कविता

प्रतीक

नदी के किनारे की रेतीली स्लेट पर अब भी तुम्हारे मन के लहरों की उंगलियाँ कुछ लिख रही होंगी हिचकोले खाते तिनकों से तुम कह रही होगी रुक जाओ पढ़ तो लो मंदिर की सीढियों की झिलमिलाती परछाईयाँ तुम्हारे और करीब आ गयी होंगी धूल धूसरित पीपल की पत्तियाँ कहती होंगी मेरी हथेली पर भी […]

लघुकथा

‘मुहँदेखाई’

नई बहू के गृहप्रवेश करते ही घर में जमा हुई औरतों के बीच कानाफूसी शुरू हो गई| “बडे पन्डित बने फिरते हैं, इन्हें पता ही नहीं था !!” “क्या नहीं पता !” आँखे गोल करती हुई रामदीन काकी बोलीं | “यही की, कि राहुकाल में नई बहू को गृहप्रवेश नहीं कराते हैं|” “हाँ री! सुना […]

उपन्यास अंश

उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 24)

21. प्रथम अभिसार निश्चित समय पर पिता की आज्ञा से अंगरक्षकों से सुरक्षित राजकुमारी देवलदेवी जालिपा माई के उत्सव में सम्मिलित होने को चली। जालिपा माई का मंदिर देवगिरी के समीप था। राजकुमारी के साथ कुछ देवगिरी की दासियां भी थीं, कुछ उसके छोटे-से राज्य बगलाना की। मार्ग में एक दासी जिसे शंकरदेव की विशेष कृपा प्राप्त थी, […]

कविता

प्यार में …….

  तुम्हारी और मेरी कलम की स्याही तुम्हारी नर्म और मेरी सख्त उंगलियाँ तुम्हारे स्नेह और मेरे प्रेम से युक्त शब्द तुम्हारी गंभीर और मेरे शोख से वाक्य तुम्हारे पूर्ण विराम और मेरे अर्ध विराम सभी …आपस में मिलना चाहते हैं तुम्हारे अव्यक्त और मेरे अभिव्यक्त विचार आपस मे सहमत होना चाहते हैं तुम्हारी दिव्य […]

कविता

“गौ माता”

“गौ माता” ••••••••• गौ माता को बचाना । कर्ज दूध का चुकाना।। गौमाता का रक्षा करना बच्चों के जीवन को बचाना। बार-बार गौ माता कहती। हम लोग बहुत शान्त रहती।। मैं किसी से कुछ नहीं चाहती। मैं किसी से कुछ नहीं मांगती।। सबको हमेशा लाभ ही देती। सबको हमेशा दूध से सींचती।। अमृत जैसा दूध […]

लेख हास्य व्यंग्य

विरोध जारी रखें

विरोध करना अच्छी बात है। बहुत ही अच्छी बात। विशेषकर क्रान्तिकारी टाइप के लोगों के लिए ये विशेष रूप से गुणकारी है। और शायद ये क्रान्तिकारी लोगों को पता भी है इसीलिए ये दिन-रात विरोध करने में जुटे रहते हैं। मौका मिला नहीं कि टूट पड़ते हैं और कई बार तो ये मौका पैदा भी […]

कविता

अकेले ही अकेले हूँ

अकेले ही अकेले हूँ ना साथ कोई है मेरे लोग सारे चले गये तन्हा मैं ही रह गया। राही सभी चले गये देखता मैं रह गया दूर गया कारवाँ अकेला ही ठहर गया। फैसला ये अज़ीब है लोगों में मैं बँट गया और जाकर रूका वहाँ सब कुछ जहाँ थम गया। अकेले ही अकेले हूँ […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल : वो लम्हा ठहर गया होगा

जब मिटा कर नगर गया होगा क्या वो लम्हा ठहर गया होगा आइने की उसे न थी आदत खुद से मिलते ही डर गया होगा वह जो बस जिस्म का सवाली था उसका दामन तो भर गया होगा अब न ढूंढो कि सुबह का भूला शाम होते ही घर गया होगा खिल उठी फिर से […]

सामाजिक

महानता

किसी भी व्यक्ति की महानता को आंकने के लिए प्रत्येक समाज या विचारधारा के अलग-अलग पैमाने होते हैं। इन्हीं के आधार पर अशोक, अकबर और सिकन्दर आदि को महान कहा गया है। वेदों में महानता के पांच लक्षण बताये गये हैं। प्रथम लक्षण है व्यक्ति का कर्मयोगी होते हुए परमेश्वर, समाज और राष्ट्र के लिए […]