कविता

परावर्तन

पपीहे ने एक दिन चाँद से पूछा क्या ये चांदनी तुम्हारी है चाँद ने सत्य का मार्ग अपनाया कहा …..नहीं ये सूर्य का परावर्तन है पपीहे ने गीत रोक दिया चाँद पर इल्जाम लगाया क्यों मुझे मंत्रमुग्ध बनाया अब अगर चाँद चाहता तो झूठ भी बोल सकता था स्वार्थी होता तो भ्रम को चला भी […]

सामाजिक

आत्म समर्पण

आत्म-समर्पण का अभिप्राय है अपनी खुदगर्जी या स्वार्थ का त्याग। जब तक ‘मै’ हूँ का भाव बना रहता है, तब तक आत्म समर्पण की भावना का विकास नहीं होता है। आत्म तत्त्व जब परमात्मा के प्रति अपने को समर्पित कर देता है तो उसका भाव होता है- ‘भगवन मेरी इच्छा नहीं, तेरी इच्छा पूर्ण हो’। […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म ब्लॉग/परिचर्चा

क्या आर्यसमाजी श्रद्धा रहित हैं?

शंका- एक ईसाई भाई ने शंका करी है कि आर्यसमाजियों में श्रद्धा और आस्था नहीं होती इसलिए वह अन्य मतों के विषय में नकारात्मक टिप्पणी करते दीखते है? समाधान- आस्था और श्रद्धा अगर ज्ञान के बिना हो तो वह अन्धविश्वास कहलाता है। एक उदहारण लीजिये जब वर्षा नहीं होती तो कुछ लोग आस्था के चलते […]

कविता

कविता

जो खून–पसीना एक करता कामयाबी की ओर बढ़ता अपने पैरों पर खड़े होकर हर दिलों में हौसला बांटता सदा अधिकारी उसे दबा देते अपनी गली से हटा देते क्योंकि हैं ये सोचते वह चुनौती बन जाएगा अपनी सत्ता बिगाड़ देगा मगर, जो अधिकारी के तलवे चाटता कामयाबी का प्राप्त करता दुम हिलाते फिरते–फिरते अपना अस्तित्व […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ईश प्रार्थना और प्रारब्ध

हम इस लेख में प्रार्थना और प्रारब्ध पर विचार कर इन दोनों के परस्पर सम्बन्ध पर भी विचार करेंगे। प्रार्थना एक प्रकार से किसी से कुछ मांगना होता है। हमें जब किसी सरकारी विभाग से कुछ मांगना होता है तो हम प्रार्थना पत्र लिखते व भेजते हैं। प्रार्थना प्रायः अपने से बड़े व्यक्ति से की […]

राजनीति

युगान्तरकारी परिवर्तन का वर्ष रहा 2014

वर्ष 2014 अब अलविदा हो रहा है और हम सभी लोग आगामी 2015 की तैयारियों में जुटे हैं। 2014 का विचार मंथन चल रहा है। वर्ष 2014 भारतीय राजनीति में हो रहे बदलावों के लिए हमेशा याद किया जायेगा। यह साल देश की राजनीति कोे एक नया स्वरूप प्रदान करके जा रहा है तथा इस […]

कविता

**अहंब्रह्मास्मि**

मैं मन वीणा का तार, स्वरलिपियों की झंकार नित नूतन हूँ नवकार, प्राणों का प्राणाधार जल थल मरू आकाश में, दिनकर के नए प्रकाश में क्षण क्षण में मैं कण कण में मैं, पथ पर अविरल हर रण में मैं करुणा में करुणाकार कहो, आकारों में साकार कहो पथ के काँटों में शूल में भी, […]

बाल कहानी

बाल कहानी : गुरु दक्षिणा -मनोहर चमोली ‘मनु’…

‘गुरु दक्षिणा’ -मनोहर चमोली ‘मनु’ ………………………………. नमन ने पूछा-‘‘मैम। ये गुरु दक्षिणा क्या होती है?’’ गीता मैडम यह सुनकर चैंकी। नमन अक्सर रोचक सवाल करता था। बात-बेबात पर कुछ न कुछ जरूर पूछता था। वह कार्टून फिल्मों का बड़ा शौकीन था। वीडियों गेम्स भी खूब खेलता था। चटोरा भी खूब था। लेकिन क्लास में वह […]

कविता

वह कविता ..

एक शब्द या एक किताब को पढ़कर … किसी  पेड़ से उतरती गिलहरियों को देख कर …. या भिखारी के कटोरे से मांग कर . .किसी भी तरह से खोजकर .. एक कविता की नकल करनी है मुझे .. जिस पेड़ की पत्तियों पर कविताये छपी हुई हैं .. वह  एक पेड़ सदियों से ठहरा हुआ  है कही पर .. इस […]

सामाजिक

अभिव्यक्ति की आज़ादी

अभिव्यक्ति की आज़ादी क्या हिन्दू धर्म के खिलाफ बकवास करने से ही मिलती है? अगर सिरफिरा मकबूल हुसैन हिन्दू देवी देवताओं के अशलील चित्र बना कर बेचे तो वह हमारे बिकाऊ हिन्दू विरोधी मीडिया और देश द्रोहियों के अनुसार चित्रकार की कलात्मिक स्वतन्त्रता गिनी जाती है लेकिन अगर तसलीमा नसरीन इस्लाम के खिलाफ कुछ लिख […]