कविता

अपहरण

 

वही आनन
वही नयन
सुराहीदार गर्दन
अधरों पर
वही मनमोहक
मुस्कान का आकर्षण

जिसका मेरे सपनो में
अक्सर किया करता हैं
मेरा अचेतन प्रदर्शन

बांहों में भरकर
वही गर्मजोशी से भरा आलिंगन
गालों पर
वही मधुर मृदु चुम्बन
ख्यालों ने
जिसका किया है
प्राय; मुझसे वर्णन

तुम मेरे सपनो में हो
तुम मेरे ख्यालों में हो
जब से तुमने
मेरी नज़रों के द्वार से
मेरे जीवन के चौखट पर
किया हैं
अपना आत्मीय समर्पण

बिना सपनो के
बिना खयालों के भी
मुझे होने लगा हैं
तुम्हारे सुन्दर रुप का दर्शन

मेरे वजूद का
तुम्हारे अंत:करण ने
कर लिया हैअपहरण

किशोर कुमार खोरेन्द्र

किशोर कुमार खोरेंद्र

परिचय - किशोर कुमार खोरेन्द्र जन्म तारीख -०७-१०-१९५४ शिक्षा - बी ए व्यवसाय - भारतीय स्टेट बैंक से सेवा निवृत एक अधिकारी रूचि- भ्रमण करना ,दोस्त बनाना , काव्य लेखन उपलब्धियाँ - बालार्क नामक कविता संग्रह का सह संपादन और विभिन्न काव्य संकलन की पुस्तकों में कविताओं को शामिल किया गया है add - t-58 sect- 01 extn awanti vihar RAIPUR ,C.G.

One thought on “अपहरण

  • गुरमेल सिंह भमरा लंदन

    बहुत अछे खियालात लिखे हैं .

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