यह पाकिस्तान तो फिलहाल नहीं सुधरेगा

जब भारत सहित पूरा विश्व नये वर्ष के जश्न में डूबा था और उमंग व उत्साह लबरेज होकर 2015 का स्वागत कर रहा था उस समय भी पाकिस्तान अपनी ओछी हरकतों से बाज नहीं आया। पाकिस्तानी सेना आतंकियों की घुसपैठ व भारत को बडे़ आतंकी हमलों से दहलाने की आईएसआई साजिशें लगातार जारी है। भारत की सेना व बीएसएफ व खुफिया एजेंसियों की अतिरिक्त सर्तकता का ही परिणाम है कि आज पाक अतंकियों के मंसूबे लगातार धराशायी हो रहे हैं। हालांकि खतरा लगातार गहराता जा रहा है। पाकिस्तानी आतंकवादी व उनको संरक्षण प्रदान करने वाले आका पूरी तरह से तिलमिला गये हैं। सीमा पर भारतीय सेनायें जिस प्रकार से कड़ी कार्यवाही कर रही हैं उससे पाक आतंकी संगठन अपने अथक प्रयासें में अभी तक तो फिलहाल सफल नहीं हो सके हैं। पाकिस्तान में भारत विरोधी तत्वों की साजिशें लगातार जारी हैं। 31 दिसम्बर की रात को गुजरात की समुद्री सीमा पर जो कुछ हुआ उससे हालात की गंभीरता को समझा जा सकता है। एक गुप्तचर सूचना के आधार पर भारतीय तटरक्षक ने अरब सागर में बीच समुद्र में की गई एक कार्रवाई में मछली पकड़ने वाली एक संदिग्ध नौका को घेर लिया जिसमें विस्फोटक भरा हुआ था और खबर यह भी है कि उसमें चार संदिग्ध भी सवार थे। जब नौका चारों ओर से घिर गई तो उसे विस्फोट से उड़ा दिया गया।

उसके बाद दो और नौकाओं की भी घेराबंदी की खबर आई। देश की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अनुमान लगाया जा रहा है कि यह पूरी तरह से बहुत बड़ी आतंकवादी वारदात को अंजाम देने की गहरी साजिश थी जिसे अतिरिक्त सतर्कता व चुस्ती से नाकाम कर दिया गया है। यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि इसके माध्यम से आतंकी जेहाद की योजना को असलीजामा पहुचानें की साजिश रच रहे थे। आतंकियों की इतनी बड़ी साजिश नाकाम करने का श्रेय निश्चय ही कोस्टगार्ड को दिया जाना चाहिये जो कि उन्हें देशवासियों व रक्षा तथा गृहमंत्री की ओर से मिला भी है। उधर पाकिस्तान अब भारत में बड़ें पैमाने पर आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए कई प्रकार से काम कर रहा है। पाक रेंजर्स आतंकियों की घुसपैठ करवाने के लिए कवर फायरिंग लगातार कर रहे हैं। लेकिन अब उन्हें मुहतोड़ जवाब भी दिया जा रहा है।

पहली बार ऐसा हुआ है कि जब हमारा एक जवान शहीद हुआ तो बदले में पांच से कुछ अधिक रेंजर्स भी मारे गये तथा उसके कारण पाकिस्तानी सेना की ओर से सफेद झंडे तक दिखा दिये गये। पाकिस्तान के भारत विरोधी कटटरपंथी तत्व नहीं चाहते कि भारत के साथ पाकिस्तान के रिश्ते मजबूत हो व शांतिवार्ता की गाड़ी एक बार फिर पटरी पर लौटैं। इन सभी घटनाओं के बाद व 26/11 आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड लखवी को जिस प्रकार से पाकिस्तानी कोर्ट मेें बार-बार जमानत मिल रही है। इस बात के भी पक्के सबूत मिल रहे हैं कि भारत का मोस्टवाटेंड कुख्यात आतंकी सरगना दाऊद इब्राहीम करांची में ही बैठकर अपने आपरेशन को अंजाम दे रहा है। जबकि पाकिस्तान आनाकानी कर रहा है। दाऊद के खिलाफ भारत ने पाकिस्तान को पर्याप्त सबूत भी सौंपे हैं। कुख्यात आतंकी सरगना हाफिज सईद लगातार धमकियंा दे रहा है तथा भारत व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जमकर जहर उगल रहा है। पेशावर कांड के लिए हाफिज सईद ने भारत को ही निशाना बनाया था और कहा थाकि इसका बदला लिया जायेगा।

पेशावर के निर्मम कांड के बाद पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने काफी कड़ें तेवर दिखाये थे और उम्मीद बंधी थी कि अब आतंकवाद के प्रति पाक सरकार का रवैया बदलेगा और भारत की चिंताओं को समझते हुए भारत विरोधी आतंक के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करेगा लेकिन फिलहाल तो ऐसा होता नहीं दिखलाई पड़ रहा है हालांकि अब हालात और बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया है। लखवी को जमानत फिर नववर्ष पर फायरिंग व आतंकियों की घुसपैठ कराने की नाकाम साजिशें तथा 31 दिसम्बर की रात्रि को गुजरात की समुद्री सीमा पर नौकाकांड से पाकिस्तान की बेहद खतरनाक पोल पूरी दुनिया के सामने बेनकाब हो चुकी है।

भारत के रक्षामंत्री मनोहर पार्रिकर ने कहा कि अब भारतीय सेनाएं दोगुनी ताकत से जवाब दे रही हैं तथा यह भी प्रतीत हो रहा है कि पाकिस्तान सुधरने वाला नहीं हैं। जबकि गृहमंत्री को लग रहा है कि आज नहीं तो कल पाकिस्तान सुधरेगा। लेकिन फिलहाल भविष्य तो अच्छा नहीं दिखलाई पड़ रहा है। कई ज्योतिषियों का मत है कि इस साल सीमा पर तनाव बढ़ेगा तथा यह युद्ध का आकार भी ले सकता है। असल बात तो यह है कि पाकिस्तान सरकार व वहां के कट्टरपंथी तत्व अभी तक प्रधानमंत्री मोदी व उनकी कार्यप्रणाली को समझ नहीं सके हैं तथा वह यह भी भूल कर रहे हैं कि मोदी सरकार भी पुरानी सरकारों की तर्ज पर ही चलेगी। लेकिन अब समय बदल चुका है। अब मोदी के नेतृत्व में बहुमत की मजबूत सरकार है जिस सरकार पर देशहित में कोई भी निर्णय लेने का कोई बाहरी दबाव नहीं है। अब भारतीय सेनायें व खुफिया एजेंसिया पूरी ताकत व बढ़े मनोबल के साथ किसी भी खतरे का सामना पूरी निडरता के साथ कर रही हैं।

— मृत्युंजय दीक्षित