Monthly Archives: August 2014

  • रंग बदलती दुनिया

    रंग बदलती दुनिया

    रंग बदलती दुनिया सपनीली दुनिया मेँ यारों सपनें खूब मचलते देखे रंग बदलती दुनिया देखी ,खुद को रंग बदलते देखा सुबिधाभोगी को तो मैनें एक जगह पर जमते देख़ा भूखों और गरीबोँ को तो दर दर मैनें चलते देखा...

  • दो मुक्तक

    दो मुक्तक

    हो गम की रात, आँखों ही आँखों में गुज़र जाने दो दर्द के दरिया को अपनी हद से गुजर जाने दो दिया उम्मीद का जीवन में सदा जलाए रखना बेरहम वक्त का भयावह तूफ़ान तो थम...


  • सुख का अधिकार 

    सुख का अधिकार 

    हथेली खुरदरी, वज़न कम नहीं उठाती, पर न उठा सके । आँखें धँसीं, वेदना से भरी झेलती, पर न झेल सके । निगाहें सूखीं, ख्वाहिशें बसीं हज़ारों कोशिशें, पर जैसे-तैसे । जीवन है संघर्ष। लड़ती लड़ती,...