राजनीति

देश में सुधारवादी दौर की शानदार शुरूआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार बनते ही वास्तविक परिवर्तन की बयार बहने लग गयी है। बहुत दिनों के बाद देश को एक मजबूत प्रधानमन्त्री  और सरकार मिली है। देश की जनता और विशेषकर मध्यमवर्ग महिलाओं तथा युवाओं एवं नवोदित मतदाताओं एवं समाज के सभी वर्ग के लोगों ने काफी बड़ी उम्मीदों के साथ कांग्रेस को पराजित करते हुए स्वदेशी विचारधारा से युक्त सरकार का गठन किया है। मोदी सरकार से देश को बहुत बड़ी उम्मीदें हैं तथा देश की जनता उनके हर काम व होने वाले निर्णयों पर बारीक नजर बनाये हुये है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने काम करने की शैली से कई परम्पराओं को बदलकर रख दिया है तो कई परम्परायें बदलने की तैयारी में लग गये हैं। विगत 35 वर्षों के राजनैतिक इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने मंत्रियों, अधिकारियों व सांसदों  के लिए एक बिलकुल अलग प्रकार की आचार संहिता बनायी है। इस आचार संहिता को उन्होंने कड़ाई के साथ लागू करवाना भी प्रारम्भ कर दिया है। 65 वर्षों  के इतिहास में संसदीय इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि देश के प्रधानमंत्री ने संसद को मंदिर का दर्जा देते हुए उसके माथा टेकते हुए अंदर प्रवेश किया हो। जिस समय मोदी ने संसद में प्रवेश किया उस समय जब उन्होंने माथा टेका तब वह दृश्य वाकई भावविभोर कर देने वाला था। उसके बाद तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक के बाद एक परिवर्तनकारी निर्णय लेते हुए दिखलाई दिये हैं।

विगत वर्षो से देश के हालात वाकई काफी बिगड़े हुए हैं। सरकारी निर्णय लेने में काफी देरी होती थी तथा यदि निर्णय हो भी गये तो वह ठीक से लागू भी नहीं हो सके। लेकिन मोदी की कार्यशैली से अब ऐसे हालात बदलने जा रहे है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान अपने आप को मजदूर व देशका चैकीदार तक कहा था। अब वह उसी हिसाब से अपना काम भी प्रारम्भ कर रहे हैं उन्होनें अपने मंत्रियो कें लिए क्या करें और क्या न करें का दस सूत्रीय एजेंडा प्रस्तुत किया है, जिसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने मंत्रियों व सांसदों से अपील की है कि वे अपने परिवार के सदस्यों को पीए व पीएस न बनायें साथ ही पारिवारिक सदस्यों व मित्रों को मंत्रालयों से भी दूर रखें। उनकी यह बात निश्चय ही बहुत दूरगामी परिणामों वाली है।

विगत सभी सरकारों मं अधिकांश मंत्री व सांसद अपने परिवार के ही किसी सदस्य को विकास कार्यो की देखरेख करने के लिए नियुक्त करते थे जोकि वंशवाद की परम्परा को तो बढ़ावा देता ही था साथ ही साथ भ्रष्टाचार को पनपने में सहायक होता था। मोदी सरकार ने विगत सरकार में बनाये गये सभी मंत्री समूहों को भंग करने का भी साहसिक व मजबूत निर्णय लिया है। यही मंत्री समूह पिछली सरकारों में अनिर्णय व टालमटोल की हानिकारक परिस्थितियोें को उत्पन्न कर रहे थे। जिसके कारण देश में निवेशकों के मन में निराशा का वातावरण पैदा हो गया था तथा परियोजनाओं की लागत भी काफी बढ़ जाती थी। अब ऐसी परिस्थितियां फिलहाल नहीं होंगी क्योकि मोदी की कार्यशैली ही बिलकुल अलग किस्म की है। उनके निर्णयों व आचरण संहिता से लगने लगा है कि अब सभी जनहित के निर्णयों में तेजी से फैसले होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सभी सहयोगियों को नई सोच और विचारों के साथ चलने तथा लीक से हटकर काम करने की अनुमति दी है। प्रधानमंत्री ने अपने सहयोगियों से तकनीेक का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने को भी कहा है कि जिससे सरकारी कामकाज में तेजी और पारदर्शिता हो तथा देश की जनता को भी यह पता चल सके कि वे क्या कर रहे है।

