Monthly Archives: January 2015

  • बसंत ऋतु

    बसंत ऋतु

      क्यों तुम चुपचाप हो मौन और अनमन बसंत ऋतु का प्रिये हो चूका है आगमन कलियाँ खिल गयी भंवरे कर रहे पंखुरियों पर गुंजन मंथर हैं सरिता प्रवाह स्थिर से जल में स्वर्णिम किरणे कर...

  • फूलों का राजा गुलाब

    फूलों का राजा गुलाब

    उनका सौन्दर्य अप्रतिम है वे देवताओं को प्रिय हैं कवि भी उनके सौन्दर्य से वशीभूत होकर लिखते हैं कविता वे प्रेम के प्रतिक हैं प्रेमियों के लिए प्रेम के इज़हार का है सर्वोत्त्म तरिका इसलिए भेंट...

  • पुनर्जन्म या आगमन क्यों आवश्यक हैं?

    पुनर्जन्म या आगमन क्यों आवश्यक हैं?

    प्रातःकाल उद्यान में भ्रमण करते हुए आर्यजी और मौलाना साहब की भेंट हो गई। आर्य जी युनिवर्सिटी में प्राध्यापक थे व मौलाना साहब स्थानीय मस्जिद के इमाम। दोनों अच्छे मित्र थे। वार्तालाप करते हुए मौलाना साहब...


  • मेरी अंखियाँ

    मेरी अंखियाँ

    हैं किसी अपने की तलाश में इधर-उधर ताकतीं हैं लोग तो कई हैं पास में फिर भी खुद को तनहा पाती हैं ऐसी हैं मेरी अंखियाँ गुमसुम सी वे रहती हैं दर्द-ए-दिल वे सहती हैं तनहा...


  • उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 23)

    20. प्रीत की बेला राजा कर्ण देव को अपने राज्य से भागे छः साल हो गए। अपने उद्योग और देवगिरी के युवराज शंकरदेव की सहायता से राजा ने मुस्लिम सेना को भगाकर, एक छोटे से राज्य बगलाना पर...

  • ” स्वाद “

    ” स्वाद “

    एक टॅाफी मिला। जैसे गुल खिला। कई दिनों से इन्तजार था। उस टॅाफी के स्वाद का। न जाने कैसा होगा स्वाद। यही दिल के अन्दर आस। तभी अचानक याद आई। वो टॅाफी मेरे हाथ में आई।...

  • नपुंसक

    नपुंसक

    ‘देखो तुम्हारे अतीत को जानते हुए भी मैने तुमसे शादी की।’ पति सुहागरात को पहले लैंगिक संसर्ग के बाद पत्नी से बोला।पत्नी ने पति की बात सुनकर अपनी झुंकी आँखे और झुंकी दी। ‘कहो अब कौन...

  • वंदना !

    वंदना !

    एक पवन भी गाये आज वन्दना तुम्हारी झूम , सरस दिशा-दिशा सनेह से दुलारती | हरा-भरा लंहगा सुनहरी लाई ओढ़नी , कलियों को गूँथ-गूँथ अलकें संवारती | मन में भरी उमंग साजते हैं सप्तरंग , रुचिर...