नववर्ष

नववर्ष कुछ ऐसा आए,
हर्षोल्लास की वर्षा लाए।
उपहारों से झोली भर दे,
रंग-रंगीला जीवन कर दे॥
गजानन आशीष देकर,
सुख समृद्धि की वर्षा कर दें ।।

माँ वीणा विराजे वाणी में,
अपनी शक्ति कलम में भर दें ॥
कविता  उससे  निखरे ऎसी,
विख्यात विश्व में  हमको कर दे॥

गूंजे स्वर कविता के जग में,

जन -जन को आह्लादित कर दे।

शुभकामना  यही  हमारी,
सुख शान्ति की बरखा बरसे।
मन -आंगन सौहार्द रखें हम,
नूतन वर्ष कुछ ऐसा कर दे।

— डा. सुरेखा शर्मा

परिचय - सुरेखा शर्मा

सुरेखा शर्मा(पूर्व हिन्दी/संस्कृत विभाग) एम.ए.बी.एड.(हिन्दी साहित्य) ६३९/१०-ए सेक्टर गुडगाँव-१२२००१. email. surekhasharma56@gmail.com