कविता

एक खीझ सी उठती है… मन के सरवर मेँ उठता झंझावर

एक खीझ सी उठती है, उन घर के मलबोँ के आगे सूरज खिलता है, सड़ती बस्ती के ऊपर जब चाँद तना मिलता है, बिखरे से घरोँ मेँ जब त्यौहार कोई होता है, मरती कलियोँ के दुक्ख मेँ पेड़ खडा रोता है, एक खीझ सी उठती है… कीचड़ के कोनोँ मेँ विष्ठा तैरती है, समाज के […]

कविता

क्या सुनी आज तुमने चाँद की सिसकियाँ?

क्या सुनी आज तुमने चाँद की सिसकियाँ? आज आर्यावर्त के उत्तरी कोने मेँ चाँद छिपा रो रहा था, बार बार सिसकता, बारिश मेँ ठिठुरता, आँसुओँ का बोझ ढो रहा था, क्या सुनी आज तुमने चाँद की सिसकियाँ? फिर थरथराते बादलोँ के बीच छिपता चाँद, जैसे बचने धरती के कोलाहल से मिल गयी हो मांद, खाक […]

कहानी

पछतावा 

आज पूरी कोलोनी मे आरती का नाम ही सबकी जुबान पर था | पूरी कोलोनी मे आरती ही आरती छाई हुई थी | जैसे सबको टाइम पास का अच्छा-खासा मसाला मिल गया हो | बहुत दिनों से लोग आपस मे काना-फूसी कर रहे थे,पर आज तो ये बात आरती और उसके पति निशांत के कानो […]

हास्य व्यंग्य

तुमहु बी0 ए0 पास किहेव

तुमहूं बीए पास किहेउ, हम हॅू, एम ए पास किहेन। डिग्री लियय के चक्कर मा, कउने काम के नही रहेन।। पढाई करै के पीछे तमाम रूपया, और दिन गवाएं दिहेन – बप्पा कहिन तो जाय कै कागज, पर झिल्ली चढाय दिहेन।। पढाई से अच्छा कट्टा रहै, सौ पच्चास दिनरात कमाईत गाड़ी की कजरी पोंछित तौ, […]

कहानी

कहानी : रोज की तरह

उसकी खौफनाक आँखेँ, जिसकी सफेद परतोँ पर अक्सर लाल रक्त धमनियां दिखती थीँ, अंदर धँसी हुयीँ। जिनका भौहोँ के साथ कोई संबंध नही समझ आता था। उसका रंग साँवला था, उसके बाल अधकटे और बिखरे छोटे छोटे थे मटमैले, वो काले कपडे पहनता था हमेशा और एक लंबा सा कोर्ट। कुछ 30 या 35 साल […]

हास्य व्यंग्य

जूतों की शान

एक ऐसी वस्तु का नाम बताइए जो खाने के भी काम आती है और पहनने के भी? चकरा गए? मैं बतलाता हूँ-जूता। वैसे जूता खाने को लेकर एक बात स्पष्ट कर दूँ कि लोग अपने मन से जूता पहनते ज़रूर हैं पर खाते दूसरों के मन से हैं और कहते हैं कि जूते खाए। कितनी […]

अन्य लेख

एक महाराष्ट्र पुलिस के हवलदार से संवाद

कल पूरे परिवार के साथ घूमने गया था बारिश मे पूरे दिन मज़ा किया लेकिन वहीं पर एक पुलिस वाले अंकल मिले जो हमारे घर के पास वाले इलाके मे भी रहते हैं मैंने पूछा- अंकल जी आपको तो कभी छुट्टी नहीं मिलती तो आज कैसे घूमने आ गए ?? बोले- यार तेरेको पता है […]

राजनीति

एक पाती राहुल बबुआ के नाम

प्रिय राहुल बबुआ, जब से तुम्हारी पार्टी लोकसभा का चुनाव हारी, हम सदमे में चले गये। उत्तराखण्ड में हुए उपचुनाव में तीनों विधान सभा की सीटें कांग्रेस ने जीत ली है। इस खबर से इस मुर्दे में थोड़ी जान आई है। इसीलिये आज बहुत दिनों के बाद एक पाती लिख रहा हूं। बेटा, हिम्मत मत […]

कविता

इण्डिया का इग्लैण्ड बनाय द्याब

जब चुनाव लंगीचे आवत है, मन्दिर मुद्दा उठाय दियत। आजादी वाले दिनन मंे सहीदन की मुरती पोछाय दियत।। जब चुनाव…………………..पोछाय दियत फिर कोउ न उका पूंछत है, कबूतर खाली बतलाय रहे। यह राम की नगरी कहां रही, सत्ता मा आइ कै भुलाय रहे। जब बत्ती मिलत है न्यातन का, जनता के बत्ती लगाय दियत।। जब […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल- ***तुझको याद करूँ मैं***

जब-जब तुझको याद करूँ मैं. तन्हा दिल आबाद करूँ मैं. बंधन है पर चाहत का है, क्यों खुद को आजाद करूँ मैं तेरी प्रिय भाषा में अपने, भावों का अनुवाद करूँ मै. सपनों की दुनिया में अक्सर, तुझसे ही संवाद करूँ मै. जो चाहूँ वो तू दे देता, क्यों कोई फ़रियाद करूँ मैं? तुझको देख […]