Monthly Archives: December 2014

  • सुधर जाओ धर्म के ठेकेदारो

    सुधर जाओ धर्म के ठेकेदारो

    आजकल हिन्दू मुस्लिम विवाद कुछ ज्यादा ही गर्म पृष्ठभूमि में जी रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से बुराई निकलने के नाम पर एक दुसरे की कमियां निकली जा रही हैं। मुस्लिम हिन्दू समाज में चुन चुन...

  • लघुकथा : लाली

    लाली इस नाम को सुनते ही होंठो पर बरबस मुस्कुराहट आ जाती है । लाली हमारी गली का कूड़ा उठाने वाली की बेटी , मेरी हम उमर ही रही होगी लगभग , थोड़ा बहुत कम ज़ियादा...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    नींव विश्वास की मजबूत हो तभी पनपते हैं रिश्ते क्षल, कपट, द्वेष की तपिश से पिघलते हैं रिश्ते हसरतों की चाहत में गमों को सिलते ही रहना सच की आधार शिला पर टिके होते हैं रिश्ते...

  • एक क्षणिका

    एक क्षणिका

    अटूट बंधनप्रतीक्षित मनसंवेदनाएँ झकझोरतीकोलाहल अंतर्मनसुधि पटल पर बुनी स्मृतियाँकरती विव्हल …..आये न तुम






  • उपन्यास : देवल देवी (कड़ी ८)

    6. षड्यंत्र के सूत्रधार राजसी सवारियाँ मार्ग के किनारे निर्मित धर्मशाला के सामने रूकी। अग्रगामी घुड़सवारों ने राजसी स्त्रियों के आने की पूर्वसूचना धर्मशाला के प्रबंधक को दे दी थी। प्रबंधक धर्मशाला के मुख्य द्वार पर अगवानी को...