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वैदिक साधन आश्रम, तपोवन विद्या निकेतन का वार्षिकोत्सव सम्पन्न

देहरादून 7 अक्तूबर। मनुष्य अपनी सुरक्षा के लिए जिस प्रकार घर बनाता है उसी प्रकार बच्चे के जीवन की सुरक्षा के लिए माता-पिता तथा शिक्षक उसे अच्छे संस्कार देते हैं। यह विचार वैदिक साधन आश्रम, तपोवन, देहरादून के 5 दिवसीय वार्षिकोत्सव के प्रथम दिवस आज प्रातःकालीन सत्र में वाराणसी से पधारी पाणिनी कन्या महाविद्यालय, वाराणसी की आचार्या सुश्री प्रियंका शास्त्री ने व्यक्त किए। विदुषी वक्ता ने जीवन निर्माण की चर्चा के प्रसंग में वेदों के शब्दों ‘मनुर्भव’ का उल्लेख कर कहा कि हमें वेदों में कहे गये गुणों को धारण करके मनुष्य बनना है। आपने आगे कहा कि ईश्वर से प्राप्त चार वेदों में ज्ञान, कर्म व उपासना के अन्तर्गत जीवन व्यतीत करने का पूरा विस्तृत ज्ञान है जिससे जीवन सफलता को प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि हमारे अन्दर काम, क्रोध, लोभ व मोह आदि आन्तरिक शत्रु बैठे हैं जिनका निराकरण वेदाध्ययन करने से होता है। विदुषी देवी ने आगे कहा कि हम वेदाध्ययन इस लिए करते हैं क्योंकि इससे हमें सद्-कर्मों को करने की प्रेरणा और शिक्षा मिलती है। आगे उन्होंने कहा कि वेदाध्ययन करने से अध्येता को ईश्वर की कृपा का अहसास होता है, ऐसा मनुष्य जीवन में भटकता नहीं है। विदुषी उपदेशिका ने कहा कि वेद हमें बताता है कि हमारे जीवन का लक्ष्य ‘‘मोक्ष’’ है जिसकी हमें तलाश है। उन्होंने कहा कि मोक्ष प्राप्ति के साधन भी हमें वेदाध्ययन से ही ज्ञात होते हैं।

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आचार्या प्रियंका शास्त्री के प्रवचन से पूर्व आर्य जगत के प्रसिद्ध भजनोपदेशक श्री सत्यपाल सरल ने अनेक भजनों व उपदेश से श्रद्धालुओं को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि जिस मनुष्य को सुख की इच्छा है, उसे यज्ञ, अग्निहोत्र या हवन नित्यप्रति करना चाहिये। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी का स्वामी विष्णु है और यज्ञ का एक नाम भी विष्णु है। विद्वान वक्ता ने कहा कि यज्ञ से धन की प्राप्ति होती है। उन्होंने यज्ञ को अपरिहार्य बताते हुए कहा कि यदि यज्ञ नहीं करेगें तो बच्चों को अच्छे संस्कार नहीं मिलेगें जिस कारण माता-पिता को भावी जीवन में पछताना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों में यज्ञ नहीं होता उनके बच्चे भटक जाते हैं। उन्होंने एक अत्यन्त भावपूर्ण भजन गाया जिसके बोल थे – ‘‘यज्ञ में जीवन सफल जो कर गये, वे अगम संसार सागर से तर गये। यज्ञ करने से बढ़े सुख सम्पदा, शान्ति सुख के खजाने भर गये। स्वस्थ और निरोग तन मन बन गया, पाप रूपी पाप सारे झड़ गये।।’’ श्री सत्यपाल सरल ने कोटा के एक तपेदिक के रोगी की घटना सुनाई और बताया कि उसका तपेदिक यज्ञ करने से ठीक हो गया। अब वह व्यक्ति पूर्ण स्वस्थ है। विद्वान वक्ता ने भोपाल गैस त्ऱासदी की चर्चा कर बताया कि वहां रहने वाला एक आर्यसमाजी कौशल परिवार प्रतिदिन यज्ञ करता था। उस यज्ञ के वायु मण्डलीय प्रभाव से उसके सब सदस्य बच गये। विद्वान वक्ता ने यह भी बताया कि वेद विद्या का प्रचार और प्रसार ही सबसे बड़ा दान है। इससे दान देने व दान लेने वाले दोनों का कल्याण होता है। विद्वान वक्ता ने श्रोताओं को कहा कि देवता दो प्रकार के होते हैं, एक चेतन देव होते और दूसरे जड़ देवता होते हैं। माता-पिता-आचार्य-विद्वान संन्यासी-गोमाता व घर के वृद्ध सदस्य सभी चेतन देवता हैं, इनकी जितनी भी सेवा करें उतनी ही उत्तम है। इससे आयु, विद्या, यश और बल की प्राप्ति होने के साथ इन सम्पत्तियों में वृद्धि होती है। जड़ देवता सूर्य, चन्द्र, पृथिवी, नक्षत्र, अग्नि, वायु, जल और आकाश आदि हैं। इनका ज्ञान प्राप्त कर इनसे लाभ लेना ही इनकी पूजा है। विद्वान वक्ता के उपदेश और भजन सुन कर श्रद्धालु गद्गद हो गये।

