कविता

गीत- बीते दिन फिर लौट रहे हैं…

बीते दिन फिर लौट रहे हैं लेकर मीठी-मीठी यादें. इन यादों में क्या-क्या है वो आओ तुमको आज बता दें. मेरे पास तुम्हारा आना फिर घंटों-घंटों बतियाना. और हमारी बातचीत को मुस्काकर “सत्संग” बताना. वो प्यारा सत्संग हमारा बोलो क्या हम उसे भुला दें. बीते दिन फिर लौट रहे हैं लेकर मीठी-मीठी यादें. कोई पल अपना […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

महात्मा बुद्ध एवं पुनर्जन्म

महात्मा बुद्ध पुनर्जन्म को मानते थे। डॉ अम्बेडकर अपनी पुस्तक भगवान बुद्ध और उनका धम्म (पृष्ठ संख्या 296-301, संस्करण 2010) में महात्मा बुद्ध की पुनर्जन्म में आस्था को स्वीकार करते है। वह भौतिक शरीर का मृत्यु के पश्चात नाश होना एवं पुनर्जन्म में दोबारा संयोग होना भी स्वीकार करते है। आत्मा विषय के पुनर्जन्म को […]

कविता

गुलामी की सीख

भारत भिखारियों का देश यही है आधुनिकता के लिवास में लिपटे लोगों का सन्देश सच में भिखारी हैं सर्वव्यापक कौन ऐसा शहर या गाँव है जहाँ नहीं इनका ठांव है न जाने अबतक कितनों को देखता रहा हूँ और सोचता भी रहा हूँ भिखारी भिक्षाटन को दर-ब -दर भटकता है भिखारी जानकर ही तो कोई […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

भारतीय संस्कृति में राम का महत्त्व

सृष्टि का बड़ा ही अद्भुत खेल है, जीव जबतक जड था तबतक न तो भूख-प्यास थी और न ही शरीर (आकार) के पोषण एवं सुरक्षा की ही चिंता | ज्योंहीं जड़ से जीव आस्तित्व में आया, चाहे वे वनस्पतियाँ ही क्यों न हों, पोषण एवं सुरक्षा की आवश्यकता महसूस होने लगी | जलचर, थलचर और […]

आत्मकथा

आत्मकथा – दो नम्बर का आदमी (कड़ी 28)

मेरे विवाह में रिश्तेदार अच्छी संख्या में आ गये थे, जैसा कि प्रायः होता है। मैंने अपने बैंक के साथियों और एच.ए.एल., लखनऊ के पुराने साथियों को भी स्वयं जाकर आमंत्रित किया था, परन्तु कोई शामिल नहीं हुआ। हाँ, लखनऊ से हमारे नगर संघ चालक श्री यशोदानन्दन माहेश्वरी पधारे थे। दुर्भाग्य से इसके बाद मैं […]

समाचार

वेदों का ज्ञान अपौरूषेय अर्थात् ईश्वर प्रदत्त हैः आचार्य धनंजय

आर्यसमाज सुभाषनगर का वार्षिकोत्सव संपन्न  आयोजन में पं. धर्मसिंह ने अपनी भजन मण्डली सहित प्रभावशाली भजन प्रस्तुत किये जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया। प्रातःकाल डा. आचार्य धनंजय आर्य के ब्रह्मत्व में बृहद यज्ञ सम्पन्न हुआ जिसमें वेदपाठ और मंत्रोच्चार आर्यसमाज के पुरोहित श्री अमरनाथ एवं श्रीमद्दयानन्द आर्ष गुरूकुल, पौंधा, देहरादून के लगभग 11 ब्रह्मचारियों ने किया। […]

इतिहास

जानिए कौन थे चमार और कैसे बने हेय

चमार शब्द चर्मकार से बना है , चर्मकार यानि चमड़े का कार्य करनेवाले । हिन्दू धर्म में चमड़े का कार्य किसको करने को दिया है यह मनुसमृति के अध्याय 10के 36 वें श्लोक में निर्देश दिया गया है किसे चमड़े का काम करना चाहिए ‘ घिग्वणाना चर्मकार्य ‘ अर्थात- जो समुदाय धिक्कारने का पात्र है […]

उपन्यास अंश

उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 53)

48. देह विडंबना का पूर्ण प्रतिशोध दो घड़ी रात गए द्वार पर कोलाहल सुन देवलदेवी वस्त्र संभालकर शय्या से उठ गई। देवलदेवी इस समय कक्ष में अकेली थी। कोलाहल सुनकर उनके मुख पर भय के स्थान हर्ष के चिह्न उभर आए। उन्होंने ताली का संकेत किया, आठ-दस सैनिकों ने कक्ष में प्रवेश किया साथ में अंधा शहजादा खिज्र […]

संस्मरण

मेरी कहानी-12

स्कूल हम रोज़ाना जाते थे और स्कूल खुलते ही स्कूल की एक खुली जगह पर एकत्र हो जाते। हर क्लास की अपनी अपनी लाइन होती। हर रोज़ दो हुशिआर लड़कों को सारे स्कूल के आगे खड़े होना होता था और वोह दो से शुरू हो कर बीस तक मुहारनी बोलते, जिस को पहाड़े कहते थे, […]

ब्लॉग/परिचर्चा राजनीति लेख

जो भी हुआ, गलत हुआ

क्रिकेट के विश्व कप का खुमार भारतीय जनमानस से उतर चुका है. भारतीय टीम अब घर लौट चुकी है. राष्ट्र धर्म और अकूत मनोरंजन वाला महंगा खेल ही भारतीयों में राष्ट्रधर्म की मदिरा पिलाता है. भारत जब तक जीतता रहता है, खिलाड़ियों की खूब प्रशंशा होती है, पर हारने के बाद आक्रोश भी वैसा ही […]