इतिहास

समाज सेवा को जीवन का ध्येय बनाने वाले श्री ठाकुर सिंह नेगी

104 वर्षीय श्री ठाकुर सिंह नेगी देहरादून में आर्य समाज की एक सम्मानीय हस्ती है। जून 1910 में एक क्षत्रीय राजपूत कुल में आपका जन्म हुआ था। हाईस्कूल तक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद आप लैन्सडौन जाकर सेना में भर्ती हो गये जहां आपको लिपिक का कार्य मिला। आप सिपाही के रूप में देश की सेवा करना चाहते थे, अतः आपने यह नौकरी छोड़ दी। 26 वर्ष की आयु होने पर आपको एक पुलिस अधिकारी की कृपा से रेल विभाग में नौकरी मिली। इन दिनों आप तम्बाकू का सेवन, धूम्रपान व पान खाने आदि अनेक व्यस्नों से ग्रसित हो गये। आर्य समाज की संगति से आपने इन्हें छोड़ दिया। आप रेलवे की सेवा से सन् 1970 में सेवानिवृत हुए। इन्हीं दिनों आपने चाय पीना भी छोड़ दिया। समाज सेवा के आपने समय-समय पर अनेक कार्य कियै। आपने एक पाण्डे जाति की विधवा युवती को आर्य समाज, मनकापुर के सहयोग से घर्मच्युत होने से बचाया और उसका पुनर्विवाह भी कराया। सन् 1936 के वर्ष में हैदराबाद रियासत में आर्य समाज के नेतृत्व में आर्यों व हिन्दुओं के धार्मिक अधिकारों की बहाली के लिए एक विशाल सत्याग्रह किया गया था। इन दिनों आप मनका रेलवे स्टेशन पर ही कार्य करते थे। आपने यहां प्रयत्न करके 10 सत्याग्रहियों का एक जत्था हैदराबाद सत्याग्रह में आन्दोलन के लिए भेजा था। हैदराबाद के भारत में विलय में इस आर्य सत्याग्रह का महत्वपूर्ण योगदान रहा है जिसको स्वीकारोक्ति भारत के प्रथम यशस्वी गृहमंत्री व उपप्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने की थी।

धर्म प्रचार में आपकी गहरी रूचि रही है। गोंडा में रेलवे में सेवा के दिनों में आपने आर्य जगत के विख्यात विद्वान एवं शास्त्रार्थ महारथी पं. शान्ति प्रकाश जी को बुलाकर चर्च के एक पादरी से वार्तालाप कराकर उनकी घर-वापसी का शुद्धि यज्ञ सम्पन्न किया था। आपके इस कार्य ने स्थानीय ईसाई समाज में खलबली पैदा कर दी थी। गोड़ा रेलवे जंक्शन पर ही सेवा करते हुए सन् 1967 के दिनों में आपने अंग्रेजी के स्थान पर हिन्दी में कार्य करना आरम्भ कर दिया था। इन्हीं दिनों आपने अपने निजी जीवन में भी अंग्रेजी का प्रयोग छोड़कर हिन्दी का प्रयोग करने का संकल्प लिया जिसका आपने अद्यावधि निर्वाह किया है। आपने विगत 20 वर्ष से 20 निर्धन छात्रों को एक सौ रूपये की मासिक छात्रवृत्ति प्रदान करते हैं। 10 गरीब विधवाओं को भी आप पिछले 15 वर्षों से 50 रूपये मासिक की आर्थिक सहायता प्रदान करते हैं। एक मानसिक विकलांग को आप नियमित आर्थिक सहायता प्रदान करते हैं। गरीबों को सर्दी से बचाने के लिए आप लगभग 15 वर्षों से 50 निर्धन लोगों को कम्बल प्रदान करते हैं। आपने नारारयण सेवा संस्थान, उदयपुर को दान देकर 131 पोलियो ग्रस्त रोगियों के आपरेशन करायं हैं। इसके फलस्वरूप संस्थान ने आपको अपने जेम आफ इण्डिया व राष्ट्रीय रत्न पुरूस्कार से सम्मनित किया है। 23 मई, 2014 को भी आपको दिल्ली में एक ताम्र पत्र भेंट कर संस्थान ने सम्मनित किया है।

आपका जीवन तप व पुरूषार्थ का जीवन रहा है और आपने अनेक समाजोपयोगी कार्य कर दूसरों के लिए उदाहरण प्रस्तुत किये हैं। आपने अनेक आर्य समाजों की स्थापना भी की है। आर्य समाज, धर्मपुर-देहरादून की स्थापना भी आपने की है और इसके उन्नयन के लिए लगभग 1 लाख रूपये व्यय किए हैं। देहरादून में ही नत्थनपुर ग्राम में आपने आर्य समाज की स्थापना की और वहां दो कमरे बनाकर कर अपने धन को पवित्र कार्य में लगाया है। मृत्यु के बाद आपने अपने नेत्रों का दान कर दिया है। सेवानिवृति के बाद आपने एक व्ववसायिक दुकान का संचालन किया जिससे लगभग 10 लोगों को पालन हुआ है। लगभग 8 विवाह भी आपने अपने प्रयासों व व्यय से कराये हैं। आपसे प्राप्त आर्थिक सहायता से शिक्षा ग्रहण करने वाले कुछ बच्चे अच्छे पदों पर सेवारत हैं।

गढ़वाल वेद प्रचार समिति के आप संस्थापक अघ्यक्ष हैं। आपके नेतृत्व में पौड़ी, उत्तरकाशी, सतपुली, नौगांव खाल, लैन्सडौन, दुगड्डा में आर्य महासम्मेलनों का सफल आयोजन हुआ है। उदयपुर में ही आपने रु. 1,71,000/- का आर्थिक सहयोग देकर अनाथ बच्चों के लिए एक प्रार्थना हाल निर्मित कराया है। बच्चों को आपने 100 ऊनी कम्बल भी प्रदान किये हैं। आप अपने परिवार में सभी संस्कार आदि वैदिक रीति से ही कराते हैं। गढ़वाल के बाढ़ पीडि़तो तथा केदारघाटी की त्रासदी से पीडि़त बन्धुओं के सहायतार्थ आपने लगभग 1 लाख का दान दिया है। 105 वर्षीय वयोवृद्ध श्री ठाकुर सिेह नेगी जी को अनेक संस्थाओं व राजनेताओं द्वारा समय समय पर सम्मानित किया जाता रहा है। आपमें अनेक अनुकरणीय गुण हैं जिनसे हम लाभ उठा सकते हैं। आपके जीवन पर निम्न पंक्तियां सत्य चरितार्थ होती हैं।

सदियों की इबादत से बेहतर है वह एक लम्हा।

जो हमने बिताया है किसी एक दुःखी की खिदमत में।

-मनमोहन कुमार आर्य

2 thoughts on “समाज सेवा को जीवन का ध्येय बनाने वाले श्री ठाकुर सिंह नेगी

  1. ऐसे समाज सेवक को शतशः नमन !

    1. लेख पढ़ने तथा अनुकूल प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक धन्यवाद।

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