Monthly Archives: February 2015

  • क्रांतिकारी अनुभूति

    क्रांतिकारी अनुभूति

    आओ बुझती चिंगारी को फिर से हम अंगार बनाएं नए विचारो नयी शक्ति को आओ हम उदगार बनाएं नयी चेतना नवसपनो को हम सबके जीवन में देकर राष्ट्रभक्ति को परम धर्म और जीवन का आधार बनाएं...

  • एक अनुभूति!

    एक अनुभूति!

    माहौल में कुछ अजीबियत कुछ सूनापन है आज खाली खाली मेरे ही मन का दर्पण है   हवाएं बह रही हैं, रात ढल चुकी है खामोशी की चिंगारी लबों पर रुकी है अभी कुछ देर से...

  • चलो उठो….

    चलो उठो….

    कदमो के निशान उभरते हैं रास्तो पर रास्ते उभरते हैं मंजिल की सुरत बीते साल बीते दिन मौसम बीते बीत गया हर पहर उम्र का उम्र बीती साथ-साथ हर पहर एक दिन ख़ास का ख़ास दिन...


  • वह भिखारी

    वह भिखारी

    ” बाबू जी … बाबू जी .. दस पांच रूपये दे दीजिये , बहुत भूंख लगी है बच्चे को मेरे दूध लाना है ” जैसे ही चन्दन ने अपनी गाडी एक शानदार बिल्डिंग के सामने रोक...



  • अधूरे ख़्वाब

    अधूरे ख़्वाब

    नेहा के पास जीने का कोई मकसद नहीं रहा, बस जी रही थी, क्युकि मरना उसके लिए इतना आसान नहीं था | एक के बाद एक समस्याओ से उसका जीवन घिरा रहता था| पता नहीं वो...