नयी कहानी!!

संघर्षो की नयी कहानी
नयी जवानी लिखती है!

नए गीत की नयी मालाएं
नए शब्दों में दिखती है

प्रेरणा पुंज नित नूतन
नवोत्साह जगाता है,
नयी सुबह का नया सूर्य
नवनीत गीत सब गाता है!
विकल हो उठते प्राण जब
ह्रदय ज्वाला धधकती हो,
नए प्रतिमानों के नए छंद ले
कविता नयी जब जगती हो!
तब नवजीवन की राह में
शब्दों की वाणी दिखती है,
संघर्षो की नयी कहानी
नयी जवानी लिखती है !!

आओ छंद छंद जोड़कर कविता
नयी बनाएं हम,
नवयुग में नवगीत सजाकर
पुनः धरा महकाए हम!
अपने अंतर की ज्वाला में
नयी क्रांति का हव्य करें,
ये युग है हम भारतपुत्रो का
आओ यज्ञ हम भव्य करें!
हर आहुत के साथ उभरती
एक नयी कहानी दिखती है
संघर्षो की नयी कहानी
नयी जवानी लिखती है !!

_____सौरभ कुमार दुबे

परिचय - सौरभ कुमार दुबे

मैं, स्वयं का परिचय कैसे दूँ? संसार में स्वयं को जान लेना ही जीवन की सबसे बड़ी क्रांति है, किन्तु भौतिक जगत में मुझे सौरभ कुमार दुबे के नाम से जाना जाता है, कवितायें लिखता हूँ, बचपन की खट्टी मीठी यादों के साथ शब्दों का सफ़र शुरू हुआ जो अबतक निरंतर जारी है, भावना के आँचल में संवेदना की ठंडी हवाओं के बीच शब्दों के पंखों को समेटे से कविता के घोसले में रहना मेरे लिए स्वार्गिक आनंद है, जय विजय पत्रिका वह घरौंदा है जिसने मुझ जैसे चूजे को एक आयाम दिया, लोगों से जुड़ने का, जीवन को और गहराई से समझने का, न केवल साहित्य बल्कि जीवन के हर पहलु पर अपार कोष है जय विजय पत्रिका! मैं एल एल बी का छात्र हूँ, वक्ता हूँ, वाद विवाद प्रतियोगिताओं में स्वयम को परख चुका हूँ, राजनीति विज्ञान की भी पढाई कर रहा हूँ, इसके अतिरिक्त योग पर शोध कर एक "सरल योग दिनचर्या" ई बुक का विमोचन करवा चुका हूँ, साथ ही साथ मेरा ई बुक कविता संग्रह "कांपते अक्षर" भी वर्ष २०१३ में आ चुका है! इसके अतिरिक्त एक शून्य हूँ, शून्य के ही ध्यान में लगा हुआ, रमा हुआ और जीवन के अनुभवों को शब्दों में समेटने का साहस करता मैं... सौरभ कुमार! कविता मेरा जीवन सार मेरी भावना का विस्तार छंद छंद में नयी कल्पना नयी क्रांति हेतु उदगार