मोदी सरकार के सौ दिनोें से बंधी नयी उम्मीदें

16 मई 2014 को पूर्ण बहुमत के साथ चुनी गयी भाजपा के नेतृत्व में राजग गठबंधन की सरकार अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में अपने प्रथम सौ दिन पूरे करने जा रही है। देश के विगत 30 वर्षों के राजनैतिक इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि केंद्र में एक ऐसी सरकार बनी है जो वंशवाद की छाया से कोसों दूर है।

चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 67 साल के शासन के मुकाबले 60 माह का नारा दिया था तथा ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अब सरकार अपने वायदों को पूरा करने के लिए चल पड़ी है। नरेंद्र मोदी की सरकार ने भले ही अभी कोई बहुत बड़ा फैसला नहीं लिया हो लेकिन उनके द्वारा जो छोटे-छोटे कदम उठायें जा रहे है वे ही मील का पत्थर साबित होने जा रहे हैं। मोदी सरकार की कार्यशैली में देश की आम जनता, युवावर्ग व आर्थिक क्षेत्र में एक नये उत्साह का संचार हुआ है। राजनैतिक नैतिकता के दृष्टिकोण से मात्र तीन माह में ही किसी सरकार के कामकाज व उसके प्रभाव का आंकलन नहीं किया जा सकता है। बहुमत वाली सरकारों से अपेक्षायें व उम्मीदें होना स्वाभाविक तो हैं लेकिन कुछ धैर्य रखकर परिणामों का असर भी देखना चाहिये। मोदी सरकार को पूरे पांच साल काम करने का अधिकार मिला है तथा आशा की जानी चाहिये उनके नेतृत्व में अब भारत में गरीबी दूर होगी, डिजिटल क्रांति होगी तथा विदेशी व स्वदेशी पूंजी निवेशकों में चिंता व भय का वातावरण दूर होकर विकास की नयी गाथा प्रारम्भ हो जायेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व उनकी टीम अब पूरे जोश व नये उत्साह के साथ अपने काम में व जनहित के निर्णय लेने में जुट गई है। जब सरकार निर्णय लेगी तो विरोधीदल अपनी भड़ास तो निकालेंगे ही तथा बयानबाजियां होंगी ही। सरकार के कामकाज का आंकलन करने के लिए सभी टी वी चैनल एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी व सरकार की लोकप्रियता का कार्ड तैयार करनें मे जुट गये हैं। यह वही तथाकथित मीडिया है जो चुनावों के दौरान राजग को बहुमत से काफी दूर दिखा रहा था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व सरकार अब पुरानी सरकारों की अधिकांश नीतियों को बदलने में जुट गयी हैं । पहली बार देश को एक ऐसा मंत्रिमंडल मिला है जो अपने कामकाज के आधार पर अपने प्रधानमंत्री के दिशानिर्देशों के अनुरूप खरा उतरना चाह रहा है। चाहे वह नितिन गडकरी हों, प्रकाश, जावड़ेकर या फिर उमा भारती, स्मृति ईरानी,श्रीमती मेनका गांधी आदि सभी अपनी छाप छोड़ने में कामयाब हो रहे हैं तथा अपने मंत्रालयों में तेज फैसले रहे हैं। जिनका असर दिखाई भी पड़ रहा है व दिखेगा भी। विदेश, रक्षा व आर्थिक मामलों से सम्ंबिधत सभी मंत्रालयों में अब फाइलें तेजी से घूमने लग गयी हैं। जिससे इंडिया इंक तो खुश हुआ ही है साथ ही तीन माह में पहली बार आर्थिक विकास दर 5.7 रही जो कि बीते ढाई साल में सबसे ऊॅचे स्तर पर रही।

चालू वित्त वर्ष में विकास दर तो बढ़ी ही है साथ ही इससे अच्छी बात यह हुई है कि निवेश का पहिया भी घूमना शुरू हो गया है। पहली तिमाही में निवेश बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद( जीडीपी) बढ़कर 32.7 प्रतिशत हो गया है। भारतीय अर्थव्यवस्था के गति पकड़ने से उद्योग जगत में भी उत्साह का नया संचार हुआ है। अपनी प्रथम जापान यात्रा से पहले प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने कहाकि अर्थव्यवस्था मुश्किल दौर से निकल चुकी है। जल्द ही वह नई ऊंचाईयों को छुएगी। उन्होनें विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया को तेज करने के भी संकेत दिये हैं। वित्त एवं रक्षा मंत्री अरूण जेटली ने सरकार के सौ दिन पूरे होने पर अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए दावा किया कि अर्थव्यवस्था पटरी पर आरही है तथा महंगाई पर कुछ कमी दिख रही है तथा निवेशकों का भारत के प्रति विश्वास फिर से लौटा है। हालांकि सूखे के कारण समस्या हो सकती है लेकिन इससे निपटने के लिए अनाज का पर्याप्त भंडार है। मोदी सरकार के सभी मंत्रालय अब तेज निर्णय ले रहे है। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने राजनीति व सुस्त प्रक्रिया के लपेटे में फंसी कई परियोजनाओं को मंजूरी दिलवाने में कामयाब रहे हैं। सरकार ने रामसेतु न तोड़ने का ऐलान तो कर ही दिया है साथ ही सेतुसमुद्रम परियोजना की पूर्ति के लिए नया मार्ग भी सुझा दिया है।

