कविता

नयी रातें

हो चली अब पुरानी बातें नया जमाना नयी हैं रातें सोचो जरा— उनका क्या होगा? जो करते थे केवल गरीब की बातें, भूखी रखते थे गरीब की आंतें पुँजीवाद की बेबजह बुराई करना लोंगों को रोजगार ना देना समाजवाद की केवल बातें करना गरीबी की गरीबी दूर ना करना केवल गरीबों की भावनाओं से खेलना […]

कविता

हाइकु

1 श्रद्धा व आस प्रतिमा बने मूर्ति आन बसे माँ। 2 त्रिदेवी शक्ति विरिंच भी माने माँ जग निहाल। 3 तैर ना सकी बुझी निशा की साँस उषा की झील। 4 पिस ही गई माँ दो बेटों के बीच ठन ही गई। 5 क्रीड़क चवा(चारो ओर से बहने वाली हवा) ढूंढे गुलों का वन फैलाने […]

गीतिका/ग़ज़ल

हाँ मुझे दर्द होता है.

हाँ मुझे दर्द होता है. मैं जब भी खुद से तेरे बारे में कुछ जिक्र करता हूँ हाँ मुझे दर्द होता है. हाँ मुझे दर्द होता है मैं जब भी सांस लेता हूँ हाँ मुझे दर्द होता है. वो छत भी याद है मुझको, पतंगे उड़ती हुईं खतों में जब तेरे, मैं खुद को ढूंढता […]

उपन्यास अंश

उपन्यास : शान्ति दूत (पचासवीं कड़ी)

‘भगवन्, क्या आप जानते हैं कि मेरी माता कौन हैं?’ कर्ण ने कृष्ण की आंखों में देखकर यह सीधा प्रश्न पूछा। ‘हाँ!’ कृष्ण ने संक्षिप्त उत्तर दिया। ‘क्या वे जीवित हैं?’ कर्ण की जिज्ञासा बढ़ गयी। ‘हाँ!’ कृष्ण ने फिर स्वीकृति में अपना सिर हिलाया। ‘केशव! आप इतने विश्वास से कैसे कह सकते हैं कि […]

कविता

सफेद बाल…

आज जब खुद को देखा आईने में तो सकपका सी गई आंखे चौंधिया गई दिल का धङकना जैसे थम सा गया एकटक..पल पल बस खुद को ही निहार रही थी खुद पर विश्वास भी कहाँ हो रहा था पर जिंदगी की इस कङवी सच्चाई को मुझे जबरदस्ती के एक घूंट की तरह पीना ही था […]

लघुकथा

शौक

कृष्ण बचपन में पढने के साथ-साथ मूर्तिकला में भी निपुण था | उसके मम्मी-पापा उसके इस शौक को पढाई में बाधा मानते थे | लेकिन जब स्कूल में मूर्तिकला की प्रतियोगिता जो कि जिला स्तर की थी, उसमे कृष्ण ने भाग लिया और उसकी बनाई राधा कृष्ण की मूर्ति ने प्रथम स्थान पाया | स्कूल […]

कविता

पितृपक्ष

हुआ खत्म पितृपक्ष अब नवरात्री आई है कर पित्रों की पूजा माता की बारी आई है पितृपक्ष में खिला ब्राह्मणों को सोचते कमाया पुण्य है नवरात्री में सजाकर मंदिर खिलाकर लंगर लोगों को दिखाया अपना धर्म है पर जो जीते जी माँ-बाप की कर के अवहेलना उन्हें दुत्कारते हैं क्या सच में श्राद्ध कर उन्हीं […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

हमारे थोथे आदर्श

अधिकतर लोगो की शिकायत रहती है की मैं धर्म या भगवान् को लेके नकारात्मक विचार रखता हूँ, जिन्हें अधिकतर लोग भगवान् मान के उनके आदर्शो गुण गाते हैं उनके बनाये आदर्शो पर चलने की प्रेरणा लेते है मैं उन्ही के आदर्शो को नकारता हूँ। यह सही भी है, मैं ऐसे आदर्शो को अपना आदर्श बनाने […]

उपन्यास अंश

उपन्यास : शान्ति दूत (उनचासवीं कड़ी)

प्रातः नित्य क्रियाओं से निवृत्त होकर कृष्ण ने कुंती और विदुर पत्नी से विदा ली तथा अपने साथी सात्यकि के पास अतिथि भवन में पहुँच गये। सात्यकि भी तब तक नित्य क्रियाओं से निवृत्त हो चुका था। वह कृष्ण की प्रतीक्षा ही कर रहा था। कृष्ण को देखते ही सात्यकि ने प्रश्नवाचक नेत्रों से उनकी […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

दुर्गा पूजा से किसको होता है वास्तविक लाभ?

इन दिनों नव रात्रे चल रहे हैं ,नवरात्रे मुख्य रूप से दुर्गापूजा का पर्व है जिसमें दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दुर्गा पूजा की कहानी यह है की देवी दुर्गा ने शक्तिशाली असुर राजा महिषासुर का वध किया था । इस कहानी को के पात्र महिषासुर को लेके पिछले कई सालो […]