राजनीति

वैश्विक जगत को भी मोदी से अच्छे संबंधों की आस

गुजरात में मुख्यमंत्री पद से लेकर नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री बनने तक का सफर कई मायनों मेें काफी ऐतिहासिक व परिवर्तनकारी रहा है। जिसके चलते वे पूरे विश्व के मीडिया जगत के हीरो बन गये हैं। मोदी सरकार से देश की जनता को ही नहीं अपितु वैश्विक जगत को भी कई क्षेत्रों में अच्छे दिन आने की संभावनाएं प्रतीत हो रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के सभी पड़ोसी देशों को शपथ ग्रहण समारोह में बुलाकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शपथ समारोह इस मायने में काफी ऐतिहासिक रहा कि उन्होनें इसके माध्यम से भारत के पड़ोसी देशों को यह सफल संदेश दिया है कि अब भारत में मजबूत सरकार आ गयी है।
जो कि अब न तो किसी से डरेगी न ही किसी की दादागीरी सहन करेगी अपितु वह सभी पड़ोसियों के साथ मिलकर सार्क देशों के साथ मिलकर क्षेत्र से गरीबी हटाने के लिए प्रयास करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक प्रकार से सार्क देशों के शासनाध्यक्षों को बुलाकर एक तीर से कई निशाने साधे हैं। अब यह कितने सफल होते हैं या फिर इनके कितने दूरगामी परिणाम निकलते हैं यह तो भविष्य बतायेगा। फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी के प्रयास विदेशी मीडिया में छा गये हैं। प्रधानमंत्री की पड़ोसी नेताओं विशेषकर पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ द्विपक्षीय वार्ता विशेष रूप सेे चर्चा में रहीं । मोदी- नवाज वार्ता पर भारतीय मीडिया में ही नहीं अपितु पडोसी देशो के समाचार पत्रों सहित चीन अमेरिका ब्रिटेन व अन्य वैश्विक देशों के समाचार पत्रों में बड़े -बड़े सम्पादकीय लिखे गये हैं, जिनमेें मोदी के प्रयासों की सराहना की गयी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सार्क देशों के नेताओं को बुलाने के पीछे कई उद्देश्य थे। जिसे उन्होनें पूरा किया भी। मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति महेंद्रा राजपक्षे, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई, नेपाल के रामबरन यादव साहित मालदीव मारिशस के शासनाध्यक्षों के साथ सभी प्रकार के द्विपक्षीय मामलों पर खुलकर वार्ता की है। जिसमें सर्वाधिक फोकस पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ रहे। यह बैठक लगभग 50 मिनट तक चली। इस वार्ता में भारत ने स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद और वार्ता साथ- साथ नहीं चल सकते। साथ ही दाऊद इब्राहीम सहित अन्य भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त लोगों व संगठनों की भूमिका पर भी विचार विमर्श किया गया है। भारत के रणनीतिकारों ने स्पष्ट कर दिया है कि वह शांति व विकास चाहता है लेकिन इसके लिए आतंकवाद पर रोकथाम बेहद जरूरी है। पाक प्रधानमंत्री नवाजष्शरीफ मोदी से मिलकर बेंहद खुश व भावुक भी हुये। इस अवसर पर मोदी की ओर से पाक प्रधानमंत्री की मां को शाल भी भेंट की गयी। इस विषय पर भी सोशल मीडिया व इलेक्ट्रानिक मीडिया में खूब चर्चा हुई।
