Monthly Archives: June 2014


  • यौन शिक्षा कलंक है

    यौन शिक्षा कलंक है

    यौन शिक्षा पर इधर कई दिनों से टी बी चैनलों पर बहस चल रही है जिसमें कई संभ्रांत महिलाएं भी यौन शिक्षा के पक्ष में अपने तर्क देते हुए देखी जाती हैं। प्रश्न यह उठता  है...

  • कविता 2

    कविता 2

    कविता केवल शब्दों का कुञ्ज नहीं है क्रांति का पुंज है भ्रान्ति का अंत है शांति फिर अनंत है कविता केवल शब्दों का कुञ्ज नहीं है!ये प्राणो की भाषा है हर मन की जिज्ञासा है आशा है अभिलाषा है कविता केवल शब्दों का...

  • कविता 1

    कविता 1

    मन का घट भावना का जल शब्द समूह हो उठा जब विकल तब कविता गूंजी बजे कर्तलध्वनि चहुंओर फैली अविरल सूरज की कविता है प्रकाश जल की कविता केवल प्यासवन की कविता है अंधकार बागों की कविता है विहार पुष्पों...

  • निर्वात

    निर्वात

    सुनो !!तुम्हारी अनुपस्थिति को मैंने महसूस किया बिल्कुल इस तरह जैसे मेरा जीवन “निर्वात” हो,.. कभी कहीं पढ़ा था जब अंतरिक्ष (स्पेस) के किसी आयतन में कोई पदार्थ नहीं होता तो कहा जाता है कि वह आयतन “निर्वात”...


  • पुण्यात्मा

    पुण्यात्मा

    उसने पहले दिन ही बता दिया था अपनी सौतेली माँ को कि ये शादी बाप ने ऐय्याशी के लिए की है, उनके बच्चे पूर्णतः बालिग़ हैं और अपना ख्याल रख सकते हैं। धनेसर वाकई सठिया गया...


  • संवेदना

    संवेदना

    गहरे सिंधु सा गहराता जीवन मन की नौका खाए हिलोरभावुकता की भीषण लहरों में दिखता नहीं आशा का छोर पथ पर जिसने देखें हैं फूल कैसे जाने क्या होते शूल रंग उड़ गया जिसके जीवन का  उसके हाथों रह जाती धूल...

  • मन की कविता

    मन की कविता

    क्या कहें कभी लहरें जैसे उमड़ती हैं सागर में कभी बादल जैसे बिखरते हैं अम्बर में ऐसे ही कोई सैलाब सा उठता है विचारो का मन में कभी आंधी कभी तूफ़ान से शब्द फूट पड़ते हैं...