कहानी

लुटेरे

आज प्रदीप पहली बार चोरी करने के इरादे से , रात के काले अँधेरे में, घर से बाहर निकल पड़ा । वो कोई पैदाइशी चोर नहीं था, पर जिंदगी की बेरुखी और गरीबी ने उसे इस काम की और धकेल दिया था । कभी कभी इंसान हालातों की चपेट में, इस कदर फस जाता है […]

हास्य व्यंग्य

यथार्त व्यंग = शीर्षक =प्रियतमा

प्रियतमा ने खुश होकर कहा बंद करो तकरार मिल कर होली खेलेंगे साल के बारहों मास साल के बारहों मास होगी झूम -झुमाई या सासू माँ से दूर हुई अब आरारआईया ================================== वाह प्रियतमा अब समझ मे आई तेरी बात ================================= जाऊंगी मयके मम्मी को ले आऊँ साथ बैठ पकौड़ी खाऊंगी मै, मम्मी प्रियतम के […]

कविता

हूक

चीख बाहर नहीं आती आह! आह आती है , कसक सी उठती हैं किसी अपरिचित ने बांह पकड़ झिंझोड़ दिया मेरा सर्वस्व और कह रहा हो कितने डग भर लोगे मेरे बिन, टूटी इमारते मलबे के ढेर क्या ? रख पायेगा संभाल निर्मल पानी और पानी की कहानी, अपार पीड़ा सहने बाद आक्रोशित धरा पीर […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ब्रह्मचर्य विद्या, स्वस्थ जीवन व दीर्घायु का आधार

ओ३म् संसार में धर्म व संस्कृति का आरम्भ वेद एवं वेद की शिक्षाओं से हुआ है। लगभग 2 अरब वर्ष पहले (गणनात्मक अवधि 1,96,08,53,115 वर्ष) सृष्टि की रचना व उत्पत्ति होने के बाद स्रष्टा ईश्वर ने अमैथुनी सृष्टि में चार ऋषियों को वेदों का ज्ञान दिया था। इस वैदिक ज्ञान से ही वैदिक धर्म व […]

आत्मकथा

स्मृति के पंख – 23

यह 1946 या 47 की बात है। वहाँ से भ्राताजी के खत आते। उनसे वह काफी परेशान से लगते जैसे रोजाना उनकी तकलीफ बढ़ रही है। मैंने भाई श्रीराम को भ्राताजी की खबर लेने भेजा। उन्होंने वापस आकर कहा कि वह बहुत दुखी हैं। एक जगह में फौजी कैम्प लगे हैं, वहाँ रहते हैं। सामान […]

कुण्डली/छंद

ताजी खबर : ताजी कुंडलिया

आया ऐसा जलजला, हिला पुनः जापान। जिसके कारण देखिए, काँपा हिंदुस्तान। काँपा हिंदुस्तान, राजधानी फिर डोली। देती प्रकृति जवाब, पाप की गठरी खोली। कह ‘पूतू’ कविराय, हृदय में खौफ समाया। अबकी इतनी बार, जलजला कैसे आया॥ पीयूष कुमार द्विवेदी ‘पूतू’

कविता

चक्रव्यूह !

  इस जिंदगी का क्या भरोसा कब शाम हो जाय , भरी दोपहरी में कब सूरज डूब जाय …. उम्मीद के पतले  सेतु के सहारे मकड़ी सा  आगे कदम बढ़ा रहे है और खुद के बुने जाले में फंसकर छटपटा रहे है |   क्या यह मेरा भ्रम है ? कि जाले मैं ने बुने […]

स्वास्थ्य

जानिए कैसे कैसे नुस्खे हैं इलाज के आयुर्वेद में

मित्रो, आपने बहुत से लोग देखे होंगे जो आयुर्वेदिक भक्त होते हैं अर्थात आयुर्वेदिक इलाज के गुण गाते हुए ऐलोपेथी को भला बुरा कहते हैं । उनकी नजर में आयुर्वेदिक दवाइयाँ रामबाण होती हैं और उनके सामने ऐलोपैथिक दवाइयाँ कचरे का ढेर। पर यह बात अलग है की बीमार होने पर वे लोग हास्पिटल में […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मनुष्य समाज के लिए हानिकारक फलित ज्योतिष और महर्षि दयानन्द

ओ३म् सृष्टि का आधार कर्म है। ईश्वर, जीवात्मा एवं प्रकृति तीन अनादि, नित्य और अविनाशी सत्तायें हैं। सृष्टि प्रवाह से अनादि है परन्तु ईश्वर के नियमों के अनुसार इसकी उत्पत्ति-स्थिति-प्रलय-उत्पत्ति का चक्र चलता रहता है। जीवात्माओं को कर्मानुसार ईश्वर से जन्म मिलता है जिसमें वह पूर्व जन्मों के कर्मों का फल भोगते हैं व मनुष्य […]

मुक्तक/दोहा

कुछ मुक्तक

(1) जीवन की आड़ी तिरछी राहों पर आगे बढ़ता चल बाधा से घबराना कैसा सोच समझ पग धरता चल जन काँटों को चुन एक तरफ कर समतल कर दे राहों को दुःखी हृदय में प्रेम जगा कर मुस्कानों से भरता चल (2) सुजला सुफला शस्य श्यामला सपनों में ही शेष रह गया बहुत किया दोहन […]