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आयोजन में पाणिनी कन्या महाविद्यालय, वाराणसी से पधारी ब्रह्मचारिणियों ने एक समवेत प्रभावशाली गीत प्रस्तुत किया जिसके बोल थे- ‘‘ज्ञान का सागर चार वेद यह वाणी है भगवान की, इससे मिलती सब सामग्री जीवन के कल्याण की।’’ इस भजन को भी श्रोताओं ने अत्यन्त पसन्द किया और समाप्ति पर करतल ध्वनि कर गायिका पुत्रियों को प्रोत्साहित किया। आयोजन का कुशल संचालन श्री उत्तम मुनि जी ने योग्यतापूर्वक किया। आज आरम्भ 5 दिवसीय शरदुत्सव के प्रथम दिवस प्रातःकाल आश्रम के संरक्षक स्वामी दिव्यानन्द सरस्वती के निर्देशन में साधको को योग साधना का प्रशिक्षण दिया गया। उसके बाद वेद मन्त्रों से मुख्य यज्ञशाला एवं अनेक यज्ञ-कुण्डों में यज्ञ सम्पन्न किया गया। अनन्तर ‘‘ओ३म्’’ ध्वज का आरोहण किया गया और सभी ने मिलकर वेद राष्ट्रªगान का उच्चारण पूर्ण श्रद्धा से किया।

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वैदिक साधन आश्रम तपोवन के परिसर में आज तपोवन विद्या निकेतन जूनियर हाई स्कूल, नालापानी का वार्षिकोत्सव भी हर्षोल्लास से मनाया गया जिसके मुख्य अतिथि श्री चन्द्रगुप्त विक्रम, देहरादून थे एवं वह सपत्नीक आयोजन में पधारे थे। कार्यक्रम का आरम्भ मुख्य अतिथि के स्वागत एवं माल्यार्पण द्वारा किया गया। आरम्भ में मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्जवलन किया तदोपरान्त, विद्यालय की एक छात्रा द्वारा सरस्वती वन्दना को मधुर ध्वनि से गाकर प्रस्तुति दी गई। स्वागत गान विद्यालय की छात्राओं ने मिलकर मधुर कण्ठ से गाकर प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया। इसके बाद विद्यालय की योग्य प्रधानाचार्य श्रीमति उषा नेगी ने अपने सम्बोधन में मुख्य अतिथि सहित सभी आगन्तुकों का स्वागत एवं धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि बच्चों की नैतिक, मानसिक तथा आत्मिक उन्नति करना शिक्षा का उद्देश्य है। बच्चों की अनेक टोलियों ने उनके सम्बोधन के बाद आकर्षक रूप से लेजियम नृत्य प्रस्तुत किया जो अत्यन्त लुभावना था। इसी मध्य आश्रम के महासचिव ई. श्री प्रेमप्रकाश शर्मा ने आश्रम एवं विद्यालय की प्रगति से लोगों को अवगत कराया और इस कार्य में सहयोग करने वाले सभी महानुभावों का धन्यवाद किया और मुख्य अतिथि का स्वागत किया। आपने विद्यालय की स्थापना में सहयोग करने वाले श्री देवेन्द्र रेहनुवाल एवं श्री देवदत्त बाली का तथा विद्यालय के भवन निर्माण में सहयोग करने वाले माननीय मुंजाल व रहेजा परिवार का भी धन्यवाद पूर्वक स्मरण किया। स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमति उषा नेगी के कार्यों की उन्होंने भूरिशः प्रशंसा की।

