जनता की उम्मीदों को परवान चढ़ाता मोदी सरकार का एक महीना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी भाजपा-राजग गठबंधन सरकार को एक माह हो गया है। मीडिया में अपनी आदतों के हिसाब से मोदी सरकार के एक माह के कामकाज की समीक्षा हो रही है। सोशल मीडिया व इलेक्टानिक मीडिया में मोदी सरकार की लोकप्रियता को लेकर सर्वे हो रहे हैं। यह एक अच्छी बात है कि मोदी की लोकप्रियता न सिर्फ बरकरार है अपितु जनता को उम्मीद है कि मोदी ने जिस प्रकार की कार्यशैली को अपनाया है उससे देश मेें एक अच्छा शासन देखने को मिलेगा।

आम जनमानस का मानना है कि बहुत दिनों बाद एक ऐसा प्रधानमंत्री मिला है जो दिन भर काम करता है । देश व जनता की भलाई के बारे में सोच रहा है तथा लगातार कार्यशैली में परिवर्तन के माध्यम से एक नयी कार्यसंस्कृति को जन्म दे रहा है। देश में पहली बार ऐसा प्रधानमंत्री आया जिसने संसद की सीढ़ियों पर माथा टेका । शपथग्रहण समारोह में सार्क देशों को आमंत्रित करके पड़ोसियों के साथ रिश्ते सुधारने की त्वरित कवायद प्रारम्भ की। राष्ट्रभाषा हिंदी को महत्व प्रदान किया जा रहा है। अब अधिकांश कामकाज हिंदी में ही करने पर बल दिया जा रहा है। जिस पर हिंदी विरोधी तत्वों ने अपनी आंखें भी तरेरी हैं। लेकिन अब वास्तव में हिंदी के लिए तो अच्छेे दिन आ ही गये हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देंश को भ्रष्टाचार से मुक्त श्शासन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके लिए उन्होंने अपने मंत्रियों के लिए व्यापक दिशा निर्देश भी जारी किये हैं जिनका स्वागत हो रहा है।

भाजपा नेताओं का मानना है यह पहली सरकार ऐसी बनी है जिसने मात्र तीस दिन में ही कई महत्वपूर्ण निर्णय लेकर देश की जनता को भरोसा दिलाया है। आज प्रधानमंत्री की कार्यशैली का ही असर है कि सभी सरकारी अफसर और कर्मचारी समय पर आफिस पहुँचने लगे हैं। प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों से भाई – भतीजावाद व चाटुकारिता तथा चरण वंदना से दूर रहने का फरमान देकर जनता का दिल जीत लिया है।केंद्र में सरकार बनते ही कालेधन के खिलाफ अपनी मुहिम को तेज करने के लिए एसआईटी का गठन करके शुभ संकेत दिये हैं। एसआईटी ने अपना काम प्रारम्भ भी कर दिया है तथा उसका असर दिखलाई भी पड़ रहा है। स्विस बैंको व वहां की सरकार ने भारत के साथ कालेधन की समस्या पर पूर्ण सहयोग करने का आश्वासन भी दिया है। इस बात के संकेत भी मिले हैं कि स्विस बैंको में लगभग चैदह हजार करोड़ से भी अधिक धन जमा किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी की पहली विदेश यात्रा भूटान की रही जिसके भी सकारात्मक असर दिखलाई पड़ रहे हैं। भूटान सरकार ने अपने यहां चीनी दूतावास खोलने की इजाजत नहीं दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार व लालफीताशाही को दूर करने के लिए हरसंभव कदम उठा रहे हैं। इसके लिए तकनीक के अधिक से अधिक प्रयोग पर बल दिया जा रहा है तथा त्वरित कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। पुरानी सरकारों ने देश की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से बदहाल कर दिया है। भारीसब्सिडी के चलते अर्थव्यवस्था दम तोड़ रही है। देश के विकास को त्वरित गति प्रदान करने के लिए लंबित परियोजनाओं को अब प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने पर बल दिया जा रहा है। पिछली सरकारों ने पर्यावरण के नाम पर कई परियोजनाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। लंबित सभी परियोजनाओं पर विचार प्रारम्भ हो गये हैं तथा कुछ को मंजूरी भी मिली है। जलसंसाधन एवं गंगा सफाई मंत्री उमा भारती गंगा नदी व अन्य नदियों को साफ- सुथरा बनाने के अभियान में जुट गयी है। ई रिक्शा को मंजूरी देकर बेरोजगारी के खिलाफ पहला निर्णय लिया गया और साथ ही आम आदमी पार्टी से उसका एक बड़ा मुद्दा भी छीन लिया गया है। लगभग सभी मंत्री व विभाग अपनी स्पीड पकड़ रहे हेंैं तथा 100 दिन से लेकर पांच साल तक के प्रंजेंटेशन पीएमओ को दे रहे हैं।

