कविता पद्य साहित्य

क्रांतिकारी अनुभूति

आओ बुझती चिंगारी को फिर से हम अंगार बनाएं नए विचारो नयी शक्ति को आओ हम उदगार बनाएं नयी चेतना नवसपनो को हम सबके जीवन में देकर राष्ट्रभक्ति को परम धर्म और जीवन का आधार बनाएं   टूटी नौका कब तक चलती, लहरों से टकराती कैसे लक्ष्य कहाँ तक पा सकते हैं टूटे छूटे सपने […]

कविता पद्य साहित्य

एक अनुभूति!

माहौल में कुछ अजीबियत कुछ सूनापन है आज खाली खाली मेरे ही मन का दर्पण है   हवाएं बह रही हैं, रात ढल चुकी है खामोशी की चिंगारी लबों पर रुकी है अभी कुछ देर से सांसें गिन रहा हूँ कभी चल रही हैं कभी थम रही हैं अकस्मात् कैसा ये बदलता जीवन है आज […]

कविता

चलो उठो….

कदमो के निशान उभरते हैं रास्तो पर रास्ते उभरते हैं मंजिल की सुरत बीते साल बीते दिन मौसम बीते बीत गया हर पहर उम्र का उम्र बीती साथ-साथ हर पहर एक दिन ख़ास का ख़ास दिन किसी एक का बाकी बचे दिनों का जिक्र ख़ाक हुआ अनगिनत किस्से अनगिनत हिस्से गिन-गिनकर बीते जिन्हें चुन-चुनकर रखा […]

ब्लॉग/परिचर्चा सामाजिक

बिहार में राजनीति तले दबी शिक्षा

हमारा बिहार राज्य पहले से ही राजनेताओं के राजनीति एवं भ्रष्टाचार के वजह से गरीब तथा पिछड़ा हुआ है। यहाँ के छोटे से लेकर बड़े लोग या छोटे कर्मचारी से लेकर बड़े अफसर तक भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। जब हमारे माननीय मुख्यमंत्री श्री लालूप्रसाद यादव जी के समय में ही शिक्षा की नीति ऐसी बनी […]

कहानी

वह भिखारी

” बाबू जी … बाबू जी .. दस पांच रूपये दे दीजिये , बहुत भूंख लगी है बच्चे को मेरे दूध लाना है ” जैसे ही चन्दन ने अपनी गाडी एक शानदार बिल्डिंग के सामने रोक के दरवाजा खोलना चाहा तभी उसके सामने एक गन्दा सा और मैले कपडे पहना व्यक्ति आते हुए बोला। उस […]

सामाजिक

सामाजिक समरसता व प्रेम का संदेश देता है होली का पर्व

होली भारतीय संस्कृति का एक महान पर्व है। होली सामाजिक समरसता, भाईचारे, प्रेम व एकता का संदेश देने वाला पर्व है। कहा जाता है कि होली के अवसर पर लोग अपनी पुरानी से पुरानी शत्रुता को भी समाप्त कर होली का आनंद उठाते हैं। होली कई प्रकार से आनंददायक पर्व है। होली लगभग पूरे भारत […]

गीतिका/ग़ज़ल

तेरे मेरे पाक ….

  तेरे मेरे पाक सम्बन्ध में कभी दरार न आये गुल ही गुल बिछे हैं ,राह में कभी खार न आये मन से मन का अटूट नाता होता है उल्फ़त में दरम्याँ हमारे कभी जिस्म की दीवार न आये मैं तो एक रोज पहुँच ही जाऊँगा रूबरू तुम तक तब तक मेरे जुनूने इश्क में […]

कहानी

अधूरे ख़्वाब

नेहा के पास जीने का कोई मकसद नहीं रहा, बस जी रही थी, क्युकि मरना उसके लिए इतना आसान नहीं था | एक के बाद एक समस्याओ से उसका जीवन घिरा रहता था| पता नहीं वो कैसे ये सब बर्दाश्त कर लेती थी |या फिर इसके आलावा और कोई रास्ता ही नहीं बचा था उसकी […]

कहानी

लम्बी कहानी : मर्डर इन गीतांजलि एक्सप्रेस (2)

||| सुबह 12:30 ||| मोबाइल की घंटी की आवाज़ से मेरी नींद खुली। मैंने समय देखा और मोबाइल में देखा तो मेरे नागपुर वाले कस्टमर का फ़ोन था। उसे रीसिव किया, वो  कह रहा था कि उसे अचानक ही बॉम्बे जाना पड़ रहा है। इसलिए वो मुझसे मिल नहीं पायेंगा. उसने अपॉइंटमेंट कैंसल कर दी थी। मैं […]

आत्मकथा

आत्मकथा – दो नम्बर का आदमी (कड़ी 12)

हमारे सेक्शन में एक मात्र मुसलमान आॅपरेटर थे श्री सैयद अब्दुल हसन रिजवी। वे शिया थे और किसी नबाबी खानदान से थे। देखने में बहुत सुन्दर लगते थे। उनकी पत्नी हिन्दू महिलाओं की तरह अपने माथे पर बिन्दी लगाती थीं और माँग भी भरती थीं। वे संजय नागर के पिताजी के आॅफिस में सेवा करती […]