गीत

हृदय की तरंगो ने गीत गया है
खुशियों का पैगाम लिए
मनमीत आया है

जीवन में बह रही
ठंडी हवा
सपनो को पंख मिले
महकी दुआ

मन में उमंगो का
शोर छाया है
भोर की सरगम ने  ,मधुर
नवगीत गाया  है।

भूल गए पल भर में
दुख की निशा
पलकों को मिल गयी
नयी दिशा

सुख का मोती नजर में
झिलमिलाया है
हाँ ,रात से ममता  भरा
नवनीत पाया  है।

तुफानो की कश्ती से
डरना नहीं
सागर की मौजों में
खोना नहीं

पूनों के चाँद ने
मुझे बुलाया है
रोम  रोम सुभितियों में
संगीत आया है।
ह्रदय की तरंगो ने गीत गया है।
——- शशि पुरवार

परिचय - शशि पुरवार

नाम --- शशि पुरवार, जन्म तिथि ---- २२ जून १९७३, जन्म स्थान --- इंदौर म. प्र.), शिक्षा ---- स्नातक उपाधि ---- बी. एस. सी.( विज्ञानं ), स्नातकोत्तर उपाधि - एम . ए ( राजनीती शास्त्र ), (देविअहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर ) तीन वर्ष का हानर्स डिप्लोमा इन कंप्यूटर साफ्टवेयर प्रकाशन ------ कई प्रतिष्ठित समाचार पत्र और पत्रिकाओ व साहित्यिक पत्रिकाओ में रचनाए, गीत, लेख, लघुकथा, कविता का प्रकाशन होता रहता है. दैनिक भास्कर, बाबूजी का भारत मित्र, समाज कल्याण पत्रिका, हिमप्रस्थ, साहित्य दस्तक, लोकमत, नारी, गीत गागर, जाग्रति, वीणा, अविराम, हाइकु लोक, अभिनव इमरोज, दैनिक जागरण, निर्झर टाइम्स, दरभंगा टाइम्स, रूबरू दुनियां, उदंती, उत्तर प्रदेश सरकार - लखनऊ, हरिगंधा, हिंदी चेतना, युग गरिमा, उत्कर्ष प्रकाशन, मधुरिमा, विधान केसरी, ........आदि .अनगिनत पत्र व पत्रिकाओ में प्रकाशन . अंतर्जाल पर कई पत्रिकाओ में नियमित प्रकाशन होता है . हिंदी हाइकु , अनुभूति , त्रिवेणी , कविमन ,परिकल्पना,प्रयास पत्रिका, सहज साहित्य, साहित्य शिप्ली, गद्य कोष पर भी रचनाएँ पढ़ी जा सकती है.