क्षणिका

क्षणिकाएं

1-तुम लौ हो मैं हूँ बाती
एक दीया प्यार का
यूँ ही सदा जलता रहे

२-दिन
किसी न किसी दिन तो
तुम अपने दिल की बात मुझसे कहोगे
उस दिन के इंतज़ार में जिए जा रहा हूँ

३-ख़ामोशी
तेरी ख़ामोशी के सहारे ही जी लेंगे
यह सोच कर कि तुमने
बहुत कुछ मन ही मन
मुझसे कहा होगा

४-बेवज़ह
इस जहां में ऐसी है कोई जगह
जहाँ पर हम दोनों मिले बेवज़ह

५-फर्क
तुझमे और मुझमे बस है फर्क इतना
तुम मुझे भूल जाते हो
मैं तुम्हारी यादो के जल से
भरा रहता हूँ सागर जितना

६-लफ्ज़
मेरे शब्द तेरे ही तो लफ्ज़ होते हैं
अक्षरों में तेरी बोलती आँखे
तेरे मुस्कुराते लब
उपलब्ध होते हैं

७-पत्थर
दिल तोड़ना न तुझे आता है न मुझे
हर मोड़ पर इसलिए मील की जगह
लम्बी इंतज़ार के पत्थर होते है

८-परिचय
शब्दों के द्वारा होता है
जब एक दूसरे से परिचय
भींग जाता है तब
स्निग्ध स्नेह से ह्रदय

९-गुरुर
तुम्हें अपने हुस्न पर है गुरुर
मेरे इश्क़ में भी पर है शुरुर

kishor kumar khorendra

किशोर कुमार खोरेंद्र

परिचय - किशोर कुमार खोरेन्द्र जन्म तारीख -०७-१०-१९५४ शिक्षा - बी ए व्यवसाय - भारतीय स्टेट बैंक से सेवा निवृत एक अधिकारी रूचि- भ्रमण करना ,दोस्त बनाना , काव्य लेखन उपलब्धियाँ - बालार्क नामक कविता संग्रह का सह संपादन और विभिन्न काव्य संकलन की पुस्तकों में कविताओं को शामिल किया गया है add - t-58 sect- 01 extn awanti vihar RAIPUR ,C.G.

2 thoughts on “क्षणिकाएं

  • गुरमेल सिंह भमरा लंदन

    खोरेंदर भाई , सभी क्षणिकाएं अच्छी है लेकिन यह बहुत अच्छी लगी ,३-ख़ामोशी तेरी ख़ामोशी के सहारे ही जी लेंगे
    यह सोच कर की तुमने
    बहुत कुछ मन ही मन
    मुझसे कहा होगा

  • विजय कुमार सिंघल

    अच्छी क्षणिकाएं !

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