Monthly Archives: January 2015

  • प्रतीक

    प्रतीक

    नदी के किनारे की रेतीली स्लेट पर अब भी तुम्हारे मन के लहरों की उंगलियाँ कुछ लिख रही होंगी हिचकोले खाते तिनकों से तुम कह रही होगी रुक जाओ पढ़ तो लो मंदिर की सीढियों की...

  • ‘मुहँदेखाई’

    ‘मुहँदेखाई’

    नई बहू के गृहप्रवेश करते ही घर में जमा हुई औरतों के बीच कानाफूसी शुरू हो गई| “बडे पन्डित बने फिरते हैं, इन्हें पता ही नहीं था !!” “क्या नहीं पता !” आँखे गोल करती हुई...

  • उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 24)

    21. प्रथम अभिसार निश्चित समय पर पिता की आज्ञा से अंगरक्षकों से सुरक्षित राजकुमारी देवलदेवी जालिपा माई के उत्सव में सम्मिलित होने को चली। जालिपा माई का मंदिर देवगिरी के समीप था। राजकुमारी के साथ कुछ देवगिरी की...

  • प्यार में …….

    प्यार में …….

      तुम्हारी और मेरी कलम की स्याही तुम्हारी नर्म और मेरी सख्त उंगलियाँ तुम्हारे स्नेह और मेरे प्रेम से युक्त शब्द तुम्हारी गंभीर और मेरे शोख से वाक्य तुम्हारे पूर्ण विराम और मेरे अर्ध विराम सभी...

  • “गौ माता”

    “गौ माता”

    “गौ माता” ••••••••• गौ माता को बचाना । कर्ज दूध का चुकाना।। गौमाता का रक्षा करना बच्चों के जीवन को बचाना। बार-बार गौ माता कहती। हम लोग बहुत शान्त रहती।। मैं किसी से कुछ नहीं चाहती।...

  • विरोध जारी रखें

    विरोध जारी रखें

    विरोध करना अच्छी बात है। बहुत ही अच्छी बात। विशेषकर क्रान्तिकारी टाइप के लोगों के लिए ये विशेष रूप से गुणकारी है। और शायद ये क्रान्तिकारी लोगों को पता भी है इसीलिए ये दिन-रात विरोध करने...




  • महानता

    महानता

    किसी भी व्यक्ति की महानता को आंकने के लिए प्रत्येक समाज या विचारधारा के अलग-अलग पैमाने होते हैं। इन्हीं के आधार पर अशोक, अकबर और सिकन्दर आदि को महान कहा गया है। वेदों में महानता के...