कविता

फूल

 

तुम कहते हो सारे फूल अच्छे लगते हैं
तेरे जुड़े में गुलाब के फूल अच्छे लगते हैं

तुम्हारी नीयत पर मुझे कोई गुमान नही है
तुम्हे मुझसे हुऐ शरारती भूल अच्छे लगते हैं

उस पार कोहरे से घिरे तुम, जब नज़र आते हो
बीच में गहरी नदी और उँचे पुल अच्छे लगते हैं

गमले में रोप कर जिन जिन पौधों को तुम गये हो
उन पौधों की शाखों में खिले गुल अच्छे लगते हैं

जिस राह पर तुम्हारे पैरों के निशान अंकित हैं
उस पगडंडी के मुलायम धूल अच्छे लगते हैं

किशोर कुमार खोरेंद्र

किशोर कुमार खोरेंद्र

परिचय - किशोर कुमार खोरेन्द्र जन्म तारीख -०७-१०-१९५४ शिक्षा - बी ए व्यवसाय - भारतीय स्टेट बैंक से सेवा निवृत एक अधिकारी रूचि- भ्रमण करना ,दोस्त बनाना , काव्य लेखन उपलब्धियाँ - बालार्क नामक कविता संग्रह का सह संपादन और विभिन्न काव्य संकलन की पुस्तकों में कविताओं को शामिल किया गया है add - t-58 sect- 01 extn awanti vihar RAIPUR ,C.G.

3 thoughts on “फूल

  • विभा रानी श्रीवास्तव

    बहुत बढियाँ

  • विजय कुमार सिंघल

    बहुत अच्छी ग़ज़ल !

  • गुरमेल सिंह भमरा लंदन

    अच्छी कविता .

Comments are closed.