Monthly Archives: March 2015

  • राम-भजन : निर्गुन

    राम-भजन : निर्गुन

    छन्द: बचपन  बीता  खेल-खेल में, मस्ती  में  तरुणाई धन-दौलत,यश के पीछे; जीवन-भर दौड़ लगाई देख  बुढ़ापा  थर-थर  काँपा, भूल  गई  ठकुराई कभी राम का नाम लिया ना,बिरथा जनम गँवाई ००००००० उजली चादर  मैली  कर ली, कैसे ...




  • !! नारी तुम !!!!!!!

    !! नारी तुम !!!!!!!

    नारी तुम माधुर्य हो इस सृष्टि की सुन्दर रचना का स्वर से सज्जित रागिनी हो विश्व वीणा के सप्तक का शक्ति तुम्ही हो लक्ष्मी तुम्ही हो सर्व गुण सम्पन्न शारदा श्रद्धा स्नेह, करुणा , ममता हो...

  • उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 52)

    47. स्त्रैण सुल्तान देवगिरी में शाही खेमा लगा है। उस खेमे में सुल्तान मुबारक और वजीर खुशरव शाह मौजूद हैं। देवगिरी के राजा हरपाल देव की जीवित खाल खिंचवाने के बाद शाही खेमे में जश्न का माहौल है।...

  • बुद्धिजीवी का विमर्श

    बुद्धिजीवी का विमर्श

    लोगों को (मुख्य रूप से बुद्धिजीवियों को) ये कहते हुए अक्सर सुनता हूँ कि वक्त बहुत खराब हो गया है। विमर्श के लिए कोई जगह शेष नहीं बची है। संक्रमण काल है। गुजरे जमाने को तो...

  • देवी पूजा

    देवी पूजा

    आंख खुलते ही हर रोज की तरह आज भी रसोईघर से मम्मी  की आवाज के साथ -साथ बरतनों की उठापटक की आवाज सुनाई दी,पर हैरानी की बात आज कामवाली बाई की आवाज नहीं आ रही थी।...


  • यशोदानंदन-३१

    कालिया नाग ने श्रीकृष्ण  के आदेश का त्वरा से पालन किया। श्रीकृष्ण  भी मुस्कुराते हुए अपने स्वजनों के पास लौट आए। वृन्दावन के वासियों, माता यशोदा, महाराज नन्द और समस्त गोधन को तो जैसे उनके प्राण...