Monthly Archives: December 2014

  • परावर्तन

    परावर्तन

    पपीहे ने एक दिन चाँद से पूछा क्या ये चांदनी तुम्हारी है चाँद ने सत्य का मार्ग अपनाया कहा …..नहीं ये सूर्य का परावर्तन है पपीहे ने गीत रोक दिया चाँद पर इल्जाम लगाया क्यों मुझे...

  • आत्म समर्पण

    आत्म समर्पण

    आत्म-समर्पण का अभिप्राय है अपनी खुदगर्जी या स्वार्थ का त्याग। जब तक ‘मै’ हूँ का भाव बना रहता है, तब तक आत्म समर्पण की भावना का विकास नहीं होता है। आत्म तत्त्व जब परमात्मा के प्रति...


  • कविता

    कविता

    जो खून–पसीना एक करता कामयाबी की ओर बढ़ता अपने पैरों पर खड़े होकर हर दिलों में हौसला बांटता सदा अधिकारी उसे दबा देते अपनी गली से हटा देते क्योंकि हैं ये सोचते वह चुनौती बन जाएगा...

  • ईश प्रार्थना और प्रारब्ध

    ईश प्रार्थना और प्रारब्ध

    हम इस लेख में प्रार्थना और प्रारब्ध पर विचार कर इन दोनों के परस्पर सम्बन्ध पर भी विचार करेंगे। प्रार्थना एक प्रकार से किसी से कुछ मांगना होता है। हमें जब किसी सरकारी विभाग से कुछ...


  • **अहंब्रह्मास्मि**

    **अहंब्रह्मास्मि**

    मैं मन वीणा का तार, स्वरलिपियों की झंकार नित नूतन हूँ नवकार, प्राणों का प्राणाधार जल थल मरू आकाश में, दिनकर के नए प्रकाश में क्षण क्षण में मैं कण कण में मैं, पथ पर अविरल...


  • वह कविता ..

    वह कविता ..

    एक शब्द या एक किताब को पढ़कर … किसी  पेड़ से उतरती गिलहरियों को देख कर …. या भिखारी के कटोरे से मांग कर . .किसी भी तरह से खोजकर .. एक कविता की नकल करनी है मुझे...

  • अभिव्यक्ति की आज़ादी

    अभिव्यक्ति की आज़ादी

    अभिव्यक्ति की आज़ादी क्या हिन्दू धर्म के खिलाफ बकवास करने से ही मिलती है? अगर सिरफिरा मकबूल हुसैन हिन्दू देवी देवताओं के अशलील चित्र बना कर बेचे तो वह हमारे बिकाऊ हिन्दू विरोधी मीडिया और देश...