Monthly Archives: August 2014


  • औरत का सफर

    औरत का सफर

    सोचती हूं कभी-कभी क्या यही है औरत का सफर , कभी बेटी, कभी बहन, कभी पत्नी, कभी माँ बनकर देती रहे परीक्षा जिंदगी की हर राह, हर मोड़  पर बेटी बन बाप के साए चले, बहन बन...


  • लघु उपन्यास : करवट (तीसरी क़िस्त)

    लघु उपन्यास : करवट (तीसरी क़िस्त)

    अगली सुबह रमुआ को लेकर धनुवा दीवानपुर प्राइमरी पाठशाला पर पहँुचा तो प्रधानाचार्य तिवारी जी से सीधे बात हुई। तिवारी जी ने धनुवा के साथ चपरासी को कक्षा तक छोड़ने के लिए भेजा और धनुवा को वापस घर जाने...

  • लगाव (लघु कहानी)

    लगाव (लघु कहानी)

    “बुढऊ देख रहें हो न हमारे हँसते-खेलते घर की हालत!” कभी यही आशियाना गुलजार हुआ करता था! आज देखो खंडहर में तब्दील हो गया|” “हा बुढिया चारो लड़कों ने तो अपने-अपने आशियाने बगल में ही बना...

  • आॅटिज्म

    आॅटिज्म

    खूब गोल मटोल बच्चा काले घुंघराले बाल चेहरे पर इधर उधर छितराई हुई सी लटें। बड़ी बड़ी आॅंखों में मोटा काजल और माथे पर काला टीका। एक सुन्दर सा बच्चा मेरे सामने है। जी चाहता है...



  • नई राह

    नई राह

    जब भी रीना ने अपनी माली हालत सुधारने के लिए घर से बाहर जाकर कुछ करना चाहा, सास हीरा देवी उसका रास्ता रोक लेती । अब रीना करे तो क्या करे! दो बच्चो और सास को...

  • गीत

    गीत

    हृदय की तरंगो ने गीत गया है खुशियों का पैगाम लिए मनमीत आया है जीवन में बह रही ठंडी हवा सपनो को पंख मिले महकी दुआ मन में उमंगो का शोर छाया है भोर की सरगम...