Monthly Archives: September 2014

  • कविता : मर्यादा

    कविता : मर्यादा

    ‘तुमसे प्यार करता हूँ “रोज रोज यह कहने से क्या फ़ायदा मेरे मौन को समझती हो तुम मेरे शब्दो से ज़्यादा पर मन कहता हैं  प्रेम ग्रन्थ के अंतर्गत शायद हो यह नियम भी बाक़ायदा सूर्य मुखी सी मेरी ओर घुम...

  • यादें

    यादें

    मेरे लिए तो हर दिन त्यौहार होता था ,जब तक मेरी माँ जीवित रहीं ….. छोटा – बडा कोई पर्व हो तो मेरे लिए नये कपडे बनते थे ….. और वो कपड़े मेरी माँ ही सिलती...

  • अकेला आदमी

    अकेला आदमी

    अकेला आदमी अधुनातन लम्हो में स्वतः ही खनकती हंसी को टटोलता अकेला आदमी . लोलुपता की चाह में बिखर गए रिश्ते छोड़ अपनी रहगुजर फलक में उड़ चला आदमी . उपलब्धियो के शीशमहल में सुभिताओं से...



  • कविता

    कविता

    सोने की चिड़िया वाला भारत आप भी देंखे, हम भी देंखे सबको कैसा लगता है , सोने की चिडिया वाला भारत क्या अब भी वैसा लगता है? वो भारत जिसमे भगवानो ने लिया था स्थान ,...


  • ग़ज़ल : उल्फ़त

    ग़ज़ल : उल्फ़त

    उल्फत का ज़माने में यही दस्तूर देखा हर किसी को चाहत में मजबूर देखा आँखें बयां करती हैं उनके इश्क की इंतहां अश्कों के आजाब में आँखों को भरपूर देखा दिखता नहीं यहां कोई होश-ओ-हवास में...

  • खुशियों का अंबार

    खुशियों का अंबार

    मेरे भाई अरविन्द कुमार की एक अन्य कविता आकाश मे सूर्य प्रज्वलित रहे हमेशा पूरी तीव्रता के साथ, ताप और रोशनी दे हर दिन – हर पल एक समान , सूर्य करे न किसी से भेद-भाव,...

  • इंतज़ार बाक़ी है

    इंतज़ार बाक़ी है

    इंतज़ार… इंतज़ार इंतज़ार बाक़ी है. तुझे मिलने की ललक और खुमार बाक़ी है. यूँ तो बीती हैं सदियाँ तेरी झलक पाए हुए. जो होने को था वो ही करार बाक़ी है.   खाने को दौड़ रहा...