सार्क नेताओं से मुलाकात के बहाने प्रधानमंत्री मोदी ने जहां सार्क शिखर सम्मेलन की अनौपचारिक बैठक कर ली वहीं पूरंे दक्षिण एशिया में विस्तारवाद की राजनीति कर रहे चीन को भी एक कड़ा संदेश दिया है। श्रीलंका, नेपाल में चीन सक्रिय है वह भूटान, मालदीव, मारिशस में भी अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है तथा इन देशों की धरती पर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। चीनी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए इस समय केंद्र सरकार में एक मजबूत व सशक्त नेतृत्व की बेहद आवश्यकता थी। जो हमें मोदी के रूप में मिल गया है। प्रधानमंत्री ने सार्क नेताओं से मुलाकात करके एक प्रकार से मृतप्राय संगठन को पुर्नजीवित करने का भी प्रयास किया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी वैश्विक छवि को निखारा है।पूर्ववर्ती सरकार ने क्षेत्रीय राजनीति के दबाव में आकर पड़ोसी देशों के साथ सम्बंधों में गहरे गढ्डे खोद दिये थे। जिन्हें भरने का काम प्रधानमंत्री मोदी ने शुरू कर दिया है। एक प्रकार से सरकार बनते ही मोदी ने विदेश नीति के सहारे अपने आगे के मार्ग को चुन लिया है।
यही कारण है कि जब भारत में आम चुनावांे की प्रक्रिया चल रही थी उस समय पाक मीडिया में मोदी के कारण भारत- पाक सम्बंधों को लेकर तरह- तरह की चिंतायेें व्यक्त की जा रहीं थीं जिसका उन्होनें तत्काल पटाक्षेप कर दिया। मोदी- नवाज मुलाकातों के बाद पाक मीडिया के सुर बदल गये हैं। पाक के सभी टीवी चैनलों में भारत- पाक मैत्री संबंधों को लेकर सारा- सारा दिन कार्यक्रमों का प्रसारण किया गया। सर्वाधिक चर्चित पत्र डाॅन में संपादकीय लिखे गये। अन्य पत्रों में भी लेख व संपादकीय लिखे गये। जिसमें मोदी के प्रयासों की सराहना की गयी। खबर है कि अब चीन भी मोदी की ओर आशा भरी नजरों से देख रहा है। चीनी नेतृत्व को आशा जगी है कि अब मोदी के नेतृत्व में आपसी सम्बंधों में अच्छे दिन आ सकते हैं।
चीनी अखबार चाइना डेली ने मोदी के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने की खबर चीन के साथ सम्बंधों मजबूत करेंगे मोदी को पहले पेज पर चित्रों के साथ लगाया है। इसमें वर्ष 2011 में मोदी की गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में चीन यात्रा का उल्लेख है। वहीं ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका ब्रिटेन व जर्मनी सहित आस्ट्रेलिया व जापान आदि के देशो में भी समाचाप पत्रों व मीडिया में मोदी पर संपादकीय व सम्बंधों में अच्छे दिन आनें को लेकर संभावनायें व्यक्त की जा रही हैं। दुनिया भर के समाचार पत्रों ने मोदी -नवाज वार्ता को एक बेहतरीन प्रयास बताया है। सामरिक व कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना हैं कि वर्ष 2014 दक्षिण एशिया के लिए बेहद निर्णायक साबित होने जा रहा है। अफगानिस्तान से अमेरिकी सेनाओं की वापसी होने जा रही है। उनकी अनुपस्थिति में तालिबान आतंकवादी एक बार फिर से अपना सिर उठा सकते हैं। अफगानिस्तान सत्ता परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। नेपाल अस्थिर है जिसका लाभ चीन उठाता रहा है। भारत में कमजोर सरकारों व क्षेत्रीय राजनीति के दबाव के चलते श्रीलंका में भी चीन अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। इन सभी चीजों को नियंत्रित करने के लिये ही मोदी के नेतृत्व में एक मजबूत व सशक्त सरकार बन गयी है जो भारत के हितों की रक्षा के लिये त्वरित निर्णय लेने में सक्षम दिखलाई पड़ रही है। यही कारण है कि वैश्विक जगत का मीडिया भी मोदी की ओर आशा भरी नजरों से देख रहा है। सभी समाचार पत्र मोदी की खबरों  से भरे पड़े हैं। आशा की जानी चाहिये प्रधानमंत्री मोदी की पहल से विदेश नीति में सकारात्मक कदम उठेंगे व निर्णय निकलेंगे।

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