हास्य व्यंग्य

हास्य व्यंग : बयानबाजी का सेंसेक्स

उन्हे इस बात का बहुत दुख है कि उन्हे अब कोई सीरियसली नहीं लेता | उनके बयानों पर ज्यादा चर्चा नहीं होती | राष्ट्रीय स्तर पर कोई उठापटक नहीं होती | वे बयानबाज नेता हैं | उनके बयानो पर ही उनकी राजनीति टिकी है | उनके बयानो पर ही उनकी कमाई टिकी है | उनके बयान ही उनकी पूंजी हैं | उनके बयान ही उनकी राष्ट्रीय धरोहर हैं | पर आजकल उनके बयानों का सेंसेक्स नीचे गिर रहा है | चाहे वे दर्जन भर बच्चे पैदा करने वाला बयान दे, चाहे दर्जन भर बच्चों वालों की नसबनदी करवाने की बयानबाजी करें | लोग उनके बयानों पर ज्यादा कान नहीं दे रहे है | वे पाकिस्तान परस्ती की बाते करे तो भी कोई उन्हे भाव नहीं दे रहा |

उनके बयानों पर मीडिया भी ठीक ध्यान नहीं दे रहा है | कभी उनके बयानो के दम पर ही चैनलों की टीआरपी बढ़ जाती थी | अखबारों का सर्कुलेशन हवा पर सवार हो जाता था | जिस दिन उनके खास बयान वाले अखबार की दस –बीस प्रतियाँ चौराहे पर जलायी जाती थी , उसके अगले दिन ही उस अखबार की डिमांड बढ़ जाती थी | लोगों मे उनके बयान का एक्स्पोज्ड संस्कारण पढ़ने की उत्सुकता जागृत हो जाती थी | उनके घर पर खबरियों की भीड़ हो जाती थी | किन्तु आजकल उनके बयानों पर ज्यादा हो हल्ला नहीं मचता | प्रतियाँ नहीं फूंकी जाती | चैनलों पर डिबेट नहीं होते | चाय पान की दुकानों पर तू तड़ाक बंद होने लगी है |

अभी अभी उनके प्रिय चापलूस नारद जी ने बताया है कि नेता जी ! लोग जागरूक हो रहे हैं | जनता की नई पीढ़ी अब समझदार हो गई है | चैनल वाले बयान को सेंसर करके दिखा रहे हैं | अखबार वाले उसे एक कोने मे छोटी सी हेडलाइन मे समेट दे रहे हैं | लोग आपके बयान पढ़ सुनकर सीधे खौलती चाय मुंह मे डालने के बजाय आराम से चुसकियाँ लेने लगे है | यही नारद इधर भी बता गया है कि इस खुलासे से दुखी बयानबाज नेता जी जल्द ही अपना बाल खुद नोचने की सोचने लगे है | शायद इसी से कोई बड़ी हेडलाइन फिर मिल जाय |

-– अरविन्द कुमार ‘साहू’

 

अरविन्द कुमार साहू

सह-संपादक, जय विजय

One thought on “हास्य व्यंग : बयानबाजी का सेंसेक्स

  • विजय कुमार सिंघल

    करारा व्यंग्य !

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