Monthly Archives: April 2015


  • प्रार्थना मुक्ति की

    प्रार्थना मुक्ति की

      वरदानों का अभिशाप भोगते आज तुम्हें भागते दौड़ते गर एक नाम याद आये तो कर देना एक प्रार्थना हो जाये शायद उसकी मुक्ति…. पिता के मोहपाश ने बांध दिया फांस में अमरता की जंजीर में...


  • मेरा मन सोचता है कि

    मेरा मन सोचता है कि

      जब आया भूकंप नेपाल में पूरे उत्तर प्रदेश में अचानक प्राकतिक दुर्घटना घटी उसी पल जमीन फटी सजे संवरे सुसज्जित गृह खँडहर में बदल गये शमशान गृह में ही सारे शहर ही बदल गये मेरा...

  • यादें

    यादें

    पंछी गाते गीत लहरें सुनाती संगीत तपती धूप में यादों के बादल दे रहे छांव नरम नरम घास सहला देती पांव

  • मज़दूर दिवस

    मज़दूर दिवस

    ०१ मई २०१५ , ‘मज़दूर दिवस’ पर सभी ईमानदार मेहनतकश इंसानों को समर्पित— मज़दूर दिवस, कब यह वक़्त बदलेगा- कब मज़दूर का चेहरा, कोई हँसता हुआ देखेगा, पर यह वक़्त वक़्त क्यों इसे, हर बार सताता...

  • अहिवाती धरती

    अहिवाती धरती

    मै अहिवाती धरती हूँ, मुझे बेवा तो न बनाइये मेरा सुहाग है हरियाली, सूनी मांग तो न बनाइये मै ही माँ की ममता हूँ, हर जीव-जंतु की जननी हूँ श्रृंगार न मेरा रंजित हो, मुझे बंजर...


  • यशोदानंदन-५८

    “राधा!” उद्धव के कंठ से अस्फुट स्वर निकला। “कौन, उद्धव?” राधा का प्रतिप्रश्न उद्धव जी ने सुना। गोपियों से बात करते-करते, उन्हें समझाते-बुझाते सूरज कब पश्चिम के क्षितिज पर पहुंच गया उद्धव जी को पता ही...