उपन्यास अंश

उपन्यास : शान्तिदूत (अठारहवीं कड़ी)

अब कृष्ण पांडवों के अज्ञातवास की अवधि की घटनाओं पर विचार करने लगे। अज्ञातवास का समय पांडवों के वनवास का सबसे कठिन समय था। पूरे एक वर्ष तक उनको इस प्रकार रहना था कि वे पहचान न लिये जायें। अगर पहचान लिये जाते तो उनको फिर 12 वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास […]

कविता

हमनें भी तो पाल के रक्खा है सारे गद्दारों को

नागफनी खा ही जाती है, ऊँचे छायादारों को हमनें भी तो पाल के रक्खा है सारे गद्दारों को अधिक सहन-शक्ति भी कायरता कहलाती है मानव कायर हो जाये तो मानवता मर जाती है पड़े – पड़े जंग लग गई है देखो हथियारों को हमनें भी तो पाल के रक्खा है सारे गद्दारों को वर्णित है […]

कविता

आधा संग्राम

जश्न मनाओ कि हमने दुश्मन को धूल चटाई है जश्न मनाओ आतंकी सेना ने मुँह की खाई है जश्न मनाओ अब तक हमने टेके न घुटने अपने जश्न मनाओ आतंकी न छीन सके सपने अपने गर्व करो कि झेली हमने गोली अपने सीनों पर गर्व करो कि झुके नहीं गोलों-बम-संगीनों पर गर्व करो कि रणवीरों […]

हास्य व्यंग्य

बताओ! वह कौन है?

आज परीक्षा का दिन था। गुरुजी ने प्रश्न किया- ”शिष्यों! बताओ यह कौन है, जो सर्वशक्तिमान है। जिसके समक्ष बडे़-बड़े बलवान घुटने टेक देते हैं। शूरमा, बगलें झाँकने लगते हैं। जो यम और बम, दोनों से भी बड़ा है। न सुई उसे चुभ सकती है न परमाणु बम उसे ध्वस्त कर सकता है। न वायु […]

लघुकथा

खाली पेट…

पिता ईट भट्टे पर मजदूरी करता हुआ दुर्घटना में मारा गया। माँ दुसरे आदमी के साथ भाग गयी। रह गये बरुआ और चनिया अनाथ। बड़ी बहन ने छोटे भाई के भरण पोषण की जिम्मेवारी अपने नन्हे कन्धो पर सहर्ष ले ली। पीठ पीछे भाई को बांध कर उसके नन्हे हाथ लोगो के सामने फैलने लगे। […]

कहानी

कहानी : एक छाया (स्वप्न कथा)

सपने मे मैने देखा एक बहुत खूबसूरत लडकी जिससे मैँ प्यार करता हूँ उसका भाई फिल्म डार्कनाइट के जोकर जैसा है फर्क इतना है कि उसका चेहरा काला था, उसकी आँखेँ गहरी थीँ और वो चीखते हुए हीहीही करके हँसता था। मैँ और वो लडकी एक ही साथ पढते थे। शायद वो मैँ था या […]

कविता

कुछ आत्ममुग्ध बूढ़े

कुछ आत्ममुग्ध बूढ़े कुछ अंधभक्त शिष्याएं बूढों को लगता है कि वो हैं साहित्यिक धरोहर वो लिखते है कुछ भी …..बिना तर्क का ….नकारात्मक और लोगों से मनवाते है उसको सर्वोतम ….और शिष्याएं …..उनको जब कुछ समझ नहीं आता तो वो गर्व से कहतीं है…”आपका ज्ञान मुझ मंदबुद्धि की पहुँच से है बड़ा”बस साहित्य का लक्ष्य हो जाता है पूर्ण  […]

कविता

जो ख़ुद है भूखा–नंगा, उसको भी कश्मीर चाहिए

अपना देश न संभल रहा और नई जागीर चाहिए जो ख़ुद है भूखा–नंगा, उसको भी कश्मीर चाहिए धर्म के नाम पर हुआ जो पैदाअब स्वयं धर्म है …भुगत रहा आतंकी है पर ……ढीठ बड़ा कश्मीर की ..लगा जुगत रहा अपना नाश है कर बैठा, ..उसे नई तकदीर चाहिए जो ख़ुद है भूखा–नंगा, उसको भी कश्मीर चाहिए कितनी बार है मुंह की खाई है […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म ब्लॉग/परिचर्चा

इनका धर्म और उनका धर्म

पिछले दिनों चार प्रमुख घटनायें घटीं-1. उत्तर प्रदेश सरकार ने रमजान का तथाकथित पवित्र महीना शुरू होते ही अनेक मन्दिरों पर से लाउडस्पीकर उतारने की फरमान जारी कर दिया, कारण कि लाउडस्पीकर की आवाज से रोजेदारों का ध्यान भंग होता है। हालांकि उनकी मस्जिदों पर भी लाउडस्पीकर लगे हुए हैं जो पूरी जोर की आवाज में […]

गीतिका/ग़ज़ल

पहली सी वो महब्बत

हुई हो जैसे मुझे फिर से पहली सी वो मुहब्बत उसके तसव्वुर में मेरा आशिकों सा हाल क्यूँ है बस इक दफे उसने मुड़ के देखा मुझे,बस मुस्काई थी वो मेरे सब रफीकों के चेहरे पे फिर मलाल क्यूँ है बस नाम ही तो पूछा था उसका उसके कुचे में जाकर मेरे उसके ताल्लुकात पे […]