इसके लिए स्वयं प्रधानमंत्री कार्यालय तो फेसबुक और टिवटर एकाउंट जैसी सोशल साइटस से जुड़ा वहीं अन्य सरकारी कार्यालय भी ऐसी ही व्यवस्था करने जा रहे हैं ताकि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही का नया युग आरम्भ हो सके। अधिक से अधिक तकनीक का उपयोग होने से लालफीहताशाही व अफसरशाही पर लगाम लगायी जा सकेगी।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एक नई प्रकार की कार्यसंस्कृति भी विकसित होने लगी है। किसी प्रधानमंत्री ने बहुत दिनों बाद देश के ७७ अधिकारयों के साथ काफी लम्बी बैठक की और उन्हें कहा कि वे किसी भी समय उनसे बात करने के लिए स्वतंत्र है। मोदी की इस पहल से अधिकारियों में एक नया आत्मविश्वास भी कायम हुआ है। नई कार्यसंस्कृति का यह असर पड़ा है कि अब देश के सभी अधिकारी भी सुबह नौ बजे ही कार्यालय पहुंचने लग गये हैं । प्रधानमंत्री के निर्देशों के अनुरूप उन्हें 100 दिनों के कामकाज का खाका या फिर सुझाव ंदेने में व्यस्त हो गये हैं। स्वयं प्रधानमंत्री मोदी सुबह नौ बजे कार्यालय पहुंच जाते हैं तथा उसके बाद बैठकों व अन्य कार्यक्रमों का दौर विधिवत शुरू हो जाता है। इसका असर प्रधानमंत्री कार्यालय के अफसरों- कर्मचारियों, मंत्रियों व उनके मातहत आने वाले समस्त कर्मचारियों पर भी पड़ रहा है। सभी लोग सुबह नौ बजे कार्यालय पहुचने लगे हैं एक नयी कार्यसंस्कृति का उदय होने लगा है। जिसकेे कारण आलस्य से भरपूर वे अधिकारी कुछ परेशानी अवश्य महसूस कर रहे हैं जिन्होेेंने पिछली सरकारों में काम न करने बावजूद खूब मलाई खाई है।

मोदी सरकार की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि देश की धड़कन हिंदी भाषा के अच्छे दिनों की शुरूआत हो गयी है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश में ही नहीें अपितु सभी विदेशी दौरों में सभी ष्शासनाध्यक्षों से केवल हिंदी में ही बात करने का निर्णय लिया है। चाहे फिर इसके लिए दुभाषिया ही क्यों न रखना पड़े। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने ही कई मौकों पर हिंदी में भाषण देकर देशवासियों को चैंकाया था लेकिन मोदी इससे कहीें आगे जाते हुए दिखलाई पड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी हिंदी भाषा के गौरव के लिए बेहद संजीदा हैे।यही कारण है कि प्रधानमंत्री कार्यालय सहित सभी सरकारी कार्यालयों के कम्प्यूटरों में हिंदी वर्णमाला के फोंट डाले जा रहे हैं। मोदी की इस पहल से आशा है कि हिंदी को उसका खोया हुआ गौरव फिर से प्राप्त हो सकेगा।

मोदी की कार्यशैली से निश्चय ही देश में एक नये क्रांतिकारी परिवर्तनकारी दौर का उदय होगा जिससे देश का विकास होगा । व्यापार बढ़ेगा और देश की सभी सीमाएं सुरक्षित हो सकेंगी। आज देश के हालात वाकई बिगड़ गये हैं इन बिगड़ें हालातोे को सुधारने के लिए वाकई नई सरकार को नयी संस्कृति विकसित करने के साथ ही नये जोश, उमंग व उत्साह के साथ लीक से हटकर निर्णय लेने होंगे। जिसकीष्शुरूआत लगभग हो चुकी है। सरकारी गलियारे में इस बात के भी प्रबल संकेत हैं कि जब देश का प्रधानमंत्री सुबह नौ बजे से देश की चिंता करने लग जाता है तो फिर अब आगे चलकर अपना विकास करने के लिए सभी 365 दिन काम करने के लिए तैयार रहना चाहिये। इस बात की प्रबल संभावना है कि अब शनिवार का अवकाश समाप्त होने जा रहा है। जिसकी हलचल सुस्त व आलसी सरकारी कर्मचारियों को परेशान कर रही है। इसकी आहट मात्र से ही अब वे अपने आप को सुधारने लग गये हैं। आशा की जानी चाहिये इन सभी छोटी- छोटी बातों से देश के सभी नागरिकों के वाकई अच्छे दिन आयेंगे।

One thought on “देश में सुधारवादी दौर की शानदार शुरूआत

  1. अच्छा लेख. मोदी जी न केवल सुधार कर रहे हैं, बल्कि इन सुधारों को सही दिशा देकर सही रूप में लागू भी कर रहे हैं. इसी से देश में सकारात्मक परिवर्तन आएगा और उस जड़ता से बाहर निकलेगा, जो देश को अन्दर से खोखला किये दे रही थी. जय श्री राम !

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