गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ख़ुशी बेइंतहा जब भी कभी महसूस होती है तुम्हें भी आँख में तब क्या नमी महसूस होती है ? कभी फुरकत भी जाँ परवर लगे, होता है ऐसा भी कभी कुर्बत में कुर्बत की कमी महसूस होती है मिले शोहरत, मिले दौलत, तमन्ना कोई पूरी हो ख़ुशी कैसी भी हो, बस दो घड़ी महसूस होती है […]