Monthly Archives: October 2014

  • झरोखा

    झरोखा

      तुमने समझा हवा का वो एक तेज झोका था तुम्हारे बालो को छूने का वो एक मौका था कमरे मे सन्नाटा सा पसर गया था तुमने न जाने तब क्या क्या सोचा था खिड़कियो की...

  • मुलायम रेत

    मुलायम रेत

      चाँद डूबने के बाद सूरज उगने से पहले भोर की पहली आत्मीय किरण से स्वागत में तू कुछ कह ले सूरज डूबने के बाद चाँद उगने से पहले सांझ की आखरी लौटती किरण की बिदाई...



  • भरोसा

    एक पुराने खंडहर में एक कबूतर और एक कबूतरी रहते थे , दोनों में बङा प्यार ,बङी समझदारी ? वाकी जोङे जो थे उन्हे बङा जलन होती देख के ! दोनों के बीच समझौता था …..कि...




  • चितचोर

    चितचोर

      अंतरिक्ष के हाथो से छूट गयी है आकाश में डोर कटी पतंग सा उड़ रहा हूँ मैं न जाने किस छोर अपनी अंजुरी में भर लेता हूँ चाँद सितारों को मिटा देती है उसे लहरो...