कविता

“मित्र”

सहयोग हमेशा करो मित्र की, खुशियाँ लेकर तन-मन-धन से। काम सब पुरा करो उसकी, मिल-मिलाकर इमान्दारी से। खाना अगर तुम्हें आया हो, उसे खिलाकर तुम खाओ। फल मेवा अगर मिठाई हो, मील बाट कर खाओ। तुम्हारे हर काम में साथी भी, हँसकर हाथ बटायेगा। पड़ेगा अगर काम तुम्हें भी, पूरा करके दिखलायेगा।

हास्य व्यंग्य

कलयुग में सुदामा

कहते हैं कि दो सांडो़ं की लड़ाई में बाड़ी उजड़ जाती है। लेकिन मैंने पहली बार दो नहीं बल्कि तीनों सांढ़ों को एक बिंदू पर एकमत होते देखा है। धर्म कहता है कि कलयुग चल रहा है, विज्ञान और इतिहास भी इस दौर को कलयुग कहते हैं। विज्ञान और इतिहास कहते हैं कि इस दौर […]