“यहाँ दूसरों को ना लाओ भाई •••”

यहाँ दूसरों को ना लाओ भाई।
पूछेगा अपने सारा लोग भाई।

यह वही जगह है सवँरती थी हँसकर,
वह मेरे नयनों में रहती थी धँसकर,
आँखें उस पर रह जाती थी फँसकर,
लहराते थे, घुघराले काले बाल भाई।

उसकी हँसीं बहुत ही कुछ कहती थी,
फिर भी अपने में सदा मग्न रहती थीं,
खुशियाँ बहुत अपने मन में रखती थी,
देती थी सबको खुशियाँ का राग भाई।

परिचय - रमेश कुमार सिंह 'रुद्र'

रमेश कुमार सिंह (हिंदी शिक्षक ) विद्यालय --उच्च माध्यमिक विद्यालय ,रामगढ़ ,चेनारी रोहतास जन्म तारीख --०५/०२/१९८५ शिक्षा --एम.ए. (हिन्दी,अर्थशास्त्र),बी.एड. हिंदी पता--कान्हपुर ,पोस्ट-कर्मनाशा ,जिला --कैमूर (बिहार)८२११०५ मोब.९५७२२८९४१०/९४७३००००८०/९९५५९९९०९८ Email - rameshpunam76@gmail.com प्राप्त सम्मान - भारत के विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं से अब तक 52 सम्मान प्राप्त।