हाइकु -1

बिखरे नीड़
भस्म हुये सपने
हृदय पीड़

घिरे बादल
अंतर्मन सिसके
हम घायल

कुश की शैया
व्यथित हुआ भीष्म
मृत्यु लालसा

ठिठके पाँव
विरानापन देख
औझल गाँव

परिचय - प्रवीन मलिक

मैं कोई व्यवसायिक लेखिका नहीं हूँ .. बस लिखना अच्छा लगता है ! इसीलिए जो भी दिल में विचार आता है बस लिख लेती हूँ .....