संघ के सकारात्मक पहलुओं की अनदेखी! बिके हुए मीडिया की साज़िश?

25 जून की सुबह छपरा के पास हुई राजधानी एक्सप्रेस की दुघर्टना का आंखों-देखा हाल, लगातार दिखाने वाले चैनलों ने उस ट्रेन के सारे यात्रियों को उनके सामान के साथ, लगभग एक किलामीटर दूर लगाई गई, रिलीफ़-ट्रेन तक ले जाने में जुटे कुछ 500 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वाॅलन्टियर्स की कोई भी जानकारी आम जनता को नहीं दी!

जबकि वे लगातार प्रत्यक्ष/ परोक्ष रुप से मोदी सरकार पर रेल किराया बढ़ाने के बाद भी सुरक्षात्मकता में फ़ेल होने की बातें बार-2 दोहरा रहे थे। मानो यह एक महीने पहले आई सरकार ही इस दुर्घटना के हर पहलू के लिए दोषी हो।

रेल विभाग में आपदा-प्रबंधन पर बहुत समय से चर्चाएं तो होती रही हैं, पर कुछ ठोस यदि किया गया होता, तब शायद पीड़ित यात्रियों को और अच्छी व त्वरित सहायता मिल पाती।

यहाँ मुख्य बात हमारे तथाकथित नम्बर वन की होड़ में लगे टीवी चैनलों द्वारा, दुर्घटनाग्रस्त ट्रेन के यात्रियों को उनके सामान के साथ, ट्रैक के दुर्गम मार्ग पर एक किलोमीटर तक ले जाने में संघ के वाूलन्टियर्स द्वारा की गई अत्यन्त महत्वपूर्ण, निस्वार्थ सहायता की हो रही है। जब तक यह बात, मुझे अपनी बेटी से – जो स्वयम् उस हादसे में फंसी थी – पता नहीं चली, मैं बहुत परेशान था, कि रात के अंधेरे में कैसे वह अपनी बेटी के साथ सारे सामान को लेकर जा पाएगी!

जब उसने बताया कि संघ के अनगिनत लोग हर यात्री की मदद के लएि पहले से पूरी ट्रेन के सामने हर यात्री की हर आवश्यक मदद के लिए तत्पर थे, तब तक इस कदाचित मीडिया के दुष्प्रचार-अफ़वाहों के आधार पर बदनाम ‘संघ’ के प्रति मेरी व्यक्तिगत राय नकारात्मक ही थी। मैं भी इन्हें अतिवादी व गांधी जी के हत्यारों के समर्थकों के रुप में ही अस्पश्र्य मानता चला आया था।

परन्तु, अब मुझे आत्मावलोकन करना ही पड़ा। क्या हमने इन्दिरा व राजीव गंा्रधी के हत्यारों के प्रति अपना नज़रिया पहीं बदला है? क्या हम आतंकवादियों को दिग्भ्रमित मानकर, उनके प्रति स्वस्थ-संतुलित दृष्टिकोंण नही अपना रहे हैं? क्या विशेषकर कांग्रेस की घोर भ्रष्टाचारी नीतियों से तंग आकर पूरे राष्ट्र ने इस संघ के प्रत्यक्ष-परोक्ष निदेर्शन वाली सरकार में विश्वास नहीं प्रकट किया है?

यदि इन सारे सवालों के जवाब हां हैं, तब हमे मानना ही पड़ेगा, कि हमारा मीडिया – या उसका बड़ा भाग आज भी केवल सनसनी फैलाने वाली, सरकार की आलोचना करके जनता में हताशा-आक्रोश पैदा करने का राष्ट्र-विरोधी कार्य ही अधिक कर रहा है।

संघ की आलोचना अनुचित नहीं है, परन्तु राक्षस को भी उसका उचित श्रेय तो दिया ही जाना चाहिए! टीवी की सामथ्र्य को देखते हुए, संघ के इस प्रशंसनीय कार्य की अनदेखी को मामूली ग़लती मानना अनुचित होगा। हमें अपने राष्ट्रीय हितो को सुरक्षित रखने के लिए, इन चैनलों के विदेशी-रिमोट-नियन्त्राओं पर कठोर कार्यवाही करनी ही होगी। अन्यथा, वे अपने निहित स्वार्थो के लिए, हमारे दूरगामी हितो के लिए प्रतिबद्ध, मोदी-सरकार के शुरु के कुछ कठोर-आवश्यक कदमों के प्रति भोली-भाली जनता को दिग्भ्रमित करके, उन्हे अपने ही पैरों में कुल्हाढ़ी मारने को उकसाने से बाज़ नहीं आएंगे।

पहले से सचेत रहना, बाद में इलाज करने से कही ज़्यादा अच्छा रहेगा!!