूँ कि पढ़ाते समय बच्चों को अपने देश में मौसमों की कितनी संख्या बताऊँ? बचपन से अब एक सामान्य भारतीय की तरह मेरा ज्ञान कहता है कि इस देश में तीन मुख्य ऋतुएँ- ग्रीष्म, शीत और वर्षा तथा छः उपऋतुएँ-वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर होती […]