कविता विविध

सच्चा हिँदुस्तानी

अधर्मियोँ के विनाश को उठती जो नही जवानी है, उनके रक्तोँ मेँ नहीँ उबाल है केवल ठंडा पानी है, कायर हैँ वो जो अनशन कर कर मरते हैँ जो भारत माँ पर मर मिटता हो सच्चा हिँदूस्तानी है। जो शमशीर उठा चलते हैँ रणभूमि की ओर, जिनके हृदयोँ मेँ है ज्वाला वंदेमातरम नाद विभोर, जिनके […]

कविता

मन वृंदावन मेँ छूट गया।।

मतवाला बनकर चलने वाला अपनी मनमानी करता था। रमने वाला जो विषयोँ मेँ, सुख की खीँचातानी करता था।। कभी एक हो नहीँ बैठता अपनी शाखाएँ फैलाया करता था। मन तो आखिर मन है समझ मिठाई, चूना खाया करता था।। बडा नटखट था ,चंचल था, बडी चपलता करता था। पास न संयम, न संकोच और नही […]

कहानी

हर कदम पर बंदिशें

जाड़ों का समय है सूरज के किरणों ने समुद्र की कोख में जाने का मन बना लिया है. धीरे धीरे वह अगले दिन फिर से आने का संकेत करती हुई चमक (रोशनी) निरंतर कम होती हुई, संतरी और नीले आसमान से गायब हो रही है. हरियाणा के गाँव सुकना के प्रधान के घर आज बड़ी […]

गीतिका/ग़ज़ल

मर हम गए

जब दर्द हद से बढ़ गया, तब मर हम गए. मरहम कहीं जब न मिला, तब मर हम गए. भोर शब होने लगी बसमें नहीं कुछ भी. जब हर कोई गुम हो चला, तब मर हम गए. कोई बचा न हम कदम, कोई भी मुहब्बत. ये दिल बहुत सहता रहा, तब मर हम गए. होते […]

संस्मरण

संस्मरण : हरितालिका तीज की याद

बिहार में भादो के शुक्लपक्ष के तृतीया को हरितालिका तीज मनाते हैं …. इस दिन महिलाएं निर्जल रहकर व्रत करती है …. इस व्रत का पूजन रात्रि भर चलता है … इस दौरान महिलाएं जागरण करती हैं और कथा-पूजन के साथ कीर्तन करती हैं …. पूजन दूसरे दिन सुबह समाप्त होता है तब महिलाएं अपना […]

संस्मरण

संस्मरण : मोह क्षेत्रीयता का

Saturday, 17 December 2011…. बैंगलोर में “ 26th Indian Engineerning Congress “ में शामिल होने पुरे हिन्दुस्तान से Engineers और उनके परिवार , और T.C.S , Isro , malu group , Surya Construction , Consultancy Company etc के guset और Russia , Japan , Lanka , Nepal , korea etc. से delegate – guest आये […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : प्यार की आस

बदले मौसम की तरह चल दिया वो किसी और की तलाश में करता था दावा खुश्बू की तरह बसने की जो हर एक सांस मे पहले कभी काली स्याह रात कटती थी बात बात में अब कटती नहीं रातें बैठी रहती उस बेवफा की आस में जो नहीं आता क्यूँ उसी का इंतजार करता है […]

कहानी

कहानी : बिन बेटियाँ कहाँ बढ़ेगी वंशबेल …

सावित्री अचानक चक्र खाकर गिर पड़ी ! धनपति भागकर बहु को उठाती है और डॉ को बुलाने को दौडती है ! घर के बाहर ही धनपति को इमरती देवी मिल जाती है जो की धनपति की अच्छी सहेली होने के साथ साथ दाई भी है ! गाँव में ऐसा कौन जिसने इमरती देवी के हाथो […]

कहानी

कहानी : दोस्ती

रुकसाना और हेमा दोनों बहुत अच्छी दोस्त थी | दोनों की उम्र ही क्या थी, रुकसाना,दस साल की ,हेमा आठ साल की,पर दोनों मे गहरी दोस्ती थी | पिछले दो साल से, रुखसाना हेमा को ‘ईद, पर सेवइया खिलाती रही है | आज हेमा के घर पर ‘सत्यनारायण भगवान ‘ की कथा रखवाई है | सब […]

उपन्यास अंश

उपन्यास : शान्ति दूत (उन्नीसवीं कड़ी)

कृष्ण पांडवों के साथ अज्ञातवास की घटनाओं पर विचार करने लगे। विराट नगर में पांडव किसी से अधिक सम्पर्क नहीं रखते थे और सामान्यरूप से अपना कार्य करते हुए दिन बिता रहे थे। अर्जुन तो वृहन्नला के रूप में सैरंध्री बनी द्रोपदी को लगभग हर दूसरे-तीसरे दिन देखते रहते थे और कभी कभी उनको युधिष्ठिर […]