कविता

चितचोर

 

अंतरिक्ष के हाथो से
छूट गयी है आकाश में डोर
कटी पतंग सा उड़ रहा हूँ
मैं न जाने किस छोर

अपनी अंजुरी में भर लेता हूँ
चाँद सितारों को
मिटा देती है उसे
लहरो की एक तेज हिलोर

रोशनी हो तो
हम उभर आते हैं
शून्य में यूँ तो
तम है हर ओर

काँटा चुभता है तो
दर्द होता ही है
दूर से कहाँ सुनाई देती है
सागर की
भीषण गर्जनाएँ घनघोर

मेरी पीड़ा को तुम
एक ही नज़र में भाँप लेती हो
मेरी खामोशी को पढ़ लेती हो
तुम हो चितचोर

कोलाहल के भीतर छुपा होता है
गहरा मौन
गहन खामोशी लेकर आती है
विप्लवकारी शोर

किशोर कुमार खोरेंद्र

किशोर कुमार खोरेंद्र

परिचय - किशोर कुमार खोरेन्द्र जन्म तारीख -०७-१०-१९५४ शिक्षा - बी ए व्यवसाय - भारतीय स्टेट बैंक से सेवा निवृत एक अधिकारी रूचि- भ्रमण करना ,दोस्त बनाना , काव्य लेखन उपलब्धियाँ - बालार्क नामक कविता संग्रह का सह संपादन और विभिन्न काव्य संकलन की पुस्तकों में कविताओं को शामिल किया गया है add - t-58 sect- 01 extn awanti vihar RAIPUR ,C.G.

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