Monthly Archives: October 2014


  • माल मार्केट

    माल मार्केट

    बहुत कहने करने पर भी सेठ नहीं माना तो सभी मजदूर और गरीब लोग सरकार के पास अपना दुखड़ा लेकर पहुंचे| लेकिन उनको वहाँ भी निराशा ही मिली| सरकारी अफसर ने कहा ”तुम लोगो को अपनी...

  • हमदम

    हमदम

      एक दूसरे को दोनों ने चुन लिया है एक दूसरे विषय में उन्हें नहीं है वहम इश्क़ की राह में बड़ चले है दोनों के कदम रोज एक कदम रोज एक कदम फासला है बे...

  • भ्रम !!!!!

    भ्रम !!!!!

    मन की आशा से, तृष्णा की कलम से , पानी पे चित्र बनाता हूँ ?कुछ लिखता और मिटाता हूँ ? नव रचना है ,है संगीत नया , हर बार ही स्वप्न सजाता हूँ , विस्मृत स्मृतियों...

  • शंका समाधान

    शंका समाधान

    शंका –  ९ वें वर्ष के आरम्भ में द्विज अपने संतानों का उपनयन करके आचार्यकुल में अर्थात जहाँ पूर्ण विद्वान और पूर्ण विदुषी स्त्री शिक्षा और विद्यादान करने वाली हो अर्थात वहाँ लड़के और लड़कियो को...



  • सपना अगर ये सच हो जाये

    भारत के स्वच्छता अभियान के सिलसिले में मेरी यह कविता मोदी जी के फेसबुक की साईट ‘माई क्लीन इंडिया’ पर प्रकाशित होने योग्य मानी गई और प्रकाशित भी हो गई है. अब आपके समक्ष प्रस्तुत है...

  • सुखद क्षण

    सुखद क्षण

    बच्चे को सड़क पर लोटते देख शीला ठहर गई | बगल ही खड़ी माँ से पूछने पर पता चला बच्चा दीपावली पर पटाखे लेने को मचल रहा था| औरत के पास इतने पैसे ना थे कि...