Monthly Archives: November 2014


  • ओर छोर

    ओर छोर

      तेरी याद जाए तो फुरसत मिले तू रूबरू आए तो फ़ुरसत मिले सागर की ओर बहती है नदियाँ कोई हसरत न हो तो फुरसत मिले वो आँखों मे चाँद सा समाए रहते हैं प्यार में...



  • मेरा साक्षात्कार

    आदमी खुद पर हँसे।  खुलकर ठहाके लगाये।  अपनी हरकतों (लेखन) पर चुटकी कसे।  यह सुनने में भले ही मुस्कुराने का कार्य लगता हो लेकिन अट्ठहास हम जैसे युवा रचनाकार को भी अपने कटघरे में खड़ा कर...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ख़ुशी बेइंतहा जब भी कभी महसूस होती है तुम्हें भी आँख में तब क्या नमी महसूस होती है ? कभी फुरकत भी जाँ परवर लगे, होता है ऐसा भी कभी कुर्बत में कुर्बत की कमी महसूस होती...