कविता

वुसअत ए मुहब्बत

  चुभते हुऐ इंतज़ार के काँटों में गुलाब सा तुम खिले हो छिटकी हुई यादों की चाँदनी में माहताब सा तुम खिले हो मेरे गम ए हिज्र का तुम्हें ज़रा भी अनुमान नहीं है मुझमे ,रेत में जज़्ब लहरों के आब सा तुम मिले हो हमारी वुसअत ए मुहब्बत तेरी रूह से मेरी रुह तक […]

कविता

फूल

  तुम कहते हो सारे फूल अच्छे लगते हैं तेरे जुड़े में गुलाब के फूल अच्छे लगते हैं तुम्हारी नीयत पर मुझे कोई गुमान नही है तुम्हे मुझसे हुऐ शरारती भूल अच्छे लगते हैं उस पार कोहरे से घिरे तुम, जब नज़र आते हो बीच में गहरी नदी और उँचे पुल अच्छे लगते हैं गमले […]

उपन्यास अंश

आत्मकथा : मुर्गे की तीसरी टांग (कड़ी 7)

अध्याय-3: अक्ल का पुतला यादे माज़ी अज़ाब है या रब ! छीन ले मुझसे हाफिजा मेरा ।। जब मैं कक्षा 5 में ही था, तो मुझसे एक साल आगे पढ़ने वाले लड़कों ने, जो तब तक दूसरे विद्यालय में पहुँच चुके थे, वहाँ के अध्यापकों को पहले ही बता दिया था कि अगले वर्ष यहाँ […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

वेदों की उत्पत्ति कब व किससे हुई?

भारतीय व विदेशी विद्वान स्वीकार करते हैं कि वेद संसार के पुस्तकालय की सबसे पुरानी पुस्तकें हैं। वेद चार है, ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। यह चारों वेद संस्कृत में हैं। महाभारत ग्रन्थ का यदि अध्ययन करें तो ज्ञात होता है कि महाभारत काल में भी वेद विद्यमान थे। महाभारत में योगेश्वर श्री कृष्ण और […]

कविता

कसक

एक आस दबा के रखती हैँ वो अधूरी ख्वाहिशेँ जीने की लालसा को ढँक लेती हैँ घूंघट के नीचे . . . आह भरती ये औरतेँ इनकी अपनी कोई जुबान नहीँ होती हैँ वही कहती हैँ जो बोला जाता है भीँच कर रखती हैँ अपने दर्द को होठोँ के नीचे दांतोँ तले . . . […]

कविता

उड़ान

  अजनबी हो फिर भी मुझसे एक रिश्ता है तेरे मेरे बीच अनाम सा एक रिश्ता है मुहब्बत ,प्यार ,वफ़ा ए इश्क हो यदि तो कतरे में सागर भी आ बसता है इस जहाँ का मकसद मैने जान लिया कुर्वत के लिए इर्फान भी तरसता है वो एक शख़्स क्यों रोज रोज लिखता है चाहत […]

कविता

”यादों का तन्हा रहना”

वक्त से एक लम्हा चुराकर जब मैं सोचती हूँ तुम्हें विस्मृतियों के पार मुझसे होकर गुजरती है तुम्हारी हर याद …… मेरे मन के कोने से दिखते हैं तुम्हारे हर जज्बात तुम्हारे हर लफ्ज से बनती है एक कविता जो मेरी भावनाओं से मेल खाती हैं मैं तैयार हूँ,तुम्हारे हर कविताओं में रंग भरने के […]

सामाजिक

बुढ़ापा और औलाद

आज की संतान बहुत सब्र की बहुत कमी है जवानी में कदम रखते ही उन्हें बुजुर्गो की तरह सत्ता चाहिए ! वे यह भूल जाते है की यह प्रक्रिया समयानुसार स्वत: चलित होती रहती है और ऊनके बुजुर्ग होने पर उन्हें उसी प्रकार प्राप्त हो जाती है लेकिन उन्हें अपनी अस्मिता खतरे में नजर आतीहै। […]

कविता

कविता क्या है?

तन है कविता मन है कविता, लय सुर ताल का धन है कविता। रास है कविता रंग है कविता, जीने का इक ढंग है कविता। दिल है कविता धड़कन कविता, इश्क प्यार का संग है कविता। लोक है कविता परलोक है कविता, स्वप्न लोक का जोग है कविता। सुर है कविता सरगम है कविता, हर […]

कविता

आकाश

  सीने में दर्द का अहसास होने लगा है दिल को इश्क़ का आभास होने लगा है तेरी प्रत्येक करवट मुझे तलाशने लगी है अपने वज़ूद पर मुझे विश्वास होने लगा है सूरज डूब गया चाँद निकल आया इंतज़ार थक कर उदास होने लगा है तेरी यादों की इक शमा मेरे भीतर जल उठी है […]