कविता

राष्ट्रभाषा हिन्दी के तिरस्कार पर प्रसिद्ध कवि शंकर कुरूप की व्यंग्य कविता

एक बूढ़ी औरत…. राजघाट पर बैठे- बैठे रो रही थी !! ना जाने किसका पाप था जो अपने आंसुओं से धो रही थी !! मैंने पूछा- माँ !! तुम कौन ?? मेरी बात सुन कर वह बहुत देर तक रही मौन !! लेकिन जैसे ही उसने अपना मुह खोला !! लगा दिल्ली का सिंहासन डोला […]

स्वास्थ्य

हंसी, हर मर्ज़ की एक दवा है

 ( पहले देखिए  1-शाँति, सबके लिए   और 2- सेहत, सबके लिए  और 3- अमीरी सबके लिए और 4-अपने जीवन को बदलिए, सिर्फ़ एक दिन में) 1. आपका ऑक्सीजन लेवल बढ़ेगा। 2. आपका तनाव घटेगा। 3. आपको शान्ति मिलेगी। 4. आपका इम्यून सिस्टम मज़बूत होगा। 5. आपके रोग मिट जाएंगे। 6. आपके शोक मिट जाएंगे। 7. आपकी आमदनी और दौलत बढ़ेगी। […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल (बचपन यार अच्छा था)

गज़ल (बचपन यार अच्छा था) जब हाथों हाथ लेते थे अपने भी पराये भी बचपन यार अच्छा था हँसता मुस्कराता था बारीकी जमाने की, समझने में उम्र गुज़री भोले भाले चेहरे में सयानापन समाता था मिलते हाथ हैं लेकिन दिल मिलते नहीं यारों मिलाकर हाथ, पीछे से मुझको मार जाता था सुना है आजकल कि […]

ब्लॉग/परिचर्चा राजनीति सामाजिक

संघ के सकारात्मक पहलुओं की अनदेखी! बिके हुए मीडिया की साज़िश?

25 जून की सुबह छपरा के पास हुई राजधानी एक्सप्रेस की दुघर्टना का आंखों-देखा हाल, लगातार दिखाने वाले चैनलों ने उस ट्रेन के सारे यात्रियों को उनके सामान के साथ, लगभग एक किलामीटर दूर लगाई गई, रिलीफ़-ट्रेन तक ले जाने में जुटे कुछ 500 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वाॅलन्टियर्स की कोई भी जानकारी आम जनता […]

कविता

नयी कहानी!!

संघर्षो की नयी कहानी नयी जवानी लिखती है! नए गीत की नयी मालाएं नए शब्दों में दिखती है प्रेरणा पुंज नित नूतन नवोत्साह जगाता है, नयी सुबह का नया सूर्य नवनीत गीत सब गाता है! विकल हो उठते प्राण जब ह्रदय ज्वाला धधकती हो, नए प्रतिमानों के नए छंद ले कविता नयी जब जगती हो! […]

ब्लॉग/परिचर्चा राजनीति

जनता की उम्मीदों को परवान चढ़ाता मोदी सरकार का एक महीना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी भाजपा-राजग गठबंधन सरकार को एक माह हो गया है। मीडिया में अपनी आदतों के हिसाब से मोदी सरकार के एक माह के कामकाज की समीक्षा हो रही है। सोशल मीडिया व इलेक्टानिक मीडिया में मोदी सरकार की लोकप्रियता को लेकर सर्वे हो रहे हैं। यह एक अच्छी बात […]

कविता

इश्क और अधृत!!!

किसी और के चुम्बन ने तुम्हे जानां मैं जानता हूँ रुलाया तो बहुत होगा रो रो कर अपने होंठो से उसके होंठो के निशाँ को तुमने मिटाया तो बहुत होगा आइना जब भी देखती होगी तुम जानां तुम्हारी आँखे भर सी आती होंगी आईने में खड़े शख्स ने भी फिर जानां तुम्हे रुलाया तो बहुत […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

धर्म/मजहब पर विश्व प्रसिद्ध लोगो के विचार

यूँ तो मजहब के ठेकेदार हमेशा से जनमानस को “ईश्वर” के जाल में फंसा के उनका शोषण करते आये हैं , पर जब किसी ने भी इनके “काल्पनिक” ईश्वर और उसके नाम पर चलने वाले धंधे के शोषण से लोगो को मुक्त करने का प्रयास किया है उसे इन लोगो ने “नास्तिक ” करार दिया […]

लघुकथा

असमंजस

पिता ने अपनी पूरी जिंदगी छोटी दुकान पर गुजारी और वह नहीं चाहते थे कि उनका पुत्र भी इसी तरह अपनी जिंदगी बर्बाद करे। उन्होंने अपने पुत्र को खूब पढ़ाया। पुंत्र कहता था कि ‘पापा, मुझे नौकरी नहीं करनी! पिता कहते थे कि-‘नहीं बेटे! धंधे में न तो इतनी कमाई है न इज्जत। बड़ा धंधा […]

कविता

भूला भटका सा

========== आज दिल कर रहा है कुछ याद करूं अपना ही भूले-भटके हुये गुनाहों को खुद से ही फ़रियाद करू जो गुनाह किये आखिर क्यों किये जो फल भुगता वह किस गुनाह का था कुछ चिंतन करूं कितने बड़े गुनाह की कितनी छोटी सजा मिली कुछ तो था रहम प्रभु का कुछ तो उसको मै […]