Monthly Archives: February 2015



  • मधुमास

    मधुमास

    वन में खिल गए पलाश आ गया मधुमास सरस हुए बादल प्यार की बूंदों की हुई बरसात उड़ा कर गोरी का आँचल रसिक हुई बयार छेड़ गयी अमराई में कोयलिया मधुर तान गुनगुनाने लगे भंवरें उपवन...



  • यशोदानंदन-१२

    योगमाया का प्रभाव समाप्त होते ही मातु यशोदा की निद्रा जाती रही। जैसे ही उनकी दृष्टि बगल में लेटे और हाथ-पांव मारते शिशु पर पड़ी, वे आनन्दातिरेक से भर उठीं। शिशु एक पवित्र मुस्कान के साथ...

  • लौटना भर है…

    लौटना भर है…

    हर आना समेटे हैं लौटकर चले जाना मुझ तक आया ,लौट गया तुम तक आकर भी लौट जाएगा दूर हवा हवा में बहती पानी पानी नदी में बहता कुछ तुम बहे कुछ मै बहता रहा साथ-साथ...

  • अंगड़ाई

    अंगड़ाई

      फूलों पर मंडराने फिर आ गए मधुप उड़ने लगे हैं पराग कणो के धूल कच्चे आमों की गंध लिए महकने लगी है बयार खूब महुवा की बूंदों से भींग गयी है सुनहरी स्निग्ध धूप वन...

  • उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 38)

    34. सखी से मंत्रणा दिल्ली के शाही हरम में गुजरात की जबरन अपहृत की गई राजकुमारी देवलदेवी का कक्ष। अब वहाँ साजो सम्मान की हर वस्तु उपलब्ध है जो शाही हरम की शहजादियों और बेगमों के कक्षों में...

  • वो पत्र

    वो पत्र

    हे खुदा हमने यह प्यार कभी न किया होता गर उन्होंने दो पन्नों का वो पत्र न दिया होता यूँ घुट घुट के कभी न जिया होता गर उन्होंने दो पन्नों का वो पत्र न दिया...