कविता पद्य साहित्य

जब तुम मिली

जब तुम मिली मुझे ऐसा लगा।
जमाने की सारी खुशी मिल गई।

जब तुम मिली,तब मैं ऐसा समझा।
जिन्दगी में खुशियों की बहार आ गई।

जब तुम मिली मुझे महसूस हुआ।
तरसते लबों को हँसीं मिल गई।

जब तुम मिली तो मैं अन्दाज़ लगाया।
सफर में उड़ने के लिए पंख जुड़ गई।
————–रमेश कुमार सिंह ♌

परिचय - रमेश कुमार सिंह 'रुद्र'

रमेश कुमार सिंह (हिंदी शिक्षक ) विद्यालय --उच्च माध्यमिक विद्यालय ,रामगढ़ ,चेनारी रोहतास जन्म तारीख --०५/०२/१९८५ शिक्षा --एम.ए. (हिन्दी,अर्थशास्त्र),बी.एड. हिंदी पता--कान्हपुर ,पोस्ट-कर्मनाशा ,जिला --कैमूर (बिहार)८२११०५ मोब.९५७२२८९४१०/९४७३००००८०/९९५५९९९०९८ Email - rameshpunam76@gmail.com प्राप्त सम्मान - भारत के विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं से अब तक 52 सम्मान प्राप्त।

2 thoughts on “जब तुम मिली

  1. ठीक है ! हालाँकि सुधार की बहुत गुंजायश है.

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