Monthly Archives: June 2014


  • संवेदना

    संवेदना

    गहरे सिंधु सा गहराता जीवन मन की नौका खाए हिलोरभावुकता की भीषण लहरों में दिखता नहीं आशा का छोर पथ पर जिसने देखें हैं फूल कैसे जाने क्या होते शूल रंग उड़ गया जिसके जीवन का  उसके हाथों रह जाती धूल...

  • मन की कविता

    मन की कविता

    क्या कहें कभी लहरें जैसे उमड़ती हैं सागर में कभी बादल जैसे बिखरते हैं अम्बर में ऐसे ही कोई सैलाब सा उठता है विचारो का मन में कभी आंधी कभी तूफ़ान से शब्द फूट पड़ते हैं...


  • हंसी, हर मर्ज़ की एक दवा है

     ( पहले देखिए  1-शाँति, सबके लिए   और 2- सेहत, सबके लिए  और 3- अमीरी सबके लिए और 4-अपने जीवन को बदलिए, सिर्फ़ एक दिन में) 1. आपका ऑक्सीजन लेवल बढ़ेगा। 2. आपका तनाव घटेगा। 3. आपको शान्ति मिलेगी। 4. आपका इम्यून...

  • गज़ल (बचपन यार अच्छा था)

    गज़ल (बचपन यार अच्छा था)

    गज़ल (बचपन यार अच्छा था) जब हाथों हाथ लेते थे अपने भी पराये भी बचपन यार अच्छा था हँसता मुस्कराता था बारीकी जमाने की, समझने में उम्र गुज़री भोले भाले चेहरे में सयानापन समाता था मिलते...


  • नयी कहानी!!

    नयी कहानी!!

    संघर्षो की नयी कहानी नयी जवानी लिखती है! नए गीत की नयी मालाएं नए शब्दों में दिखती है प्रेरणा पुंज नित नूतन नवोत्साह जगाता है, नयी सुबह का नया सूर्य नवनीत गीत सब गाता है! विकल...


  • इश्क और अधृत!!!

    इश्क और अधृत!!!

    किसी और के चुम्बन ने तुम्हे जानां मैं जानता हूँ रुलाया तो बहुत होगा रो रो कर अपने होंठो से उसके होंठो के निशाँ को तुमने मिटाया तो बहुत होगा आइना जब भी देखती होगी तुम...