Monthly Archives: March 2015


  • मधु यामिनी

    मधु यामिनी

      छिटकी है चांदनी  अम्बर में  सितारों के नूर से भरी  बह रही है  एक और मंदाकनी  बादलों की ओट से  पूनम का चाँद भी  हमें झाँक रहा है तुम्हारे और मेरे मिलन की है यह...

  • यशोदानंदन-१३

    कंस एक क्रूर अधिनायक था। पर साथ ही चतुर और धूर्त राजनीतिज्ञ भी था। मथुरा का वह राजा बन ही गया था। वहां की प्रजा, ऐसा प्रतीत होता था कि एक सांस लेने के बाद दूसरी...

  • सबै भूमि गोपाल की

    सबै भूमि गोपाल की

    आज से लगभग पचास साल पहले हमारे गांवों में खेतों के बड़े बड़े प्लॉट होते थे. कोई भी प्लॉट एक बीघे से कम का नहीं होता था. अधिकांश खेतों में मेड़ें नहीं होती थी. लोग अपने...

  • “मित्र”

    “मित्र”

    सहयोग हमेशा करो मित्र की, खुशियाँ लेकर तन-मन-धन से। काम सब पुरा करो उसकी, मिल-मिलाकर इमान्दारी से। खाना अगर तुम्हें आया हो, उसे खिलाकर तुम खाओ। फल मेवा अगर मिठाई हो, मील बाट कर खाओ। तुम्हारे...

  • कलयुग में सुदामा

    कलयुग में सुदामा

    कहते हैं कि दो सांडो़ं की लड़ाई में बाड़ी उजड़ जाती है। लेकिन मैंने पहली बार दो नहीं बल्कि तीनों सांढ़ों को एक बिंदू पर एकमत होते देखा है। धर्म कहता है कि कलयुग चल रहा...