कविता

हाइकु

1
बहे मवाद
वीरुध हीन भूमि
डाका के बाद ।

2
सोती जिज्ञासा
गर सूर्य सो गया
मृत्य/रोती पिपासा ।

3
आंख में आंसू
रात में ज्यूँ जुगनू
दोनों में ज्योति ।

4
बने छादन
विरोहण झेलती
धान सी नारी ।
== विरोहण = एक स्थान से उखाड़ कर दुसरे स्थान में लगाना

5
भू चौंकी मिल
खाली बूँदें-बुगची
घाती सावन ।

6
घाती सावन
घाऊघप बादल
रोते भू तारे ।

7
भू अम्ब हारे
हवा लपके मेघ
हो जैसे गेंद ।

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*विभा रानी श्रीवास्तव

"शिव का शिवत्व विष को धारण करने में है" शिव हूँ या नहीं हूँ लेकिन माँ हूँ

3 thoughts on “हाइकु

  • विजय कुमार सिंघल

    आपकी हाइकु में बहुत अप्रचलित से शब्द होते हैं। क्य इनकी जगह सरल और प्रचलित शब्द नहीं हो सकते?

    • विभा रानी श्रीवास्तव

      कम शब्दों में नया लिखना है तो नये शब्द ही लेने पड जाते हैं मुझे ….
      जैसे
      घाऊघप = किसी का गुप्त रूप से धन हरण करने वाला = डाकू या चोर बादल के साथ सही होता ?
      विरोहण = एक स्थान से उखाड़ कर दुसरे स्थान में लगाना = यहाँ सरल और प्रचलित शब्द क्या होते ??
      सादर
      आप मार्गदर्शन करने का कष्ट करें ….

      • विजय कुमार सिंघल

        ‘घाऊघप’ की जगह ‘अपहर्ता’ का प्रयोग हो सकता है.
        ‘विरोहण’ की जगह ‘विस्थापन’ का उपयोग किया जा सकता है.

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