Monthly Archives: November 2014

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ख़ुशी बेइंतहा जब भी कभी महसूस होती है तुम्हें भी आँख में तब क्या नमी महसूस होती है ? कभी फुरकत भी जाँ परवर लगे, होता है ऐसा भी कभी कुर्बत में कुर्बत की कमी महसूस होती...