सरकार के समक्ष आज महंगाई एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। वहीं निजाम बदलने के साथ ही राज्यपाल सहित कुछ अन्य संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों को लेकर कांग्रेसी हल्ला मचा रहे हैं । लेकिन इस विरोध में वे अपने वे दिन भूल गये हैं जब कांग्रेसीसरकारें गैर कांग्रेसी सरकारों व उच्चपदों पर बैठे लोगों को किस प्रकार से हटाती रही हैं। अभी तक मोदी सरकार ने एक भी असंवैधानिक कदम नहीं उठाया है। महंगाई से निपटने के लिए मोदी सरकार तत्पर है तथा कई निर्णय भी लिये हैं। कालाबाजारी व जमाखोरों से सख्ती से निपटने के आदेश दिये हैं तथा राज्यों से स्पेशल कोर्ट बनाने को भी कहा है।यह पहली सरकार है जो महंगाई व कम वर्षा से होने वाली समस्या से निपटने के लिए पहले से ही तैयारी कर रही है। संभवतः पहली बार मौसम विभाग ने मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में मानसून के हालातों पर अपना प्रस्तुतीकरण दिया और सरकार उसी के आधार पर अपनी नीतियों को तैयार कर रही है।

सबसे महत्पूर्ण बात यह रही कि भारत पाक सीमा पर हो रही गोलाबारी के दौरान काफी अर्से के बाद कोई प्रधानमंत्री वाररूम में गया और सेनाध्यक्ष के साथ हालातों का जायजा लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनीसरकार के एक माह पूरे होने के अवसर पर लिखे ब्लाग में कहा है कि 67 साल के मुकाबले एक माह तो कुछ भी नहीं है। हम दिन भर देश व जनता की भलाई के विषय में सोच रहे हैं। हमारे ऊपर लगातार हमलें हो रहे हैं तथा आरोप लग रहे हैं लेकिन हमें उनकी परवाह नहीं हैे। लोगों का अभूतपूर्व सहयोग मिल रहा है। जिससे आत्मविश्वास में वृद्धि हो रही है। यह बात सही भी है। जनता यह अच्छी तरह से समझ रही है कि मनमोहन सरकार ने अपने दस साल के शासनकाल में देश को पूरी तरह से खोखला कर दिया है।

रेल किराया बढ़ने पर विपक्षी दलों ने तो खूब होहल्ला मचाया लेकिन कांग्रेसी विरोध को जनसमर्थन नहीं हासिल हो सका। सर्वेक्षणों में मोदी की लोकप्रियता बरकरार है।कांग्रेस व विपक्षी दल मोदी सरकार को नीचा दिखाने मे कोईकसर नहीं बाकीनहीं रखेंगे। लेकिन अब फिलहाल एक माह के शासन व कार्यप्रणाली से देश की जनता को एक नयी उम्मीद बंधी है कि देश का विकास होगा, आर्थिक हालात अच्छे होंगे, विदेशों से अच्छे संबंध बनेंगे तथा देश में कानून का राज होगा। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार का 60 महीनों के वायदे में एक माह निकल चुका है ।