कविता

एक प्रेम गीत: कृष्ण और राधा एक दूजे के विरह में

जीवन की डोरी बंधी तुझसे मोरी
तोरा मैं सजना, सजनी तू मोरी
मैं वट का छोरा तू भानु की छोरी
जीवन की डोरी बंधी तुझसे मोरी

आँखों में मेरे सपने सुनहरे
हर रंग में तेरे दिखते हैं चेहरे
सीपी मैं कोई तू जिसका मोती
दिन नाही बीतें ये रातें ना सोती
आन मिलो अब फिर से हो होरी
जीवन की डोरी बंधी तुझसे मोरी

साँसों में तुमको बसाया है मैंने
संग संग हर क्षण में पाया है मैंने
प्राणों से बढ़कर तुम्हे ही है पूजा
तुम बिन मेरा सखा नाही दूजा
आस यही भेंट हो तुमसे मोरी
जीवन की डोरी बंधी तुझसे मोरी

____सौरभ कुमार दुबे

 

परिचय - सौरभ कुमार दुबे

मैं, स्वयं का परिचय कैसे दूँ? संसार में स्वयं को जान लेना ही जीवन की सबसे बड़ी क्रांति है, किन्तु भौतिक जगत में मुझे सौरभ कुमार दुबे के नाम से जाना जाता है, कवितायें लिखता हूँ, बचपन की खट्टी मीठी यादों के साथ शब्दों का सफ़र शुरू हुआ जो अबतक निरंतर जारी है, भावना के आँचल में संवेदना की ठंडी हवाओं के बीच शब्दों के पंखों को समेटे से कविता के घोसले में रहना मेरे लिए स्वार्गिक आनंद है, जय विजय पत्रिका वह घरौंदा है जिसने मुझ जैसे चूजे को एक आयाम दिया, लोगों से जुड़ने का, जीवन को और गहराई से समझने का, न केवल साहित्य बल्कि जीवन के हर पहलु पर अपार कोष है जय विजय पत्रिका! मैं एल एल बी का छात्र हूँ, वक्ता हूँ, वाद विवाद प्रतियोगिताओं में स्वयम को परख चुका हूँ, राजनीति विज्ञान की भी पढाई कर रहा हूँ, इसके अतिरिक्त योग पर शोध कर एक "सरल योग दिनचर्या" ई बुक का विमोचन करवा चुका हूँ, साथ ही साथ मेरा ई बुक कविता संग्रह "कांपते अक्षर" भी वर्ष २०१३ में आ चुका है! इसके अतिरिक्त एक शून्य हूँ, शून्य के ही ध्यान में लगा हुआ, रमा हुआ और जीवन के अनुभवों को शब्दों में समेटने का साहस करता मैं... सौरभ कुमार! कविता मेरा जीवन सार मेरी भावना का विस्तार छंद छंद में नयी कल्पना नयी क्रांति हेतु उदगार

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