इसी प्रकार सरकार अब गांवों व सभी स्कूलों विद्यालयों में शौचालयों के निर्माण व उनकी सेटेलाइट निगरानी पर भी कमर कस रही है। रेलमंत्री सदानंद गौड़ा प्रधानमंत्री के सपने को पूरा करने के लिए रेलवे का कायाकल्प करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। रेलवे के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं जिन्हें समय से पूरा करना आसान तो नहीं लेकिन निर्धारित समय सीमा के अंदर यदि बजट में निर्धारित किये गये लक्ष्योें को मंत्रालय पूरा करने लग जाता है तो यह भी एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। यदि मंत्रालयों के स्तर पर देश की सभी विकास योजनायें अपने निर्धारित समय पर पूरी होने लगें तो देश का कायाकल्प हो जायेगा।

पयार्वरण ,पर्यटन,स्वच्छता अभियान के प्रति सरकार सवंदेनशील व गम्भीर दिखाई पड़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2014 को बहुत ही भावनात्मक व प्रेरक भाषण दिया उस भाषण के बाद प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता में वृद्धि हुई है। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने बहुत छोटे-छोटे लेकिन दिल को छू लेने वाले मुददे उठाये। मोदी सरकार के निर्णयों में सर्वाधिक चर्चा में रहा वंशवाद के खिलाफ मुहिम। साथ ही सरकार ने सभी मंत्रियों व सरकारी कर्मचारियों से उनकी संपत्ति का विवरण भी मांग लिया है जो कि किसी सरकार ने अभी तक नहीं किया है। हालांकि इसमें सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों को छूट प्रदन कर दी गयी है। सरकार के कामकाज में सबसे बड़ा बदलाव यह दिखलाई पड़ रहा है कि अब सरकारी अधिकारी समय पर कार्यालयों में पहुंचने लग गये हैें। साथ ही न्यायालयो मंे चल रहे नेताआंे व अधिकारियों के खिलाफ विभिन्न मामलों में तेजी दिखलाई पड़ रही है। आशा की जानी चाहिये कि अदालतों में अब कोई भ्रष्टाचारी आसानी से बचकर नहीं निकल सकेगा। कार्यसंस्कृति में बदलाव अवश्य आ रहा है।

मोदी सरकार का पहला बजट सत्र अच्छा रहा। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन की कार्यशैली से संसद की गरिमा एक बार फिर वापस पटरी पर आ रही है। हालांकि अपनी पराजय को न स्वीकारने वाला विपक्ष राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण सरकार को दबाव में लेने की कोशिश कर रहा है लेकिन उसे तो अपने प्रयासों में फिलहाल निराशा ही हाथ लगी है।नेता विपक्ष के लिए कांग्रेस को सुप्रीम अदालत की शरण में जाना पड़ रहा है। जिन विरोधी दलों ने 67 सालों में संवैधानिक नैतिकता को ताक पर रख दिया वे ही लोग मोदी सरकार को बारबार नैतिकता की दुहाई दे रहे हैं।जब महंगाई पर बात नहीं बनी तो विरोधी दल मोदी सरकार को तानाशाह करार दे रहे हैं तथा सरकार बनने के बाद सांप्रदायिकता बढ़ने के आरोप लगा लगा रहे हैं। जबकि जहां -जहां सांप्रदायिक वारदातें हो रहें गैर भाजपादलों का गठबंधन है।

मोदी सरकार बनने के बाद सबसे बड़ा परिवर्तन यह हुआ है कि रमजान के महीने में प्रधानमंत्री मोदी व सरकार के किसी भी मंत्री, सांसद ने रोजा इफ्तार की पार्टी दी और नहीं कोई किसी दरगाह पर अभी तक चादर चढ़ाने गया है । जिसके कारण तथाकथित मुस्लिम परस्त नेता मोदी से चिढ़ गये हैं तथा मोदी को बदनाम करने के अभियान में जुट गये हैं। अभी भी जनता को उम्मीद ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि मोदी के नेतृत्व में भारत एक विश्व में नई ताकत के रूप में उभर कर सामने आयेगा।