क्षणिका

क्षणिकायें…

1-खुशी

रास्ते में मिले पेड़ नदी और सागर

लेकिन

खुश हुआ एक दिन मैं तुम्हें पाकर

 

2-रास्ता
मेरा सिर्फ
तुझसे है वास्ता
तेरी और ही जाता है
मेरा हर रास्ता

 

3-हीरा

तेरे नूर से
रहता हूँ सदा घिरा
मैं सोना हूँ तू है हीरा

 

4- फेसबुक

आपके आते ही आ जाती है जान
फेसबुक लगने लगता है महान

 

5-सरसार

देख कर जमाले यार

हो गया हूँ मैं तो सरसार

उन्हें इस बात की खबर नहीं है

क्या पता हो जाता उन्हें ऐतराज

{सरसार =मस्त

जमाले यार =महबूब का हुस्न }

 

6- करीब

बोलती है उनकी आँखें

मिलो कभी करीब आके

 

7- तन्हाई

तुम्हारे बगैर मैं अब ऊब जाता हूँ
तन्हाई के सागर में डूब जाता हूँ

 

8- चुप

क्या अब चुप रहना है

कुछ नहीं कहना है

 

9-जुगनू

रात के अंधेरों में

जुगनू सा चमकते हो

मैं तुम्हें नहीं भूला हूँ

 

किशोर कुमार खोरेन्द्र

किशोर कुमार खोरेंद्र

परिचय - किशोर कुमार खोरेन्द्र जन्म तारीख -०७-१०-१९५४ शिक्षा - बी ए व्यवसाय - भारतीय स्टेट बैंक से सेवा निवृत एक अधिकारी रूचि- भ्रमण करना ,दोस्त बनाना , काव्य लेखन उपलब्धियाँ - बालार्क नामक कविता संग्रह का सह संपादन और विभिन्न काव्य संकलन की पुस्तकों में कविताओं को शामिल किया गया है add - t-58 sect- 01 extn awanti vihar RAIPUR ,C.G.

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