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आयोजन में विद्यार्थियों द्वारा अनेक प्रस्तुतियां दी गईं। कुछ प्रस्तुतियां थीं – गायत्री मन्त्र का हिन्दी पद्यानुवाद सहित सामूहिक पाठ, बच्चों द्वारा हिन्दी कविताओं की सराहनीय प्रस्तुतियां, विद्यालय की छोटी व बड़ी कक्षाओं की छात्राओं द्वारा अनेक प्रकार के एकल व सामूहिक नृत्य, भगवान बुद्ध के जीवन से संबंधित अंहिसा की शिक्षा देने वाला प्रभावपूर्ण नाटक, कव्वाली आदि। 2 से 4 वर्ष की आयु के 16 छोटे बच्चों ने ‘‘लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा’’ गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया। इतने छोटे बच्चों द्वारा दी गई यह कमाल की प्रस्तुति थी जिसकी जितनी प्रशंसा की जाये कम होगी। यह बच्चे आकर्षक वेश-भूषायें पहने हुए बहुत सुन्दर, भव्य व चित्ताकर्षक लग रहे थे। प्रस्तुति की समाप्ति पर मुख्य अतिथि एवं आश्रम के अधिकारीगणों मुख्यतः प्रधान श्री दर्शन कुमार अग्निहोत्री, महामंत्री श्री प्रेम प्रकाश शर्मा, श्री मंजीत सिंह आदि ने मिलकर विद्यालय की सभी कक्षाओं में प्रथम, द्वितीय व तृतीय आने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। विद्यालय के शैक्षिक एवं अन्य कर्मचारियों तथा सहयोगियों की सेवाओं की सराहना के साथ उन्हें भी स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। अन्त में आयोजन के मुख्य अतिथि श्री चन्द्र गुप्त विक्रम का उद्बोधन हुआ जिसमें उन्होंने बच्चों को सुन्दर व प्रभावशाली प्रस्तुतियां देने के लिए उन्हें व उनके शिक्षकों और प्रशिक्षकों को साधुवाद दिया और उनकी प्रशंसा की। उन्होंने आज मनाई जाने वाली बाल्मिीकी जयन्ती, पूर्णिमा, चन्द्र ग्रहण एवं सेवा दिवस की चर्चा कर इनके महत्व के साथ अनेक विषयों की चर्चा कर आश्रम एवं विद्यालय प्रशासन का धन्यवाद किया। शान्तिपाठ के समूह गान के साथ आज का आयोजन सम्पन्न हुआ।

– इं. प्रेम प्रकाश शर्मा, महामंत्री / मन मोहन कुमार आर्य वैदिक साधन आश्रम, तपोवन, नालापानी, देहरादून

परिचय - मनमोहन कुमार आर्य

नाम मन मोहन कुमार आर्य है. आयु ६३ वर्ष तथा देहरादून का निवासी हूँ। विगत ४५ वर्षों से वेद एवं वैदिक साहित्य सहित महर्षि दयानंद एवं आर्य समाज के साहित्य के स्वाध्याय में रूचि है। कुछ समय बाद लिखना आरम्भ किया था। यह क्रम चल रहा है। ईश्वर की मुझ पर अकथनीय कृपा है।

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