मोदी के अस्त्रों से चित्त विरोधी

मोदी विरोध एक बार फिर मोदी विरोधियों को भारी पड़ा है । जो लोग विगत कई उपचुनाव में मोदी लहर के समाप्त हो जाने की बातें कर रहे थे उनको पता चल गया होगा कि मोदी लहर के क्या मायने हैं । उन उपचुनावों में मोदी कहीं भी प्रचार करने नहीं गये थे । इसलिए वहां यह बात जायज ही नहीं बैठती थी कि मोदी लहर कामयाब ही न हो सकी । विश्लेषक सही मायनों में विश्लेषण कर ही नहीं पाते । बिहार में जो तिकड़ी बीजेपी के खिलाफ होकर लड़ी उसे यह समझना चाहिये कि मोदी जिस दिन प्रचार में आयेंगे उस दिन उनके लिए वहां सरकार बचाना भारी पड़ेगा । सही मायनों में अभी तक नरेन्द्र मोदी के व्यक्तित्व को विरोधी जांच ही नहीं पाये हैं । आने वाले दिन कांग्रेस पर विशेष रूप से बहुत भारी हैं । जिस व्यक्ति को चायवाला व अन्य मौत के सौदागर, लकड़बग्घा व कसाई आदि कह कहकर तमाम विरोधी उसे रोकने की कोशिश करते रहे वह उसी अंदाज में इन सब पार्टियों के भविष्य की बलि लेने पर उतारू है।

पटेल के बाद गांधी और फिर नेहरू व इंदिरा गांधी की जयंती पर छह दिन के सफाई कार्यक्रम के लिए बनाई गई समिति में कई कांग्रेसी भी हैं । अब सभी को सफाई करनी है । मुद्दा यह है कि अब कांग्रेस कैसे इससे पीछा छुड़ाएगी ? यदि सफाई नहीं करती है तो फिर अपने ही नेहरू व इंदिरा जी को श्रद्धांजलि देने में पीछे रह जाएगी और मोदी आगे निकल जाएंगे । और यदि सफाई करती है तो मोदी तो आगे निकले हुए हैं ही । अब ऐसे अस्त्र शस्त्रों से सुसज्जित मोदी का मुकाबला करना वाकई कांग्रेस के लिए भारी होगा । राहुल और सोनिया गांधी अपने पूर्वजों को क्या श्रद्धांजलि नहीं देंगे । सारा देश श्रद्धांजलि देगा । देखना दिलचस्प होगा । अब केजरीवाल केा समझ नहीं आ रहा होगा कि अपना झाड़ू कहां रखें । एक व्यक्ति घनघोर राजनैतिक अस्पृश्यता का शिकार अपने तरकश में अभी क्या क्या तीर और छिपाये बैठा है यह देखना भी दिलचस्प होगा ।

डाॅ द्विजेन्द्र , हरिपुर कलां , देहरादून

परिचय - डॉ द्विजेन्द्र वल्लभ शर्मा

Ph.D from university of delhi in sanskrit literature.