कविता

~मेरे कृष्ण कन्हैया~

ना कोख में पाला ना ही जन्म दिया ,
कृष्णा तुने यशोदा को माँ का मान दिया |

हर नटखट बाल शरारत को करके,
माँ यशोदा को तुने निढाल किया |

माँगा चाँद खिलौना, नहीं खाया माखन जताया,
खाकर मिट्टी मुख में ही सारा ब्रह्माण्ड दिखाया |

फोड़ी मटकी गोपियों की, की माखन चोरी ,
बन के भोला-भाला गया ओखली बंध डोरी|

वात्सल्यमयी माँ बना तुने, किया तृप्त यशोदा को,
ना जाने किस जन्म के फल पाप का दिया देवकी को |

कोख में पाला कष्ट सह जन्म दिया जिसने,
वंचित रखा क्यों अपनी अठखेलियों से तूने|

यशोदा को तुने सारा-का-सारा प्यार दिया ,
तरसती रही रही कुढ़ती देवकी बस कन्हैया|

कोख में पाला कृष्णा जन्म जिसने तुझको दिया,
तेरे बाल रूप दरश को वही रही तरसती कन्हैया |

||सविता मिश्रा ||

परिचय - सविता मिश्रा

श्रीमती हीरा देवी और पिता श्री शेषमणि तिवारी की चार बेटो में अकेली बिटिया हैं हम | पिता की पुलिस की नौकरी के कारन बंजारों की तरह भटकना पड़ा | अंत में इलाहाबाद में स्थायी निवास बना | अब वर्तमान में आगरा में अपना पड़ाव हैं क्योकि पति देवेन्द्र नाथ मिश्र भी उसी विभाग से सम्बध्द हैं | हम साधारण गृहणी हैं जो मन में भाव घुमड़ते है उन्हें कलम बद्द्ध कर लेते है| क्योकि वह विचार जब तक बोले, लिखे ना दिमाग में उथलपुथल मचाते रहते हैं | बस कह लीजिये लिखना हमारा शौक है| जहाँ तक याद है कक्षा ६-७ से लिखना आरम्भ हुआ ...पर शादी के बाद पति के कहने पर सारे ढूढ कर एक डायरी में लिखे | बीच में दस साल लगभग लिखना छोड़ भी दिए थे क्योकि बच्चे और पति में ही समय खो सा गया था | पहली कविता पति जहाँ नौकरी करते थे वहीं की पत्रिका में छपी| छपने पर लगा सच में कलम चलती है तो थोड़ा और लिखने के प्रति सचेत हो गये थे| दूबारा लेखनी पकड़ने में सबसे बड़ा योगदान फेसबुक का हैं| फिर यहाँ कई पत्रिका -बेब पत्रिका अंजुम, करुणावती, युवा सुघोष, इण्डिया हेल्पलाइन, मनमीत, रचनाकार और अवधि समाचार में छपा....|

3 thoughts on “~मेरे कृष्ण कन्हैया~

  1. बहुत खूबसूरत , आगे भी इंतज़ार रहेगा .

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